250 करोड़ की साइबर ठगी का ‘साम्राज्य’ ध्वस्त! AC छोड़ जेल पहुंचे आरोपी, पहली रात ही उड़ गई नींद

Editorial
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लखनऊ करोड़ों रुपये की आलीशान जिंदगी, एयर कंडीशनर वाले दफ्तर, मोटी सैलरी और विदेशी नागरिकों को ठगकर ऐश करने का सपना… लेकिन अब यही लोग जेल की सलाखों के पीछे गर्मी में करवटें बदलने को मजबूर हैं। राजधानी लखनऊ में 250 करोड़ रुपये से अधिक की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार 119 आरोपियों की जिला जेल में पहली रात बेहद मुश्किलों में गुजरी। जिन लोगों की जिंदगी एसी कमरों और आधुनिक सुविधाओं की आदी हो चुकी थी, उन्हें अब जेल की सख्त व्यवस्था और उमस भरी रात का सामना करना पड़ा।जेल सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश आरोपी पूरी रात सो नहीं सके। भीषण गर्मी और जेल के माहौल ने उनकी बेचैनी बढ़ा दी। कई आरोपियों ने बेमन से जेल का खाना खाया, जबकि कुछ देर रात तक अपने भविष्य और परिवार की चिंता में डूबे रहे। बताया जा रहा है कि कई युवक-युवतियां इस बात का अफसोस करते नजर आए कि कुछ हजार रुपये ज्यादा कमाने की चाह उन्हें सीधे जेल तक ले आएगी, इसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उन्हें नियमानुसार बैरकों में रखा गया है। शुक्रवार को किसी भी आरोपी से मिलने उनके परिवार का सदस्य जेल नहीं पहुंचा, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।

ऐसे चलता था 250 करोड़ की ठगी का खेल

जांच में सामने आया है कि लखनऊ की समिट बिल्डिंग में ‘सोलेरिस सॉल्यूशन’ नाम से एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। जनवरी 2025 में शुरू हुए इस कॉल सेंटर से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करीब 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई।गिरोह का पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम करता था। अमेरिका में बैठे साथी पहले वहां की प्रतिष्ठित कंपनियों के टोल-फ्री नंबरों की नकल तैयार करते थे। इन नंबरों को इंटरनेट पर इस तरह प्रचारित किया जाता था कि लोग उन्हें असली समझकर कॉल कर बैठते। जैसे ही कोई अमेरिकी नागरिक उस नंबर पर फोन करता, उसकी कॉल वीओआईपी (Voice Over Internet Protocol) तकनीक के जरिए सीधे लखनऊ स्थित कॉल सेंटर में ट्रांसफर हो जाती।इसके बाद प्रशिक्षित टेली कॉलर खुद को एफबीआई अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे। उन्हें पोर्नोग्राफी या अन्य गंभीर मामलों में गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी जाती थी। डर और घबराहट में लोग गिरोह के बताए गए खातों में मोटी रकम ट्रांसफर कर देते थे।

अंग्रेजी अनिवार्य, मोटी सैलरी का लालच

पुलिस जांच में पता चला है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को 30 से 40 हजार रुपये तक वेतन दिया जाता था। नौकरी के लिए अंग्रेजी बोलना अनिवार्य था ताकि विदेशी नागरिकों से आसानी से बातचीत की जा सके। सभी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता था कि किस तरह लोगों को बातचीत में उलझाकर उनसे पैसे ऐंठे जाएं।

डीसीपी क्राइम अनिल यादव के अनुसार, पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। गिरोह का संचालन भारत और अमेरिका में बैठे लोगों के समन्वय से किया जा रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड और विदेश में बैठे सहयोगियों की तलाश में जुटी है।

छापे के दौरान रो पड़ीं कई युवतियां

पुलिस ने मंगलवार रात समिट बिल्डिंग में छापा मारकर पूरे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई देर रात शुरू हुई और बुधवार शाम तक लगातार चलती रही। ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ के बाद कई बड़े नाम सामने आए।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कई युवतियां घबराकर रोने लगीं। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों को बुलाना पड़ा। पूछताछ में दोनों ऑपरेशन मैनेजरों ने गिरोह के सरगना समेत कई प्रभावशाली लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश जारी है।

डिजिटल सबूतों से खुलेगा पूरा नेटवर्क

पुलिस ने कॉल सेंटर से बड़ी मात्रा में कंप्यूटर, सर्वर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इन सभी की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंचाई गई।पुलिस का मानना है कि यह केवल एक कॉल सेंटर का मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का संगठित नेटवर्क है, जिसके तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं।

गर्मी से ज्यादा सता रही है भविष्य की चिंता

जो आरोपी कुछ दिन पहले तक विदेशी नागरिकों को धमकाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे, वही अब जेल की बैरकों में अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं। आलीशान ऑफिस, एसी की ठंडी हवा और आसान कमाई का सपना अब सलाखों के पीछे सख्त हकीकत में बदल चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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