100 किलो के 51 वर्षीय मरीज की एंडोस्कोपिक हार्ट सर्जरी, बिना छाती खोले बदला माइट्रल वाल्व

Editorial
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लखनऊ  लखनऊ के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एक जटिल हृदय रोग से जूझ रहे 51 वर्षीय मरीज की एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक से सफल माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई। करीब 100 किलो वजन वाले मरीज को गंभीर रूमेटिक माइट्रल वाल्व बीमारी के साथ फेफड़ों में बढ़े हुए ब्लड प्रेशर और पहले स्ट्रोक की समस्या रह चुकी थी। जटिल चिकित्सकीय स्थिति के बावजूद डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के जरिए सफल सर्जरी की।मरीज लखनऊ के मलिहाबाद के रहने वाले हैं और सऊदी अरब में काम करते हैं। लंबे समय से उन्हें सांस लेने में परेशानी, लगातार थकान, रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई, तेज धड़कन और कभी-कभी पैरों में सूजन जैसी समस्याएं हो रही थीं। जब उनकी तकलीफ बढ़ने लगी तो वह उपचार के लिए भारत लौटे और मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में डॉक्टरों से संपर्क किया।

गंभीर माइट्रल वाल्व बीमारी से जूझ रहे थे मरीज

अस्पताल में विस्तृत जांच के बाद मरीज के माइट्रल वाल्व की स्थिति काफी खराब पाई गई। माइट्रल वाल्व हृदय में रक्त के सही प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वाल्व में गंभीर खराबी के कारण हृदय के भीतर रक्त के प्रवाह पर असर पड़ रहा था और मरीज को लगातार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।मरीज का वजन करीब 100 किलो था। इसके अलावा उन्हें फेफड़ों में बढ़े हुए ब्लड प्रेशर और पहले स्ट्रोक का इतिहास भी था। इन परिस्थितियों ने सर्जरी को अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था। कार्डियक टीम ने मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और जांच रिपोर्ट का मूल्यांकन करने के बाद एंडोस्कोपिक माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट का विकल्प चुना।

बिना छाती की हड्डी काटे हुई सर्जरी

इस सर्जरी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पारंपरिक तरीके से छाती की हड्डी को खोलने के बजाय पसलियों के बीच छोटे चीरे लगाकर हृदय तक पहुंच बनाई गई। एंडोस्कोपिक तकनीक में छोटे उपकरणों और कैमरे की मदद से सर्जरी की जाती है।इस तरह की न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया में बड़े चीरे की आवश्यकता कम होती है। इससे सर्जिकल ट्रॉमा कम करने, ऑपरेशन के बाद होने वाली तकलीफ को घटाने और मरीज को अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य गतिविधियों की ओर लौटने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह तकनीक हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती और इसका निर्णय मरीज की स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।

डॉ. विजयंत देवेनराज और टीम ने की सर्जरी

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड, डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी डॉ. विजयंत देवेनराज और उनकी टीम ने यह सर्जरी सफलतापूर्वक की।डॉक्टरों के अनुसार, मरीज की जटिल मेडिकल हिस्ट्री को देखते हुए यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी में किसी बड़ी जटिलता की जानकारी नहीं मिली और उन्हें पांचवें दिन स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

दो सप्ताह में काम पर लौटने की तैयारी

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने धीरे-धीरे अपनी सामान्य दैनिक गतिविधियां शुरू कर दीं। अस्पताल के अनुसार, मरीज करीब दो सप्ताह में काम पर लौटने के लिए तैयार हो गए हैं। वह सऊदी अरब वापस जाने की उम्मीद कर रहे हैं।मरीज के लिए यह सर्जरी इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि हृदय की गंभीर बीमारी के कारण उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। उपचार के बाद सामान्य जीवन की ओर लौटना उनके लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

डॉक्टर ने बताया एंडोस्कोपिक सर्जरी का महत्व

डॉ. विजयंत देवेनराज ने कहा कि एंडोस्कोपिक माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें सटीकता, उन्नत सर्जिकल विशेषज्ञता और अनुभवी कार्डियक टीम की आवश्यकता होती है।उन्होंने बताया कि छाती की हड्डी को खोले बिना छोटे चीरों के माध्यम से हृदय तक पहुंच बनाने से सर्जिकल ट्रॉमा और ऑपरेशन के बाद होने वाली परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा मरीज को जल्दी चलने-फिरने और अपनी सामान्य गतिविधियों की ओर लौटने का अवसर मिल सकता है।डॉक्टर के मुताबिक, इस मामले में मरीज सर्जरी के लगभग दो सप्ताह के भीतर काम पर लौटने के लिए तैयार हो गए, जो न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के संभावित लाभों को दर्शाता है।

जटिल हृदय रोगों के उपचार में नई तकनीक

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के अनुसार, इस तरह की जटिल सर्जरी अस्पताल में आधुनिक कार्डियक उपचार और न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रियाओं की उपलब्धता को दर्शाती है। अस्पताल में विशेषज्ञ कार्डियक टीम और आधुनिक सर्जिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए जटिल हृदय रोगों वाले मरीजों के उपचार पर जोर दिया जा रहा है।माइट्रल वाल्व की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए उपचार का विकल्प उनकी स्थिति के आधार पर तय किया जाता है। कुछ मामलों में दवाओं से प्रबंधन किया जाता है, जबकि गंभीर स्थिति में वाल्व रिपेयर या रिप्लेसमेंट की आवश्यकता पड़ सकती है।लखनऊ में हुई इस सफल सर्जरी से यह भी सामने आया है कि आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव कार्डियक प्रक्रियाएं जटिल मामलों में उपचार के विकल्पों का विस्तार कर रही हैं। हालांकि, किसी भी सर्जरी की सफलता और उपयुक्तता मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति, जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करती है।

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