विदेशी चंदे पर सरकार का बड़ा प्रहार! FCRA नियम हुए सख्त, NGO की हर गतिविधि पर रहेगी पैनी नजर

Editorial
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विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा शिकंजा कस दिया है। गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA के तहत नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी है और विदेशी चंदे के उपयोग से जुड़े प्रावधानों को पहले से कहीं अधिक सख्त बना दिया है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करना है, जबकि विशेषज्ञ इसे एनजीओ क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना के अनुसार अब विदेशी चंदे के दुरुपयोग या नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि कुछ संस्थाओं द्वारा विदेशी फंड का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में नए नियमों के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि विदेशी धन का इस्तेमाल केवल उसी उद्देश्य के लिए हो, जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई है।

सबसे बड़ा बदलाव प्रशासनिक खर्चों को लेकर किया गया है। नए नियमों के तहत यदि कोई संस्था विदेशी अंशदान का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करती है, तो उस पर एक लाख रुपये या निर्धारित सीमा से अधिक खर्च की गई राशि के 5 प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा। दोनों में जो राशि अधिक होगी, वही वसूली जाएगी। सरकार का मानना है कि विदेशी चंदे का अधिकांश हिस्सा जमीनी स्तर पर सामाजिक कार्यों में लगना चाहिए, न कि प्रशासनिक ढांचे को चलाने में। इसके अलावा विदेशी धन का उपयोग सट्टेबाजी या किसी भी प्रकार की सट्टा गतिविधियों में करने पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में एक लाख रुपये या निवेश की गई राशि के 30 प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, इस गतिविधि से अर्जित पूरा लाभ भी सरकार द्वारा जब्त किया जाएगा। यह प्रावधान उन संस्थाओं के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है जो विदेशी धन का उपयोग अनुमोदित सामाजिक कार्यों से हटकर अन्य आर्थिक गतिविधियों में करती हैं।यदि कोई एनजीओ विदेशी अंशदान का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के बजाय किसी अन्य कार्य में करता है, तो उस पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में एक लाख रुपये या उपयोग की गई राशि के 30 प्रतिशत के बराबर दंड का प्रावधान किया गया है। अधिनियम के उल्लंघन में विदेशी अंशदान स्वीकार करने या उपयोग करने पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी। इसमें उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में धन खर्च करना भी शामिल है जहां संस्था को संचालन की अनुमति नहीं मिली है। सरकार ने केवल जुर्माने को ही नहीं बढ़ाया बल्कि विदेशी धन प्राप्त करने की पात्रता और प्रक्रिया को भी अधिक सख्त बना दिया है। अब किसी भी संस्था को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए अपने उद्देश्य और संचालन क्षेत्र को पहले से निर्धारित सूची में से चुनना होगा। यानी संस्था को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वह किस क्षेत्र में काम कर रही है और किस उद्देश्य के लिए विदेशी धन लेना चाहती है।

नए नियमों के तहत विदेशी नागरिकों की भूमिका को भी सीमित करने का प्रयास किया गया है। अब ऐसे संगठनों को सामान्य रूप से पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं मिलेगी जिनके प्रमुख पदों पर भारतीय मूल के अलावा विदेशी नागरिक मौजूद हैं। हालांकि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार ऐसे मामलों में छूट दे सकती है। सरकार ने “प्रमुख पदाधिकारी” की परिभाषा का भी विस्तार किया है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, फर्मों के भागीदार, ट्रस्ट के न्यासी और हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता भी शामिल होंगे। पंजीकरण प्रक्रिया को भी अधिक विस्तृत और पारदर्शी बनाया गया है। अब एनजीओ को आवेदन करते समय अपने सटीक उद्देश्य, गतिविधियों की प्रकृति और संचालन के राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों की जानकारी देनी होगी। धार्मिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों को विशेष रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि उनका उद्देश्य धर्मांतरण नहीं है। धार्मिक शिक्षा, परंपराओं के दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे कार्यों की अनुमति होगी, लेकिन धर्म परिवर्तन से जुड़े किसी भी उद्देश्य को स्वीकार नहीं किया जाएगा।सरकार ने सोशल मीडिया को भी निगरानी के दायरे में शामिल कर लिया है। अब विदेशी चंदा लेने वाले संगठनों को अपने सभी सोशल मीडिया खातों की जानकारी सरकार को देनी होगी। इससे संस्थाओं की गतिविधियों और प्रचार-प्रसार पर भी निगरानी रखी जा सकेगी।एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि 2026 से पहले पंजीकृत सभी संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर अपने विशिष्ट उद्देश्यों की जानकारी सरकार को देनी होगी। यदि कोई संस्था नए उद्देश्य या अतिरिक्त राज्य में काम करना चाहती है, तो उसे अलग से आवेदन करना होगा और प्रत्येक अतिरिक्त उद्देश्य या राज्य के लिए 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना होगा।निष्क्रिय या केवल कागजों पर चल रहे एनजीओ पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है। अब किसी संस्था को अपना पंजीकरण बनाए रखने के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये का विदेशी अंशदान अपने घोषित सामाजिक कार्यों पर खर्च करना होगा। यदि संस्था यह न्यूनतम सीमा पूरी नहीं कर पाती है, तो उसके पंजीकरण के नवीनीकरण में परेशानी आ सकती है या उसका लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। सरकार ने फंड के उपयोग पर निगरानी बढ़ाने के लिए किस्तों से जुड़ा नया नियम भी लागू किया है। अब यदि कोई संस्था पूर्व अनुमति के तहत विदेशी धन प्राप्त करती है, तो उसे अगली किस्त तभी मिलेगी जब पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग हो चुका होगा। इसके सत्यापन के लिए सरकार फील्ड जांच भी कर सकती है।कुल मिलाकर FCRA नियमों में किए गए ये बदलाव स्पष्ट संकेत देते हैं कि सरकार विदेशी चंदे के उपयोग को लेकर अब कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। नए नियमों के लागू होने के बाद एनजीओ क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन साथ ही संस्थाओं के लिए अनुपालन संबंधी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में इन नियमों का असर देशभर में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले हजारों संगठनों पर दिखाई देगा।

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