
बारिश की पहली फुहार जहां गर्मी से राहत लेकर आती है, वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आती है। यही वजह है कि हमारे घरों में दादी-नानी मानसून शुरू होते ही खानपान को लेकर कई तरह की हिदायतें देना शुरू कर देती हैं। इनमें सबसे आम सलाह होती है—“बारिश में पत्तेदार हरी सब्जियां कम खाओ।” बचपन से सुनते आए इस वाक्य को कई लोग महज पुरानी सोच या अंधविश्वास मान लेते हैं, लेकिन क्या वास्तव में इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी छिपा है? क्या सचमुच मानसून के मौसम में पालक, मेथी, बथुआ, सरसों और अन्य हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि इस सलाह के पीछे मजबूत वैज्ञानिक आधार मौजूद है और थोड़ी सी सावधानी बरतकर इन पौष्टिक सब्जियों का सुरक्षित तरीके से सेवन किया जा सकता है।पत्तेदार हरी सब्जियां सामान्य दिनों में पोषण का खजाना मानी जाती हैं। इनमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर, फोलिक एसिड, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के और कई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत बनाने, आंखों की रोशनी बनाए रखने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। लेकिन मानसून के दौरान वातावरण में बढ़ी हुई नमी और गंदगी इन सब्जियों को संक्रमण का माध्यम बना सकती है।

बारिश के मौसम में मिट्टी लगातार गीली रहती है। इसी कारण खेतों में बैक्टीरिया, फंगस, वायरस और सूक्ष्म परजीवी तेजी से पनपते हैं। पत्तेदार सब्जियों की बनावट ऐसी होती है कि उनकी पत्तियों के बीच पानी, मिट्टी और सूक्ष्म जीव आसानी से चिपक जाते हैं। कई बार इनमें छोटे-छोटे कीड़े और उनके अंडे भी छिपे रहते हैं, जिन्हें सामान्य पानी से धोने पर पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। यदि ऐसी सब्जियों को बिना अच्छी तरह साफ किए या अधपका खा लिया जाए, तो पेट का संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून में सबसे अधिक देखने वाली समस्याओं में दस्त, उल्टी, पेट दर्द, गैस, अपच और आंतों का संक्रमण शामिल हैं। इन बीमारियों की एक बड़ी वजह दूषित भोजन और ठीक से साफ न की गई सब्जियां भी हो सकती हैं। खासकर यदि पत्तेदार सब्जियों का सेवन कच्चे सलाद या हल्का पकाकर किया जाए, तो संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।

एक और महत्वपूर्ण कारण है कीटनाशकों और रसायनों का प्रभाव। खेती के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक बारिश के कारण पत्तियों पर अधिक मात्रा में जमा रह सकते हैं। नमी के कारण इन रसायनों के अवशेष लंबे समय तक पत्तियों पर बने रहते हैं। यदि इन्हें बिना अच्छी तरह धोए खाया जाए तो यह शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को मानसून में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। ऐसे लोगों को बाहर मिलने वाले कच्चे सलाद, बिना धुली हरी सब्जियों और लंबे समय तक रखे गए भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।

हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि मानसून में हरी सब्जियां पूरी तरह खाना बंद कर देना चाहिए। विशेषज्ञ स्पष्ट कहते हैं कि यदि इन्हें सही तरीके से साफ करके और अच्छी तरह पकाकर खाया जाए तो इनके पोषक तत्वों का पूरा लाभ लिया जा सकता है। सबसे पहले पत्तेदार सब्जियों को बहते हुए साफ पानी में कई बार धोना चाहिए ताकि मिट्टी और गंदगी निकल जाए। इसके बाद इन्हें लगभग 15 से 20 मिनट तक नमक मिले पानी या हल्के बेकिंग सोडा वाले पानी में भिगोकर रखना उपयोगी माना जाता है। इससे कई प्रकार के सूक्ष्म जीव और कीटनाशकों के अवशेष कम हो सकते हैं। इसके बाद इन्हें एक बार फिर साफ पानी से धोकर अच्छी तरह पकाना चाहिए।मानसून के दौरान कच्ची पत्तेदार सब्जियों से बने सलाद का सेवन कम करना बेहतर माना जाता है। यदि सलाद खाना ही हो तो अच्छी तरह धोई और छिली हुई सब्जियों का ही उपयोग करें। बाहर होटल, ठेले या रेस्तरां में मिलने वाले कच्चे सलाद से इस मौसम में बचना अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वहां सफाई के स्तर की पूरी जानकारी नहीं होती।सब्जियां खरीदते समय भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं। हमेशा ताजी, हरी और बिना सड़ी-गली पत्तियों वाली सब्जियां ही खरीदें। जिन पत्तियों पर अत्यधिक मिट्टी लगी हो, कीड़े दिखाई दें या वे मुरझाई हुई हों, उन्हें खरीदने से बचें। लंबे समय तक फ्रिज में रखी गई पत्तेदार सब्जियों का उपयोग भी मानसून में कम करना चाहिए क्योंकि नमी के कारण उनमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।बारिश के मौसम में खानपान का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। हरी सब्जियों के साथ लौकी, तोरई, परवल, टिंडा, कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों को भी भोजन में शामिल किया जा सकता है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में गर्म और ताजा भोजन करने, उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीने तथा बाहर का खुला भोजन कम खाने से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कई लोग यह मानते हैं कि दादी-नानी की सलाह केवल अनुभव पर आधारित होती है, लेकिन आधुनिक विज्ञान ने भी इनमें से कई बातों को सही साबित किया है। मानसून में पत्तेदार सब्जियों को लेकर दी जाने वाली सलाह भी उन्हीं में से एक है। यह सलाह पोषण से दूर रहने के लिए नहीं, बल्कि संक्रमण से बचने के लिए दी जाती रही है। आज भी डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ यही कहते हैं कि सावधानी बरतकर इन सब्जियों का सेवन किया जा सकता है।यदि किसी व्यक्ति को पहले से पेट संबंधी बीमारी, कमजोर पाचन, बार-बार संक्रमण या कम इम्यूनिटी की समस्या है, तो उसे मानसून में अपने भोजन को लेकर और अधिक सतर्क रहना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के भोजन में विशेष स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि दादी-नानी की यह सलाह केवल पारंपरिक अनुभव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का एक व्यावहारिक नियम है। मानसून में पत्तेदार हरी सब्जियां छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें साफ करने, सुरक्षित तरीके से पकाने और ताजा अवस्था में खाने की आदत अपनानी चाहिए। थोड़ी सी सावधानी आपको फूड पॉइजनिंग, पेट के संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचा सकती है। याद रखें, बारिश के मौसम में स्वाद से ज्यादा जरूरी है स्वच्छता। यदि भोजन साफ, ताजा और अच्छी तरह पका हुआ होगा, तो आप हरी सब्जियों के पोषण का पूरा लाभ भी ले पाएंगे और संक्रमण के खतरे से भी सुरक्षित रहेंगे। यही कारण है कि वर्षों पहले दी गई दादी-नानी की यह सलाह आज भी उतनी ही प्रासंगिक और वैज्ञानिक मानी जाती है।
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