कानपुर के मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल में डॉक्टर और मरीज से जुड़े कथित बदसलूकी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। अब इस पूरे मामले पर हॉस्पिटल के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HOD) का बयान सामने आया है।
- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में नाराजगी देखने को मिली थी। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने और सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
- इस घटना के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ व्यवहार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए स्टाफ को उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देना जरूरी है, ताकि ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित डॉक्टर के खिलाफ तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए हैं। वहीं जिस मरीज के साथ घटना हुई थी, वह अभी भी अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज जारी है।
हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली डॉक्टर अस्पताल में नई नियुक्त हुई थीं। उनके अनुसार, घटना वाले दिन डॉक्टर का अस्पताल में पहला ही दिन था।
HOD ने बताया कि नए माहौल और कार्यप्रणाली को लेकर अनुभव की कमी भी इस स्थिति की एक वजह हो सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मरीजों के साथ किसी भी प्रकार की अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन ने तत्काल लिया एक्शन
अस्पताल प्रशासन ने मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को इमरजेंसी ड्यूटी से हटा दिया है। अब उन्हें जनरल वार्ड में तैनात किया गया है।
HOD ने कहा कि इमरजेंसी विभाग संवेदनशील होता है और यहां अनुभवी व प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है। इसलिए मरीजों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
जिस मरीज के साथ कथित बदसलूकी की घटना हुई थी, वह अभी भी अस्पताल में भर्ती है। HOD के अनुसार, मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उसे सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में नाराजगी देखने को मिली थी। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने और सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार उनकी प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए स्टाफ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
इस घटना के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ व्यवहार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए स्टाफ को उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देना जरूरी है, ताकि ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मरीजों की सुविधा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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