लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में इलाज को लेकर एक मरीज की बेटी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। बेटी का दावा है कि उसकी मां के घुटने के ऑपरेशन में पिछले तीन दिनों से लगातार देरी हो रही है। आरोप है कि डॉक्टर सुबह मरीज को दिनभर खाली पेट रहने के लिए कहते हैं और शाम को ऑपरेशन नहीं हो पाने की बात कह देते हैं। हर बार इमरजेंसी केस आने का हवाला दिया जाता है। बेटी ने यह भी आरोप लगाया है कि इलाज में देरी की वजह उनकी मां का आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराना है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
- घुटने के ऑपरेशन के इंतजार में मरीज, तीन दिन से परेशानी का दावा
- बेटी का आरोप—आयुष्मान कार्ड के कारण हो रही देरी
- आयुष्मान भारत योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल
- इमरजेंसी मरीजों के कारण ऑपरेशन टलने का दावा
- मरीज को खाली पेट रखने को लेकर भी चिंता
- KGMU प्रशासन से मामले में स्पष्टीकरण की अपेक्षा
- अब मरीज के परिजनों को राहत मिलने का इंतजार

घुटने के ऑपरेशन के इंतजार में मरीज, तीन दिन से परेशानी का दावा
मामले के अनुसार, एक युवती अपनी मां को पैर में परेशानी होने के कारण KGMU के डॉक्टर के पास लेकर पहुंची थी। जांच के बाद डॉक्टर ने घुटने का ऑपरेशन कराने की जरूरत बताई। बेटी के मुताबिक, उसने ऑपरेशन के लिए सहमति दे दी थी और इलाज शुरू होने की उम्मीद थी।आरोप है कि इसके बाद से ऑपरेशन की तारीख लगातार आगे बढ़ रही है। बेटी का कहना है कि पिछले तीन दिनों से मरीज को सुबह यह बताया जाता है कि दिनभर खाली पेट रहना होगा और शाम को ऑपरेशन किया जाएगा। लेकिन शाम होने पर ऑपरेशन नहीं हो पाने की जानकारी दे दी जाती है।हर बार इमरजेंसी केस आने की बात कही जाती है। इस वजह से उसकी मां को बार-बार ऑपरेशन के इंतजार में रहना पड़ रहा है। लगातार खाली पेट रहने और इलाज की अनिश्चितता के कारण मरीज की परेशानी बढ़ने का दावा किया गया है।
बेटी का आरोप—आयुष्मान कार्ड के कारण हो रही देरी
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप बेटी ने आयुष्मान कार्ड को लेकर लगाया है। उसका दावा है कि उसकी मां का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत कराया जा रहा है और इसी वजह से ऑपरेशन में देरी हो रही है।बेटी का कहना है कि जब सरकार पात्र लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए योजना चला रही है, तो लाभार्थियों को उपचार के लिए परेशान क्यों होना पड़े? उसने सवाल उठाया कि क्या सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत इलाज कराना मरीज की गलती है? फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ऑपरेशन में देरी का वास्तविक कारण क्या है। केवल मरीज की बेटी के आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि आयुष्मान कार्ड के कारण ही ऑपरेशन टाला जा रहा है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और मामले की जांच महत्वपूर्ण होगी।
आयुष्मान भारत योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित शर्तों के तहत इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना से जरूरतमंद परिवारों को इलाज के खर्च का बोझ कम करने में मदद मिलती है।लेकिन यदि किसी लाभार्थी को इलाज के दौरान बार-बार देरी या असुविधा का सामना करना पड़ता है, तो उसकी चिंता स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मरीज को समय पर चिकित्सकीय जानकारी मिले और उपचार की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।लखनऊ के KGMU से जुड़े इस मामले में भी बेटी की शिकायत के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऑपरेशन किन परिस्थितियों में टला, क्या मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के कारण तारीख बदली गई या कोई अन्य वजह रही। इससे आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
इमरजेंसी मरीजों के कारण ऑपरेशन टलने का दावा
बेटी के अनुसार, डॉक्टर हर शाम ऑपरेशन नहीं हो पाने के पीछे इमरजेंसी केस आने का हवाला देते हैं। अस्पतालों में आपातकालीन मरीजों को प्राथमिकता देना चिकित्सा व्यवस्था का आवश्यक हिस्सा है। कई बार गंभीर मरीजों की स्थिति के कारण पहले से तय प्रक्रियाओं के समय में बदलाव करना पड़ सकता है।यदि किसी मरीज का ऑपरेशन लगातार टल रहा है, तो परिजनों को इसकी स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी है। मरीज को कब तक इंतजार करना पड़ सकता है, ऑपरेशन की संभावित तारीख क्या है और देरी के पीछे क्या कारण हैं—इन सवालों का जवाब मिलने से मरीज और परिवार की चिंता कम हो सकती है।इस मामले में बेटी की शिकायत है कि लगातार तीन दिनों से ऑपरेशन टलने के कारण उसकी मां को परेशानी हो रही है। अब अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
मरीज को खाली पेट रखने को लेकर भी चिंता
ऑपरेशन से पहले मरीज को खाली पेट रखने की सलाह कई चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में दी जाती है। इसका समय ऑपरेशन, एनेस्थीसिया और मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। लेकिन जब ऑपरेशन का समय बार-बार बदलता है, तो मरीज के खानपान और स्वास्थ्य को लेकर भी चिकित्सकीय निर्देश स्पष्ट होना जरूरी है।इस मामले में बेटी का दावा है कि उसकी मां को सुबह से खाली पेट रहने के लिए कहा जाता है और शाम को ऑपरेशन नहीं हो पाता। यदि ऑपरेशन टलता है, तो मरीज को आगे क्या करना चाहिए और दोबारा कब से खाना-पीना बंद रखना है, इसकी जानकारी संबंधित चिकित्सकीय टीम से मिलनी चाहिए।मरीज के परिजनों को बिना डॉक्टर की सलाह के उपवास जारी रखने या खानपान में बदलाव करने के बजाय उपचार कर रही टीम से स्पष्ट निर्देश लेने चाहिए।
KGMU प्रशासन से मामले में स्पष्टीकरण की अपेक्षा
KGMU उत्तर प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी मरीज के उपचार में देरी की शिकायत सामने आने पर मामले की निष्पक्ष जांच और उचित संवाद जरूरी है।इस प्रकरण में मरीज की बेटी ने सरकार से अपील की है कि उसकी मां की परेशानी को गंभीरता से लिया जाए और ऑपरेशन जल्द कराने की व्यवस्था की जाए। हालांकि, ऑपरेशन कब होगा और देरी के पीछे वास्तविक वजह क्या है, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक बयान शामिल नहीं है।यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो मरीज को अनावश्यक परेशानी से राहत दिलाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही, यदि ऑपरेशन चिकित्सकीय कारणों या आपातकालीन परिस्थितियों के कारण टला है, तो परिवार को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
अब मरीज के परिजनों को राहत मिलने का इंतजार
KGMU में घुटने के ऑपरेशन में देरी को लेकर सामने आए इस मामले ने आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी मरीज की बेटी के आरोपों पर आधारित है। आयुष्मान कार्ड के कारण ऑपरेशन टाले जाने की बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।मुख्य सवाल यही है कि मरीज का ऑपरेशन किन कारणों से लगातार टल रहा है और उसे कब तक उपचार मिल सकेगा। अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने और चिकित्सकीय स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
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