मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा, अधिकारी बनकर मांगे पैसे

Editorial
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 संवाददाता: मो. अरशद

मुरादाबाद सरकारी विभाग का नाम और अधिकारियों की पहचान का कथित दुरुपयोग कर आम लोगों से धन वसूलने की कोशिश का मामला सामने आया है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) के नाम पर फर्जी अधिकारी बनकर मकान मालिक से अवैध धनराशि मांगने का गंभीर आरोप लगाया गया है। मामला अमरोहा जनपद के धनौरा क्षेत्र का है, जहां कुछ लोग बोलेरो गाड़ी से एक मकान पर पहुंचे और खुद को प्राधिकरण का अधिकारी बताते हुए निर्माण कार्य के संबंध में पूछताछ करने लगे। आरोप है कि इसी दौरान मकान मालिक से पैसे की मांग की गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने आम जनता को सतर्क रहने और किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान सत्यापित किए भुगतान नहीं करने की अपील की है।एमडीए की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह घटना 26 अक्टूबर की शाम की है। आरोपों के मुताबिक, शाहिद हुसैन नाम का व्यक्ति अपने दो अज्ञात साथियों के साथ बोलेरो गाड़ी से सुल्तान नगर, धनौरा निवासी चन्द्रभान सिंह के मकान पर पहुंचा था। इन लोगों ने कथित तौर पर खुद को प्राधिकरण का अवर अभियंता और अधिकारी बताया। इसके बाद मकान में चल रहे निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी लेने लगे।

बोलेरो से पहुंचे तीन लोग, अधिकारी बनकर की पूछताछ

प्राधिकरण की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 26 अक्टूबर की शाम शाहिद हुसैन अपने दो साथियों के साथ चन्द्रभान सिंह के मकान पर पहुंचा। आरोप है कि तीनों ने खुद को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से जुड़ा अधिकारी बताते हुए मकान के निर्माण कार्य को लेकर पूछताछ की।सरकारी विभाग के अधिकारी होने का दावा किए जाने के कारण मकान मालिक ने उनकी बात सुनी। इसी दौरान आरोप है कि निर्माण कार्य की आड़ में उनसे अवैध धनराशि की मांग की गई। इस घटनाक्रम ने सरकारी विभागों के नाम पर लोगों को गुमराह करने और कथित तौर पर वसूली करने की आशंका को सामने ला दिया है।इस मामले में आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्राधिकरण की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में घटना का विवरण देते हुए लोगों को इस तरह की गतिविधियों से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा

प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क करने पर पहचान पर हुआ संदेह

बताया गया है कि मकान मालिक चन्द्रभान सिंह को संबंधित लोगों की विभागीय पहचान को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के कार्यालय से संपर्क कर इन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया।प्राधिकरण से पहचान की पुष्टि कराने के दौरान कथित अधिकारियों की विभागीय पहचान पर सवाल खड़े हुए। आरोप है कि फर्जी पहचान पत्रों के माध्यम से प्राधिकरण के नाम और पद का दुरुपयोग कर लोगों को गुमराह किया जा रहा था।इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर किसी के घर पहुंच जाए तो आम नागरिक उसकी वास्तविक पहचान कैसे सुनिश्चित करे। खासकर निर्माण कार्य कराने वाले मकान मालिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि विभागीय जांच या कार्रवाई के नाम पर आने वाले व्यक्ति की पहचान और अधिकारों की पुष्टि कैसे की जाए।

गजरौला थाने में दी गई तहरीर

पीड़ित चन्द्रभान सिंह ने पूरे मामले को लेकर थाना गजरौला, जनपद अमरोहा में तहरीर दी है। शिकायत में संबंधित लोगों पर खुद को प्राधिकरण का अधिकारी बताकर निर्माण कार्य के संबंध में पूछताछ करने और अवैध धनराशि मांगने का आरोप लगाया गया है।अब इस मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। शिकायत के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की भूमिका, उनकी पहचान और कथित रूप से इस्तेमाल किए गए पहचान पत्रों की सत्यता की पड़ताल की जा सकती है। बोलेरो गाड़ी और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच भी मामले को स्पष्ट करने में अहम हो सकती है।पीड़ित ने पुलिस को तहरीर दी है। आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई पुलिस जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

एमडीए ने जनता को किया सतर्क, बिना पुष्टि न दें पैसे

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने इस मामले के सामने आने के बाद आम जनता के लिए सतर्कता संबंधी अपील जारी की है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को एमडीए का अधिकारी या कर्मचारी बताकर धनराशि की मांग करता है, तो बिना पुष्टि किए उसे कोई भुगतान न करें।प्राधिकरण ने लोगों से कहा है कि संबंधित व्यक्ति की पहचान विभागीय कार्यालय से सत्यापित जरूर कराएं। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से विभाग का नाम लेकर पैसे मांगता है या किसी तरह का दबाव बनाता है, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस और प्राधिकरण को दें।यह अपील इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी विभागों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराने या भ्रमित करने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति के पद, पहचान पत्र या मौखिक दावे को बिना जांच के सही मान लेना नुकसानदायक हो सकता है।

मकान मालिक और आम नागरिक कैसे रहें सावधान?

इस तरह के मामलों में आम नागरिकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खुद को विकास प्राधिकरण या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर घर या निर्माण स्थल पर पहुंचता है, तो उससे विभागीय पहचान पत्र और संबंधित कार्यवाही से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज देखने के लिए कहें।

  • संबंधित व्यक्ति का नाम और पद विभागीय कार्यालय से सत्यापित करें।
  • केवल मौखिक दावे या पहचान पत्र दिखाने के आधार पर धनराशि का भुगतान न करें।
  • किसी भी प्रकार की संदिग्ध मांग या दबाव की सूचना पुलिस को दें।
  • सरकारी विभाग की ओर से जारी आधिकारिक सूचना और प्रक्रिया की पुष्टि जरूर करें।

सरकारी विभागों के नाम पर फर्जीवाड़े पर उठे सवाल

धनौरा में सामने आया यह मामला सरकारी विभागों की पहचान के कथित दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ाता है। यदि कोई व्यक्ति अधिकारी बनकर आम लोगों से पैसे मांगता है, तो इससे न केवल लोगों की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, बल्कि सरकारी संस्थाओं की छवि पर भी असर पड़ता है।अब इस मामले में सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई पर रहेगी। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित लोग कौन थे, उनकी विभागीय पहचान किस आधार पर संदिग्ध पाई गई और क्या इस तरह की गतिविधियों में अन्य लोग भी शामिल हैं।मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने अपनी ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पीड़ित की ओर से गजरौला थाने में दी गई तहरीर के बाद पुलिस जांच से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

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