राजा रघुवंशी केस: सोनम को राहत, जमानत पर रोक से SC का इनकार

Editorial
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देशभर में चर्चा का विषय बने राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल राहत देते हुए उनकी जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि वह हाईकोर्ट के फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। अदालत ने पहली नजर में जमानत आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर दिया।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि सोनम रघुवंशी पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं, इसलिए इस स्तर पर उनकी जमानत पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर विस्तृत सुनवाई अभी बाकी है।


मेघालय सरकार ने बताया- ‘बेहद चौंकाने वाला’ है हाईकोर्ट का फैसला

सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि पूरी तरह सुनियोजित हत्या का मामला है।उन्होंने अदालत को बताया कि राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे थे, जहां उनकी हत्या कर शव को गहरी खाई में फेंक दिया गया। जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश में सोनम सहित अन्य आरोपी शामिल थे। वारदात के बाद सोनम फरार हो गई थीं और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गईं।सरकार ने यह भी बताया कि मामले में 94 गवाह हैं और पुलिस 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर चुकी है। ऐसे गंभीर मुकदमे में केवल तकनीकी आधार पर जमानत देना न्यायहित में नहीं माना जा सकता।

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क्या सिर्फ टाइपिंग की गलती बन गई जमानत की वजह?

सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार ने दावा किया कि हाईकोर्ट ने जिस आधार पर सोनम को जमानत दी, वह बेहद तकनीकी और कमजोर था।सरकार के मुताबिक गिरफ्तारी दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी। जबकि भारतीय न्याय संहिता में धारा 403 का कोई अस्तित्व ही नहीं है। यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी।सरकार ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय मजिस्ट्रेट ने आरोपी को स्पष्ट रूप से हत्या के आरोप और गिरफ्तारी के कारण बताए थे। ऐसे में केवल दस्तावेज में हुई टाइपिंग की गलती को जमानत का आधार बनाना उचित नहीं कहा जा सकता।


सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से पूछे तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश ने हाईकोर्ट के आदेश पर कई अहम सवाल उठाए।उन्होंने पूछा कि जब पहले दायर की गई जमानत याचिकाओं में गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने का मुद्दा कभी नहीं उठाया गया, तो बाद में अचानक यही सबसे बड़ा आधार कैसे बन गया?कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जब पहले मेरिट के आधार पर जमानत खारिज की जा चुकी थी, तो बाद में केवल गलत धारा लिखे जाने के आधार पर राहत कैसे दे दी गई।हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल कोई अंतरिम रोक लगाने की जरूरत नहीं है क्योंकि आरोपी पहले ही रिहा हो चुकी हैं।


बचाव पक्ष ने क्या कहा?

सोनम रघुवंशी की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि गिरफ्तारी के समय कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था।बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सोनम पर पहले से ही कड़ी शर्तें लागू हैं और उन्हें शिलांग छोड़ने की अनुमति नहीं है। ऐसे में उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है।वकील ने अदालत को बताया कि मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है और इस स्थिति में लगातार जेल में रखना उचित नहीं होगा।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि हाईकोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत दी है, तो राज्य सरकार के पास उसके खिलाफ कानूनी विकल्प खुले हुए हैं।फिलहाल अदालत ने जमानत पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई में हाईकोर्ट के फैसले की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।


क्या है पूरा राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस?

राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी 12 मई 2025 को हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद, 23 मई को दोनों हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे।इसके बाद दोनों अचानक लापता हो गए। कुछ दिनों बाद उनकी किराये की स्कूटी लावारिस हालत में मिली और 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ।पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में 8 जून को सोनम उत्तर प्रदेश में मिलीं। जांच के दौरान मेघालय पुलिस ने दावा किया कि पति की हत्या पहले से रची गई साजिश का हिस्सा थी। पुलिस के मुताबिक इस साजिश में सोनम, उनके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य आरोपी शामिल थे।जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या की पूरी योजना पहले से बनाई गई थी और इसके समर्थन में पुलिस ने 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है।


अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है, लेकिन उनकी कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हाईकोर्ट के जमानत आदेश की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट अब विस्तार से सुनवाई करेगा।अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि हाईकोर्ट का जमानत आदेश बरकरार रहेगा या फिर सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर नया फैसला सुनाएगा। यह मामला केवल एक चर्चित हत्या की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या किसी गंभीर आपराधिक मामले में महज तकनीकी त्रुटि जमानत का आधार बन सकती है या नहीं।

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