CBSE में अजीबोगरीब तर्क: ‘वेबसाइट हैक नहीं हो सकती क्योंकि एग्जाम ऑफलाइन हैं’, रीजनल हेड के बयान पर मचा बवाल

Editorial
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सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) पोर्टल हैकिंग विवाद में अब एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस पूरे मामले में चंडीगढ़ के सीबीएसई रीजनल हेड राजेश कुमार गुप्ता का एक ऐसा अजीबोगरीब बयान सामने आया है, जिसने तकनीकी दुनिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में एक नई बहस छेड़ दी है। दरअसल, एक 19 साल के छात्र निसर्ग अधिकारी ने कोडिंग और स्क्रीनशॉट्स के पुख्ता सबूतों के साथ दावा किया था कि उसने बोर्ड के मुख्य मार्किंग पोर्टल को हैक कर लिया था, जिससे परीक्षार्थियों की कॉपियां जांचने से लेकर उनके नंबर तक बदलने का एक्सेस मिल रहा था। इस बेहद गंभीर सुरक्षा चूक पर जब रीजनल हेड से सवाल किया गया, तो उन्होंने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए एक ऐसा तर्क दे डाला जिसे सुनकर हर कोई दंग है। उन्होंने न्यूज़ एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि चूंकि सीबीएसई की परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में पेन-पेपर के जरिए आयोजित की जाती हैं, इसलिए वेबसाइट हैक होने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता।

रीजनल हेड के इस तर्कहीन और बेतुके बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ उनकी तकनीकी समझ का मज़ाक उड़ने लगा है। लोग उनके इस बयान को पूरी तरह ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और ‘हास्यास्पद’ बता रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स का कहना है कि परीक्षा ऑफलाइन होने का वेबसाइट की सुरक्षा से क्या लेना-देना? यह तो बिल्कुल वैसा ही बेमेल तर्क है जैसे कोई कहे कि बैंक के ऑनलाइन सर्वर कभी हैक नहीं हो सकते क्योंकि बैंकों की इमारतें और शाखाएं जमीन पर ऑफलाइन मौजूद होती हैं। इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है और आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने ऑफिशियल एक्स (ट्विटर) हैंडल से सीबीएसई अधिकारी को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि सिस्टम में कितने गैर-जिम्मेदार लोग बैठे हैं, जिन्हें यह भी नहीं पता कि कॉपियां भले ही पेन-पेपर पर लिखी गई हों, लेकिन उनकी डिजिटल चेकिंग और नंबरों का डेटा तो इसी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड होना था।यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब छात्र निसर्ग ने वेबसाइट की इस भयानक कमी की विस्तृत रिपोर्ट भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी (CERT-In) को सौंपने के बाद इसे सार्वजनिक किया था। हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच सीबीएसई बोर्ड ने एक सफाई जारी करते हुए दावा किया है कि जिस पोर्टल को हैक करने की बात कही जा रही है, वह मुख्य डेटाबेस नहीं बल्कि केवल एक डमी और टेस्टिंग वेबसाइट थी, इसलिए छात्रों का असली डेटा और मार्क्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन बोर्ड की इस सफाई के बावजूद रीजनल हेड के इस ‘अनोखे’ बयान ने बोर्ड की किरकिरी करा दी है। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सीबीएसई ने इतनी बड़ी ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ व्यवस्था को लागू करने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि उन्होंने अपने खुद के आला अधिकारियों को भी यह नहीं समझाया कि यह आधुनिक डिजिटल सिस्टम असल में काम कैसे करता है।

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