जिद बनी जानलेवा! 7 साल के बेटे ने दिव्यांग पिता पर गड़ासे से किया हमला

Editorial
8 Min Read

गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से सामने आई एक घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि टूटते पारिवारिक रिश्तों, बदलते सामाजिक माहौल और बच्चों के मानसिक व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है। महज सात साल के मासूम बच्चे ने अपने दिव्यांग पिता पर गड़ासे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वजह इतनी सी थी कि पिता ने उसे चाचा-चाची के साथ जम्मू जाने की अनुमति नहीं दी। गुस्से और जिद में बच्चे ने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।यह दर्दनाक घटना देहात कोतवाली क्षेत्र के बेसियाचैन गांव की है। रविवार दोपहर गांव के खेत में आम के पेड़ की छांव तले दिव्यांग पिता आराम कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि कुछ ही पलों में उनका अपना बेटा हाथ में गड़ासा लेकर उनके सामने खड़ा होगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चा घर से गड़ासा लेकर खेत तक पहुंचा और बिना कुछ कहे पिता पर लगातार कई वार कर दिए। अचानक हुए इस हमले से पिता गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े और उनकी चीखें पूरे खेत में गूंज उठीं।शोर सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे। लोगों ने किसी तरह बच्चे के हाथ से गड़ासा छीना और घायल पिता को खून से लथपथ हालत में मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते अस्पताल पहुंचने से उनकी जान बच गई, लेकिन उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

एक जिद ने उजाड़ दी पिता की दुनिया

परिजनों ने जो कहानी बताई, वह इस घटना को और भी दर्दनाक बना देती है। बताया गया कि घायल व्यक्ति का छोटा भाई और उसकी पत्नी जम्मू में मजदूरी करते हैं। कुछ दिनों से सात साल का बच्चा भी उनके साथ जम्मू जाने की जिद कर रहा था। पिता ने बेटे को समझाया कि अभी उसकी उम्र बहुत छोटी है और उसे कहीं बाहर भेजना ठीक नहीं होगा। लेकिन बच्चा इस बात को स्वीकार नहीं कर सका।बताया जाता है कि रविवार को भी जब उसने जम्मू जाने की बात कही तो पिता ने उसे डांटते हुए साफ मना कर दिया। इसी बात से नाराज होकर बच्चा घर गया, वहां रखा गड़ासा उठाया और खेत में पहुंचकर पिता पर हमला कर दिया। इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सात साल का बच्चा इतनी हिंसक प्रतिक्रिया दे सकता है।

चार साल पहले बिछड़ गई मां, पिता ने निभाई मां और बाप दोनों की जिम्मेदारी

इस घटना का सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस पिता पर हमला हुआ, वही पिछले चार वर्षों से अपने दोनों बेटों के लिए मां और पिता दोनों की भूमिका निभा रहा था। परिजनों के अनुसार, चार साल पहले बच्चे की मां दोनों बेटों को छोड़कर कहीं चली गई थी। उस समय छोटा बेटा केवल तीन साल का था।इसके बाद पिता ने तमाम मुश्किलों के बावजूद बच्चों का पालन-पोषण किया। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी बच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार के लोग बताते हैं कि वह अपने बेटों से बेहद प्यार करते थे और उन्हें कभी खुद से दूर नहीं होने देते थे। लेकिन नियति का सबसे बड़ा व्यंग्य यही रहा कि जिस बेटे को उन्होंने अपनी गोद में पालकर बड़ा किया, उसी ने एक पल के गुस्से में उन पर जानलेवा हमला कर दिया।

पूरे गांव में पसरा सन्नाटा, हर कोई है हैरान

घटना के बाद पूरे गांव में मातम जैसा माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चा सामान्य स्वभाव का था और अक्सर गांव में अन्य बच्चों के साथ खेलता था। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि वह इतनी छोटी सी बात पर इतना बड़ा कदम उठा सकता है। लोग इस घटना को केवल अपराध नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों और बच्चों की मानसिक स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं।

पुलिस कर रही है जांच

देहात कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। चूंकि घटना में एक नाबालिग बच्चा शामिल है, इसलिए मामले को बाल न्याय कानूनों के प्रावधानों के अनुसार भी देखा जा रहा है।

मनोचिकित्सक की चेतावनी—बच्चों के व्यवहार को हल्के में न लें

गोंडा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नूपुर पाल का कहना है कि यह घटना अभिभावकों के लिए गंभीर चेतावनी है। उनके अनुसार, बच्चों के व्यवहार, भावनाओं और स्वभाव में आने वाले छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि बच्चा अत्यधिक जिद करने लगे, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा दिखाए, खुद को अलग-थलग रखने लगे या हिंसक व्यवहार करने लगे तो परिवार को तुरंत उससे संवाद बढ़ाना चाहिए।डॉ. पाल का कहना है कि बच्चे अपने घर के माहौल से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। परिवार में होने वाले झगड़े, तनाव, हिंसक भाषा या आक्रामक व्यवहार उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डालते हैं। इसके अलावा मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और हिंसक ऑनलाइन गेम्स का अनियंत्रित उपयोग भी बच्चों की सोच और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं, उनकी भावनाओं को समझें और सकारात्मक वातावरण दें।

समाज के लिए बड़ा सवाल

गोंडा की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न छोड़ गई है। आखिर सात साल का एक बच्चा इतनी हिंसक प्रतिक्रिया तक कैसे पहुंच गया? क्या परिवारों में संवाद की कमी, भावनात्मक अकेलापन, बदलती जीवनशैली और डिजिटल दुनिया का बढ़ता प्रभाव बच्चों के मन को अंदर ही अंदर बदल रहा है? विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते बच्चों की भावनाओं को समझा जाए, उनकी बात सुनी जाए और उन्हें सही मार्गदर्शन मिले, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।फिलहाल घायल पिता अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, जबकि पूरे गांव में इस दर्दनाक घटना की चर्चा है। एक छोटी सी जिद ने पिता-पुत्र के रिश्ते को खून से रंग दिया और समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आने वाली पीढ़ी की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा के लिए अब केवल परवरिश नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद और सतत निगरानी भी उतनी ही जरूरी हो गई है।

read on:https://news7hindi.com/there-was-a-stir-in-the-power-corridors-of-up-the-restlessness-of-the-honorable-increased/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment