रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद गोमाता की सेवा, सुरक्षा और सम्मान को लेकर चलाए जा रहे ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ ने सोमवार को फर्रुखाबाद में अभूतपूर्व जनसमर्थन हासिल किया। हजारों की संख्या में जुटे संत-महात्माओं, किसानों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने यह संदेश दिया कि गोसंरक्षण अब केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनभावना और सांस्कृतिक चेतना का बड़ा आंदोलन बन चुका है। अभियान के प्रेरणास्रोत पूज्य ईश्वर दास ब्रह्मचारी महाराज के मार्गदर्शन में लगभग 4.5 लाख नागरिकों के हस्ताक्षरों से युक्त विशाल ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा गया।यह आयोजन पूरे जिले में चर्चा का विषय बना रहा। सुबह से ही बड़ी संख्या में गोभक्त निर्धारित स्थल पर जुटने लगे। भगवा ध्वज, धार्मिक नारों और गोसंरक्षण के संदेशों से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण दिखाई दिया। कार्यक्रम की शुरुआत गोमाता के विधिवत पूजन, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। संतों ने गोसेवा को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए समाज से इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

पूजन के बाद निकाली गई विशाल पदयात्रा ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। हाथों में बैनर, तख्तियां और गोसंरक्षण से जुड़े संदेश लिए हजारों लोग अनुशासित तरीके से आगे बढ़ते रहे। यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की आकर्षक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालु पूरे मार्ग में गोमाता की महिमा और भारतीय संस्कृति से जुड़े संदेशों का प्रसार करते रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और अभियान के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया।अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि पूज्य ईश्वर दास ब्रह्मचारी महाराज के नेतृत्व में पिछले कई महीनों से देशभर में गोसंरक्षण और गोसेवा को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से देशवासियों की भावनाओं को सरकार तक पहुंचाना और गोवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां बनवाना है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव, शहर-शहर और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंचकर लोगों को गोसेवा के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब लगभग 4.5 लाख नागरिकों के हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि इस ज्ञापन को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक प्राथमिकता के साथ पहुंचाया जाए, ताकि जनभावनाओं के अनुरूप आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इनमें पूरे देश में गोहत्या पर प्रभावी केंद्रीय कानून लागू करने, गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान देने, गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, केंद्रीय स्तर पर गो मंत्रालय की स्थापना, राष्ट्रीय गो-चारा नीति लागू करने तथा कृषि, पर्यावरण, चिकित्सा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गोवंश की भूमिका को मजबूत करने के लिए ठोस नीतियां बनाने की मांग प्रमुख रही।सभा को संबोधित करते हुए अभियान के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में गोमाता का विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण केवल धार्मिक भावना से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था से भी इसका सीधा संबंध है। उनका कहना था कि यदि गोवंश के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।वक्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में देशभर में बड़ी संख्या में नागरिक गोसंरक्षण के पक्ष में खुलकर सामने आ रहे हैं। उनका दावा था कि करोड़ों लोग इस जनअभियान के माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज करा चुके हैं और आने वाले समय में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस मुहिम में जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि गोसेवा केवल किसी एक समुदाय का विषय नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा दायित्व है।

कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और व्यवस्था भी उल्लेखनीय रही। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित किया। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और किसान बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी अभियान को अपना समर्थन दिया और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और करोड़ों नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप गोसंरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।कार्यक्रम के समापन पर संत-महात्माओं ने देश में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि की कामना करते हुए गोसेवा को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। पूरे आयोजन में धार्मिक उत्साह, अनुशासन और जनसहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिला।इस अवसर पर जिले के संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी, मातृशक्ति, किसान, व्यापारी, युवा, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गोभक्त उपस्थित रहे। अभियान के आयोजकों ने विश्वास जताया कि फर्रुखाबाद से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी तथा गोसंरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सार्थक पहल का मार्ग प्रशस्त करेगी।
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