ट्रंप ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा निलंबित किए

Digital Desk
5 Min Read

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने एक बार फिर सख्त इमिग्रेशन नीति अपनाते हुए 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग को निलंबित करने का फैसला किया है। यह फैसला 21 जनवरी से लागू होगा। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अमेरिका में स्थायी रूप से बसना चाहते हैं। हालांकि, यह रोक पर्यटक वीज़ा, स्टूडेंट वीज़ा या अन्य शॉर्ट-टर्म वीज़ा पर लागू नहीं होगी।

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के साथ मिलकर FIFA वर्ल्ड कप की मेजबानी करने जा रहा है। ऐसे में अमेरिका की इमिग्रेशन नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

किन देशों के नागरिक होंगे प्रभावित?

अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के अनुसार, यह निलंबन लैटिन अमेरिका और कैरेबियन, बाल्कन क्षेत्र, दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों पर लागू होगा। कुल मिलाकर 75 देश इस सूची में शामिल हैं।

भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लोगों के लिए यह खबर खास मायने रखती है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के लिए आवेदन करते हैं। हालांकि, प्रशासन ने अभी पूरी देशवार सूची सार्वजनिक नहीं की है।

आर्थिक बोझ और सुरक्षा का हवाला

अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि यह फैसला अमेरिका की इमिग्रेशन प्रणाली के “दुरुपयोग” को रोकने के लिए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि कुछ देशों से आने वाले प्रवासी अमेरिकी वेलफेयर स्कीम्स और सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ बन सकते हैं।

सरकार का यह भी दावा है कि कुछ देशों की वेटिंग और जांच प्रक्रिया पर्याप्त मजबूत नहीं है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

वीज़ा निलंबन कैसे काम करेगा?

आवेदन होंगे, लेकिन मंजूरी नहीं

स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, प्रभावित देशों के नागरिक इमिग्रेंट वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन निलंबन अवधि के दौरान किसी भी आवेदन को मंजूरी या जारी नहीं किया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ नहीं किया है कि यह रोक कब तक जारी रहेगी।

इस अनिश्चितता के चलते हजारों परिवारों और पेशेवरों की योजनाएं अधर में लटक सकती हैं।

ट्रंप प्रशासन के अन्य सख्त इमिग्रेशन कदम

 12 देशों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध

जून में ट्रंप प्रशासन ने 12 देशों के नागरिकों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लगा दिया था। इनमें अफगानिस्तान, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन जैसे देश शामिल हैं। बाद में इस सूची में फिलिस्तीन, सीरिया, माली और नाइजर जैसे देशों को भी जोड़ा गया।

शरणार्थियों की संख्या ऐतिहासिक रूप से कम

अक्टूबर में व्हाइट हाउस ने 2026 वित्तीय वर्ष के लिए केवल 7,500 शरणार्थियों को स्वीकार करने की सीमा तय की, जो अमेरिकी इतिहास में सबसे कम है। इसका बड़ा हिस्सा दक्षिण अफ्रीका के श्वेत अफ्रीकानर्स के लिए निर्धारित बताया गया।

स्किल्ड वर्कर्स और छात्रों पर असर

 H-1B वीज़ा फीस में भारी बढ़ोतरी

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी, जिससे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिकी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ा। सरकार का तर्क है कि इससे अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियां सुरक्षित रहेंगी।

रिकॉर्ड स्तर पर डिपोर्टेशन

2025 में नेट नेगेटिव इमिग्रेशन

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक 6 लाख से ज्यादा लोगों को डिपोर्ट किया गया, जबकि करीब 19 लाख लोगों ने खुद देश छोड़ दिया। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के अनुसार, 50 साल में पहली बार अमेरिका में नेट नेगेटिव इमिग्रेशन दर्ज किया गया।

उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए क्यों अहम है यह खबर?

उत्तर प्रदेश से हर साल हजारों लोग अमेरिका में स्थायी निवास, नौकरी या परिवार से जुड़ने के लिए आवेदन करते हैं। यह फैसला उन परिवारों के लिए चिंता बढ़ा सकता है, जो लंबे समय से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। खासकर आईटी, हेल्थकेयर और स्टूडेंट सेक्टर से जुड़े लोगों पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

Share This Article
Leave a Comment