IPL में अंपायरों की भी होती है करोड़ों जैसी कमाई! एक सीजन में 50 लाख तक की फीस, फाइनल का भुगतान जानकर रह जाएंगे हैरान

Editorial
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जब भी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की बात होती है तो चर्चा अक्सर खिलाड़ियों की करोड़ों की नीलामी, शानदार चौकों-छक्कों और रोमांचक मुकाबलों की होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मैदान पर हर फैसले को निष्पक्ष तरीके से अंजाम देने वाले अंपायरों को कितनी फीस मिलती है? आखिर एक आईपीएल मैच में अंपायरिंग करने का मेहनताना कितना होता है? अब इन सभी सवालों का जवाब खुद पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर अनिल चौधरी ने दिया है। उन्होंने पहली बार खुलकर बताया कि आईपीएल में अंपायरों की कमाई भी किसी बड़े प्रोफेशनल पैकेज से कम नहीं होती। उनके मुताबिक एक अनुभवी अंपायर केवल एक सीजन में 45 से 50 लाख रुपये तक कमा सकता है, जबकि फाइनल मुकाबले की फीस सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा।\हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास लेने वाले अनिल चौधरी ने एक पॉडकास्ट में अंपायरों की फीस, इंटरनेशनल क्रिकेट में मिलने वाले भुगतान और डीआरएस से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए। उन्होंने बताया कि मैदान पर लिए जाने वाले फैसलों की जिम्मेदारी जितनी बड़ी होती है, उसी हिसाब से अंपायरों को सम्मानजनक भुगतान भी किया जाता है।अनिल चौधरी के अनुसार, आईपीएल के एक लीग मुकाबले में अंपायरिंग करने के लिए लगभग 4,000 अमेरिकी डॉलर दिए जाते हैं। जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह रकम भी बढ़ जाती है। प्लेऑफ मुकाबलों के लिए अंपायरों को 6,000 डॉलर तक मिलते हैं, जबकि आईपीएल फाइनल में अंपायलगातार मैच कराने वाले अनुभवी अंपायर लगभग 45 से 50 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। यदि वही अंपायर घरेलू क्रिकेट के एलीट पैनल में भी शामिल हो, तो वहां से सालाना 20 से 25 लाख रुपये अतिरिक्त कमाई हो सकती है। यानी एक सफल भारतीय अंपायर की कुल वार्षिक आय 70 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।अनिल चौधरी ने सिर्फ आईपीएल ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मिलने वाली फीस का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अंपायर को लगभग दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि एक टेस्ट मैच में अंपायरिंग करने की फीस करीब आठ लाख रुपये होती है। खास बात यह है कि यदि किसी कारणवश मैच रद्द हो जाए, बारिश के कारण पूरा न खेला जाए या जल्दी समाप्त हो जाए, तब भी अंपायर की निर्धारित फीस में कोई कटौती नहीं होती। उन्हें पूरा भुगतान किया जाता है क्योंकि उनकी जिम्मेदारी मैच के दौरान हर परिस्थिति में बनी रहती है।अंपायरिंग को अक्सर आसान काम समझ लिया जाता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मैदान पर हर गेंद पर नजर रखना, नो-बॉल, वाइड, रन आउट, स्टंपिंग, कैच और एलबीडब्ल्यू जैसे फैसलों पर तुरंत निर्णय लेना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। एक छोटी-सी गलती पूरे मैच का रुख बदल सकती है। ऐसे में अंपायरों पर मानसिक दबाव भी खिलाड़ियों से कम नहीं होता।पॉडकास्ट के दौरान अनिल चौधरी ने भारत के तीन दिग्गज कप्तानों महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा के डीआरएस (Decision Review System) लेने के अंदाज पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि विराट कोहली मैदान पर काफी आक्रामक और उत्साही रहते थे। कई बार उन्हें लगता था कि फैसला गलत है और वे तुरंत डीआरएस लेने की सलाह देते थे।वहीं रोहित शर्मा के बारे में चौधरी ने कहा कि समय के साथ उनके फैसलों में काफी परिपक्वता आई है। शुरुआती वर्षों की तुलना में अब रोहित डीआरएस लेने से पहले काफी सोच-विचार करते हैं और टीम के अन्य खिलाड़ियों से भी सलाह लेते हैं।सबसे ज्यादा चर्चा महेंद्र सिंह धोनी को लेकर हुई। अनिल चौधरी ने कहा कि धोनी को यूं ही ‘धोनी रिव्यू सिस्टम’ (DRS) का मास्टर नहीं कहा जाता था। विकेट के पीछे उनकी बेहतरीन पोजिशनिंग, गेंद की लाइन और उछाल को समझने की क्षमता, बल्लेबाज की मूवमेंट पर पैनी नजर और शांत दिमाग उन्हें सबसे अलग बनाता था। यही वजह थी कि धोनी द्वारा लिए गए अधिकांश डीआरएस सही साबित होते थे और क्रिकेट जगत में इसे मजाक-मजाक में ‘Dhoni Review System’ कहा जाने लगा।

हालांकि अनिल चौधरी ने यह भी स्वीकार किया कि धोनी भी इंसान थे और उनसे भी कभी-कभी गलती हो जाती थी। उन्होंने एक ऐसे दुर्लभ मौके का जिक्र किया जब धोनी का लिया गया डीआरएस सफल नहीं हुआ था। चौधरी के अनुसार, उनकी सफलता की दर बेहद शानदार थी, लेकिन कोई भी खिलाड़ी या कप्तान हर बार सौ प्रतिशत सही फैसला नहीं ले सकता।क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आने के बाद अंपायरिंग पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। आज हर निर्णय को अल्ट्रा-एज, बॉल ट्रैकिंग, हॉक-आई और स्निकोमीटर जैसी आधुनिक तकनीकों से परखा जाता है। ऐसे में अंपायरों को भी लगातार खुद को अपडेट रखना पड़ता है और नियमों की गहरी समझ विकसित करनी होती है।आईपीएल जैसे हाई-प्रोफाइल टूर्नामेंट में हर फैसला करोड़ों दर्शकों की नजर में होता है। सोशल मीडिया के दौर में किसी भी फैसले पर तुरंत बहस शुरू हो जाती है। ऐसे माहौल में अंपायरों पर दबाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) अनुभवी और प्रशिक्षित अंपायरों को ही बड़े मुकाबलों की जिम्मेदारी सौंपते हैं।अनिल चौधरी के खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि क्रिकेट में सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि अंपायर भी अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के दम पर अच्छी कमाई करते हैं। हालांकि इस कमाई के पीछे वर्षों का अनुभव, कठोर प्रशिक्षण, नियमों की गहरी समझ और हर मैच में निष्पक्ष फैसले देने की बड़ी जिम्मेदारी छिपी होती है। आईपीएल का हर मुकाबला जितना खिलाड़ियों के लिए अहम होता है, उतना ही अंपायरों के लिए भी, क्योंकि मैदान पर उनका एक फैसला पूरे मैच की दिशा बदल सकता है।

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