लखनऊ उत्तर प्रदेश में कुष्ठ रोग के उन्मूलन की दिशा में सरकार ने अपनी रणनीति को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में कुष्ठ रोग के नए मामलों की समय रहते पहचान, संक्रमण की रोकथाम, रोग से होने वाली दिव्यांगता में कमी और प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस योजना के तहत अधिक मामले वाले जिलों और ब्लॉकों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने, रोगियों की नियमित निगरानी और कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों को जरूरी चिकित्सा एवं सामाजिक सेवाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।लखनऊ के ताजमहल होटल में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दो दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में प्रदेश को कुष्ठ रोग से मुक्त बनाने की रणनीति पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने स्पष्ट कहा कि सरकार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीमारी के उपचार के साथ इससे जुड़े सामाजिक कलंक, भेदभाव और बहिष्कार को समाप्त करना भी बेहद जरूरी है।
- स्वास्थ्य मंत्री बोले- कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए सरकार प्रतिबद्ध
- अधिक मामले वाले जिलों में चलेगा सघन रोगी खोज अभियान
- यूपी में वर्ष 2025-26 के दौरान 91,783 नए मामले दर्ज
- चिकित्सा के साथ मानवाधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी
- यूपी के सभी 75 जिलों में प्रसार दर 0.34
- पांच साल की योजना में कई विभागों की होगी भागीदारी

स्वास्थ्य मंत्री बोले- कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए सरकार प्रतिबद्ध
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्य स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा वी. हेकाली झिमोमी और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष योहेई सासाकावा ने किया। सम्मेलन का आयोजन उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, आईएलईपी इंडिया, निप्पोन फाउंडेशन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से किया है।इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले दस वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश ने जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में इस बीमारी से प्रदेश में किसी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है। इसके अलावा सिकल सेल एनीमिया और सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ भी अभियान चलाए जा रहे हैं।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अब कुष्ठ रोग के उन्मूलन के लिए भी गंभीरता से काम किया जा रहा है। हालांकि, इस बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई बार भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के डर से प्रभावित लोग अपनी बीमारी के बारे में खुलकर नहीं बताते और उपचार लेने में देरी करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से चिन्हित दस विषयों पर काम करेगी। इसका उद्देश्य कुष्ठ रोग की रोकथाम, समय पर उपचार और प्रभावित व्यक्तियों के सामाजिक सम्मान को सुनिश्चित करना है।
अधिक मामले वाले जिलों में चलेगा सघन रोगी खोज अभियान
प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि कुष्ठ रोग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिक मामले वाले जिलों और क्षेत्रों में सघन रोगी खोज अभियान चलाना जरूरी है। इससे बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान की जा सकेगी और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने, नियमित निगरानी करने और लोगों के बीच जागरूकता फैलाने से कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों को सामाजिक बहिष्कार से बचाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सम्मेलन में मौजूद अधिकारियों और प्रतिभागियों ने कुष्ठ रोग उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई और लखनऊ डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए।
यूपी में वर्ष 2025-26 के दौरान 91,783 नए मामले दर्ज
राज्य कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जया देहलवी ने सम्मेलन में वैश्विक, राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर कुष्ठ रोग की स्थिति प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में कुष्ठ रोग के 91,783 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं, उपचार पूरा करने की दर 97 प्रतिशत से अधिक रही।उन्होंने बताया कि सक्रिय रोगी खोज अभियान के जरिए नए मामलों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, रोगियों के निकट संपर्क में रहने वाले लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए रिफैम्पिसिन की एकल खुराक दी जा रही है।कुष्ठ रोग से दिव्यांगता का सामना कर रहे व्यक्तियों को पेंशन, विशेष चप्पल, घावों की देखभाल, शल्य चिकित्सा और पुनर्वास जैसी सेवाओं से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। डॉ. जया देहलवी ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि दिव्यांगता की रोकथाम और प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी है।
चिकित्सा के साथ मानवाधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी
सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष योहेई सासाकावा ने कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए फाउंडेशन की पांच दशकों से जारी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग केवल चिकित्सा से जुड़ा विषय नहीं है। इससे प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने बताया कि बीमारी के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होने और सामाजिक कलंक के डर से कई लोग उपचार के लिए आगे नहीं आते। ऐसी स्थिति में बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है और प्रभावित व्यक्ति को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जोर दिया कि भविष्य की रणनीति तैयार करते समय कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों के अनुभवों और उनकी आवाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यूपी के सभी 75 जिलों में प्रसार दर 0.34
विश्व स्वास्थ्य संगठन के भारत में प्रतिनिधि डॉ. इवान जे.-एफ. हुटिन वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुष्ठ रोग की प्रसार दर प्रति 10,000 आबादी पर 0.34 है। उन्होंने इसे राज्य की प्रतिबद्धता और प्रयासों का संकेत बताया, लेकिन साथ ही छिपे हुए मामलों की पहचान और निदान में देरी को अब भी बड़ी चुनौती माना।डॉ. हुटिन ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के साथ कुष्ठ रोग संबंधी सेवाओं के एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे शुरुआती पहचान को मजबूत करने, गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने और प्रभावित व्यक्तियों को सामाजिक रूप से स्वीकार्य वातावरण देने में मदद मिल सकती है। उन्होंने संक्रमण रोकने के साथ बीमारी से जुड़े कलंक को खत्म करने की आवश्यकता भी बताई।
पांच साल की योजना में कई विभागों की होगी भागीदारी
सम्मेलन में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज और आयुष विभागों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। उद्देश्य यह है कि कुष्ठ रोग उन्मूलन को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित न रखकर विभिन्न विभागों और सहयोगी संस्थाओं के समन्वय से आगे बढ़ाया जाए।कार्यक्रम में केंद्र सरकार के केंद्रीय कुष्ठ रोग प्रभाग, सात उच्च प्रसार वाले राज्यों के राज्य कुष्ठ रोग अधिकारियों और उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अलावा बीएचयू, केजीएमयू, आगरा मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के प्रतिनिधि, त्वचा रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा संगठनों के सदस्य, कुष्ठ प्रभावित व्यक्ति, स्वास्थ्यकर्मी, आशा कार्यकर्ता, सहयोगी संगठन और मीडियाकर्मी भी शामिल हुए।सम्मेलन में प्राप्त सुझावों के आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस योजना में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, रोगियों की शीघ्र पहचान, उपचार की निगरानी और सामाजिक समावेशन जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में कुष्ठ रोग उन्मूलन की रणनीति अब शुरुआती पहचान, समय पर उपचार, दिव्यांगता की रोकथाम और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संयुक्त प्रयासों पर केंद्रित होगी। सरकार और सहयोगी संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती छिपे हुए मामलों तक पहुंचने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों को बिना भेदभाव के सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की है।
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