
मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की घटना ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांगपोकपी जिले के थिंगखोंगजांग गांव में रविवार शाम हुई गोलीबारी में आठ साल की एक बच्ची और 56 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से जातीय तनाव और हिंसा की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि पिछले कुछ महीनों में शांति बहाल करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन इस ताजा घटना ने एक बार फिर राज्य की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
थिंगखोंगजांग गांव में अचानक हुई फायरिंग
पुलिस के अनुसार, रविवार शाम कांगपोकपी जिले के थिंगखोंगजांग गांव में हथियारबंद हमलावरों द्वारा अचानक गोलीबारी की गई। घटना के दौरान स्थानीय लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई।गोलीबारी में 56 वर्षीय नेन्गनेइचोंग किपजेन और आठ वर्षीय लामनेइंगा किपजेन गंभीर रूप से घायल हो गईं। दोनों को पहले नजदीकी असम राइफल्स कैंप में प्राथमिक उपचार दिया गया। प्राथमिक इलाज के बाद देर रात बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए इंफाल स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना के तुरंत बाद पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाके में गश्त तेज कर दी। अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।रिम्स अस्पताल के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले लोगों की जांच की जा रही है और सुरक्षा बल लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

जून की घटना के बाद पहले भी हुआ था विरोध
रिम्स अस्पताल हाल के महीनों में पहले भी चर्चा का केंद्र रहा है। जून में कांगपोकपी जिले में हुई गोलीबारी में घायल तीन युवकों को इलाज के लिए इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।उस दौरान कुछ संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि घायलों में हथियारबंद समूहों से जुड़े लोग भी शामिल थे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कुछ लोगों ने अस्पताल परिसर में प्रवेश करने की भी कोशिश की थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया था।
कुकी संगठन ने लगाया गंभीर आरोप
केआईएम ने घटना की कड़ी निंदा की
रविवार की घटना के बाद कुकी समुदाय की प्रमुख संस्था ‘कुकी इनपी मणिपुर’ (KIM) ने घटना की कड़ी निंदा की है।संगठन ने आरोप लगाया कि इस गोलीबारी में एनएससीएन (आईएम) और जेडयूएफ (कामसन) के सदस्यों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।केआईएम ने अपने बयान में कहा कि निहत्थे नागरिकों की बस्ती को निशाना बनाना बेहद गंभीर मामला है और इससे आम लोगों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
संगठन ने केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।केआईएम का कहना है कि यदि निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो सरकारी संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। संगठन ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।

जांच में जुटीं एजेंसियां, हमलावरों की तलाश जारी
घटना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच कर रही हैं और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान करने और घटना के पीछे की साजिश का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मणिपुर में शांति बहाली अब भी बड़ी चुनौती
मणिपुर पिछले कई महीनों से जातीय तनाव और हिंसा की घटनाओं से जूझ रहा है। राज्य और केंद्र सरकार लगातार शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती, संवाद और राहत कार्यों जैसे कई कदम उठा रही हैं।हालांकि समय-समय पर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा उपायों के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली और संवाद भी बेहद जरूरी है।उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के लिए मणिपुर की स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के किसी भी हिस्से में होने वाली हिंसा राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा विषय है। ऐसे घटनाक्रम यह भी बताते हैं कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय कितना आवश्यक है।देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में हालात कैसे बदल रहे हैं और सरकार स्थिति सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है।कांगपोकपी जिले में हुई ताजा गोलीबारी ने एक बार फिर मणिपुर की नाजुक सुरक्षा स्थिति को उजागर किया है। आठ वर्षीय बच्ची और एक महिला के घायल होने से यह स्पष्ट है कि हिंसा का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ता है। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जारी है, जबकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और प्रशासनिक कार्रवाई पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
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