मोदी-पुतिन मुलाकात: रूस यात्रा का न्योता स्वीकार, यूक्रेन पर बड़ा बयान

Editorial
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नई दिल्ली भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत किया और इसके बाद रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।इस मुलाकात के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का न्योता दिया। पीएम मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, रूस यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है। दोनों देशों की आपसी सुविधा के अनुसार राजनयिक माध्यमों से तारीख तय की जाएगी।

मोदी-पुतिन मुलाकात
मोदी-पुतिन मुलाकात

रूस यात्रा के न्योते को PM मोदी ने किया स्वीकार

मोदी-पुतिन मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के रूप में सामने आया। राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को आगामी वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया।भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच रणनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में मोदी की प्रस्तावित रूस यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

 रूस यात्रा का न्योता स्वीकार

यूक्रेन संघर्ष पर भारत का रुख फिर स्पष्ट

बैठक में यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जा सकता है।पीएम मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष को समाप्त कराने के प्रयासों में सहयोग करने के लिए तैयार है। भारत लगातार दोनों पक्षों के बीच बातचीत और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।बैठक में पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव तथा भारतीय नाविकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

मोदी-पुतिन वार्ता में आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हुई।इसके लिए दोनों देश भारतीय और रूसी कंपनियों के बीच कारोबार के नए अवसर तलाशने, रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने पर काम कर रहे हैं।भारत के लिए रूस ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि रूस के लिए भारत एक बड़ा बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। ऐसे में दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और व्यापक होने की उम्मीद है।

INNOPROM India से औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत में पहली बार आयोजित INNOPROM India प्रदर्शनी का दौरा भी किया। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनी में शामिल प्रतिभागियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।INNOPROM India के जरिए भारत और रूस के बीच औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसमें दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर, तकनीकी सहयोग और निवेश की संभावनाएं तलाशने पर जोर है।दोनों देशों के बीच रेल क्षेत्र, सुरंग निर्माण और स्टील क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। स्टील की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने और औद्योगिक उत्पादन में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी दोनों पक्षों की दिलचस्पी दिखाई दी।

नागरिक परमाणु ऊर्जा में सहयोग होगा मजबूत

भारत और रूस के संबंधों में नागरिक परमाणु ऊर्जा का क्षेत्र भी बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।इसमें परमाणु ईंधन से लेकर परमाणु संयंत्रों के पूरे जीवनचक्र से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए यह सहयोग काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

रूस में भारतीय कामगारों के लिए बढ़ सकते हैं अवसर

मोदी-पुतिन बैठक में रोजगार और लोगों के बीच आवाजाही का मुद्दा भी अहम रहा। खास तौर पर रूस में भारतीय कुशल कामगारों की संख्या बढ़ाने और दोनों देशों के बीच श्रमिकों की आवाजाही को आसान बनाने पर चर्चा हुई।भारत की बड़ी युवा आबादी और रूस की औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए यह सहयोग रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। इससे भारत-रूस संबंधों को केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित रखने के बजाय रोजगार और लोगों के बीच संपर्क के स्तर पर भी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

पुतिन को PM मोदी ने भेंट की तिरुक्कुरल की रूसी प्रति

मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भी भेंट किया।तिरुक्कुरल तमिल भाषा का प्रसिद्ध नीति ग्रंथ है, जिसकी रचना संत तिरुवल्लुवर से जोड़ी जाती है। इसमें सत्य, सदाचार, परिश्रम, दया, न्याय, मित्रता और अच्छे शासन जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर जोर दिया गया है।पीएम मोदी ने इसे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और मानव मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया। रूसी भाषा में इसका अनुवाद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क को भी मजबूत करने का संदेश देता है।

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले मुलाकात क्यों अहम?

भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन तथा महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।पुतिन का भारत दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूस के बाहर किसी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी पहली व्यक्तिगत भागीदारी बताई जा रही है।ब्रिक्स से इतर मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय बैठक ने भारत-रूस संबंधों की व्यापक तस्वीर भी सामने रखी। रक्षा और ऊर्जा से लेकर व्यापार, परमाणु सहयोग, उद्योग और रोजगार तक दोनों देशों के बीच साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

क्या निकला मोदी-पुतिन बैठक का संदेश?

कुल मिलाकर मोदी-पुतिन बैठक से तीन बड़े संदेश सामने आए—पहला, भारत और रूस अपने रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। दूसरा दोनों देश व्यापार और औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की कोशिश कर रहे हैं। तीसरा, यूक्रेन समेत अन्य वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए भारत बातचीत और कूटनीति को प्राथमिक रास्ता मानता है।आने वाले दिनों में प्रस्तावित मोदी की रूस यात्रा और 24वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में इन मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

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