सहारनपुर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) की ओर से स्वाभिमान रैली का आयोजन किया जा रहा है। गोचर कृषि इंटर कॉलेज के मैदान में होने वाली इस रैली को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजकों के मुताबिक रैली में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है और करीब 50 हजार लोगों की क्षमता वाला पंडाल तैयार किया गया है।रैली में केंद्रीय राज्यमंत्री और रालोद के प्रमुख नेता जयंत चौधरी परिवार के साथ पहुंचेंगे। ऐसे में इस कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि जयंत चौधरी इस मंच से पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर बड़ा संदेश दे सकते हैं।
रामपुर मनिहारान में जुटेगा बड़ा जनसमूह
रामपुर मनिहारान के गोचर कृषि इंटर कॉलेज मैदान में रैली के लिए विशाल पंडाल बनाया गया है। आयोजकों के अनुसार इसमें करीब 50 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। रैली स्थल पर मंच, पेयजल, पार्किंग, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।रैली को सफल बनाने के लिए रालोद के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता कई दिनों से तैयारियों में जुटे हुए थे। क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में जनसंपर्क कर लोगों से रैली में शामिल होने की अपील की गई है। पार्टी नेताओं का दावा है कि स्वाभिमान रैली में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचेंगे।

परिवार के साथ रैली में पहुंचेंगे जयंत चौधरी
रैली के मुख्य अतिथि जयंत चौधरी के सुबह करीब 11:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की जानकारी दी गई है। आयोजकों के अनुसार वह परिवार के साथ रैली में शामिल होंगे। उनकी पत्नी और बेटियों के भी कार्यक्रम में पहुंचने की बात कही गई है।जयंत चौधरी की मौजूदगी में होने वाली इस रैली को रालोद के लिए महज एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगठन की ताकत दिखाने वाले बड़े मंच के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भी इसे लेकर उत्साह नजर आ रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव पर रहेगी खास नजर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए सहारनपुर की स्वाभिमान रैली को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।रैली के जरिए जयंत चौधरी पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव की दिशा और रणनीति का संकेत दे सकते हैं। इसके साथ ही पश्चिमी यूपी में रालोद की संगठनात्मक स्थिति और जनाधार का आकलन भी इस कार्यक्रम से किया जा सकता है।पार्टी के लिए यह रैली इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करना रालोद की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में जयंत चौधरी के भाषण पर राजनीतिक गलियारों की खास नजर रहेगी।
गुर्जर समाज को साधने की कोशिश?
सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग सामाजिक समूहों का चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। रालोद की स्वाभिमान रैली को गुर्जर समाज के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।हालांकि रैली का व्यापक संदेश केवल किसी एक समुदाय तक सीमित रखने के बजाय पार्टी के जनाधार को विस्तार देने पर भी केंद्रित हो सकता है। रालोद पिछले कुछ समय से पश्चिमी यूपी में अपने संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।ऐसे में जयंत चौधरी के संबोधन में सामाजिक समीकरण, संगठन विस्तार और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर क्या संदेश दिया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
सांसद और विधायकों ने पहले से संभाला मोर्चा
रैली से पहले रालोद के सांसदों और स्थानीय नेताओं ने भी क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान तेज किया। बागपत सांसद राजकुमार सांगवान ने बुधवार को कई गांवों में पहुंचकर लोगों से संपर्क किया और उन्हें रैली में शामिल होने का निमंत्रण दिया।पार्टी की राष्ट्रीय सचिव रमा नागर, प्रदेश महासचिव महिला शाखा अनीता चौधरी और पूनम शर्मा समेत कई पदाधिकारी भी रैली की तैयारियों में सक्रिय रहे। स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर भीड़ जुटाने और कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने की रणनीति बनाई गई।रालोद नेताओं ने रैली को लेकर बड़ा दावा करते हुए इसे उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी रैलियों में शामिल होने की बात कही है। हालांकि वास्तविक भीड़ का आकलन कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में क्या संदेश देगी रैली?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय से उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का अहम क्षेत्र रहा है। यहां सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का सीधा असर विधानसभा चुनाव के नतीजों पर देखने को मिलता है। ऐसे में सहारनपुर में होने वाली रालोद की यह रैली केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है।जयंत चौधरी के भाषण और मंच से दिए जाने वाले राजनीतिक संकेतों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रालोद 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। खासतौर पर संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरण और पश्चिमी यूपी में पार्टी की भूमिका को लेकर उनकी रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।
रालोद के लिए शक्ति प्रदर्शन का मौका
स्वाभिमान रैली के जरिए रालोद एक तरफ जहां अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश भी देना चाहती है। बड़ी संख्या में लोगों की संभावित मौजूदगी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता से कार्यक्रम का महत्व बढ़ गया है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जयंत चौधरी सहारनपुर की इस स्वाभिमान रैली से 2027 के चुनाव के लिए क्या संदेश देते हैं और पश्चिमी यूपी की राजनीति को लेकर उनकी अगली रणनीति क्या होगी। रैली के मंच से सामने आने वाले राजनीतिक संकेत आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की चुनावी सियासत की दिशा समझने में अहम साबित हो सकते हैं।
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