नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। एक ओर रिजिजू ने दीपके को लेकर नरम रुख अपनाते हुए उन्हें ‘अपना ही लड़का’ बताया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने उनके छात्र होने और आम आदमी पार्टी (AAP) से कथित जुड़ाव पर सवाल उठाए। रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों की जायज मांगों से शुरू हुए आंदोलन को राजनीतिक दलों ने अपने हित में इस्तेमाल करने की कोशिश की।रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में CJP आंदोलन, छात्र मुद्दों और अभिजीत दीपके को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताएं और उनकी मांगें अपनी जगह जायज हैं, लेकिन उनका दावा है कि राजनीतिक दलों ने इस आंदोलन को अपने राजनीतिक फायदे के लिए प्रभावित किया।

अभिजीत दीपके पर रिजिजू का नरम रुख
अभिजीत दीपके का जिक्र करते हुए किरेन रिजिजू ने पहले अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाया। उन्होंने दीपके को अपना ही लड़का बताया और उनके महाराष्ट्र से होने तथा बौद्ध होने का उल्लेख किया। इसके बाद उन्होंने दीपके की राजनीतिक भूमिका और छात्र के तौर पर उनकी पहचान को लेकर सवाल खड़े किए।रिजिजू के बयान के मुताबिक, उनका सवाल यह था कि यदि दीपके आम आदमी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता हैं तो उन्हें छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे के तौर पर कैसे देखा जा रहा है। हालांकि आम आदमी पार्टी से दीपके के संबंध को लेकर रिजिजू द्वारा लगाए गए दावे को इसी रूप में बयान के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर।
छात्रों की मांगों को जायज बताया
संसदीय कार्य मंत्री ने बातचीत के दौरान छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी उनकी मांगों को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने माना कि छात्रों की कई चिंताएं वास्तविक हो सकती हैं और शिक्षा क्षेत्र में सुधार की जरूरतों पर चर्चा होनी चाहिए।हालांकि रिजिजू का आरोप है कि छात्रों की आवाज के पीछे राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीति शुरू कर दी। उन्होंने विशेष रूप से विपक्षी दलों और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी राजनीति में नुकसान उठाने वाले दल छात्रों के आंदोलनों के जरिए अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करते हैं।

‘छात्रों की आड़ में राजनीति’ का लगाया आरोप
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं बताया।उनके मुताबिक, छात्र अगर अपनी शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन करते हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। लेकिन यदि राजनीतिक दल आंदोलन को अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल करते हैं तो इससे मूल मुद्दा पीछे छूट सकता है।यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP के बैनर तले हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद बढ़ी सियासी हलचल
अभिजीत दीपके और CJP से जुड़े आंदोलन ने हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चा का रूप ले लिया है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की मांगों और सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए गए।प्रदर्शन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। रिजिजू ने इसी संदर्भ में दावा किया कि आंदोलन के दौरान छात्रों की वास्तविक चिंताओं के साथ राजनीतिक गतिविधियां भी जुड़ गईं।सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर अलग रुख सामने आया, जबकि प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने अपनी मांगों को छात्रों और युवाओं के हित से जुड़ा बताया।
कानून-व्यवस्था पर भी रिजिजू ने रखी बात
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर भी किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि बड़े स्तर पर प्रदर्शन होने के बावजूद पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखी और किसी व्यक्ति को गंभीर नुकसान नहीं हुआ।रिजिजू ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद विपक्ष की ओर से सरकार पर छात्रों के दमन की कहानी बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
CJP और अभिजीत दीपके पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
अभिजीत दीपके पिछले कुछ समय से युवाओं और छात्र मुद्दों से जुड़े आंदोलनों के कारण चर्चा में हैं। CJP के माध्यम से सामने आने वाले मुद्दों पर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी बहस देखने को मिल रही है।अब किरेन रिजिजू के बयान के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आ गया है। खासतौर पर दीपके की राजनीतिक संबद्धता, छात्र आंदोलन की प्रकृति और आंदोलन में राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो सकती है।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बढ़ सकता है टकराव
शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों में राजनीतिक दलों की भूमिका हमेशा चर्चा का विषय रही है। सरकार का तर्क रहता है कि छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जबकि आंदोलनकारी पक्ष अक्सर यह कहता है कि राजनीतिक समर्थन मिलने से उनकी आवाज व्यापक स्तर तक पहुंचती है।ऐसे में CJP आंदोलन भी अब केवल छात्र मुद्दों तक सीमित न रहकर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
रिजिजू के बयान से क्या संकेत?
किरेन रिजिजू का बयान दो स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, उन्होंने छात्रों की मांगों को पूरी तरह खारिज नहीं किया और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं को जायज माना। दूसरा, उन्होंने आंदोलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए अभिजीत दीपके और AAP के कथित संबंधों पर सवाल उठाए।अब देखना होगा कि अभिजीत दीपके और CJP की ओर से रिजिजू के इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि छात्र आंदोलन से जुड़े मूल मुद्दों पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे किस तरह की बातचीत होती है।
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