अयोध्या अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब एक कथित गोपनीय डायरी की एंट्री चर्चा का केंद्र बन गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से लिखी गई बताई जा रही इस डायरी में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका, उनके बयानों और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ी कई बातों का सिलसिलेवार उल्लेख होने का दावा किया गया है। डायरी में संतों की ओर से पूछे गए एक सवाल का भी जिक्र है- क्या नृपेंद्र मिश्र खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं?चंपत राय की कथित डायरी के अनुसार, उस समय संतों के इस सवाल का उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। डायरी में 18 जून से शुरू हुए नृपेंद्र मिश्र के टेलीविजन साक्षात्कारों, उनके बयानों में कथित बदलाव और बाद में सार्वजनिक वक्तव्यों के अचानक बंद होने का भी उल्लेख किया गया है।हालांकि डायरी में दर्ज आरोप और टिप्पणियां संबंधित व्यक्तियों के व्यक्तिगत आकलन के रूप में देखी जानी चाहिए। किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच या अदालत के अंतिम निष्कर्ष के बिना तथ्य नहीं माना जा सकता।
- चार दिनों में 14 चैनलों से बातचीत का दावा
- चोरी के लिए ‘डकैती’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल
- संतों ने पूछा- क्या नृपेंद्र मिश्र खलनायक हैं?
- पहले निर्माण और व्यवस्थाओं पर होती थी चर्चा
- भुगतान में देरी से निर्माण कार्य प्रभावित होने का दावा
- करीब एक दर्जन एजेंसियां भुगतान की समस्या से प्रभावित
- आठ आरोपी जेल में, पांच सितंबर तक न्यायिक अभिरक्षा
- पेंशन खाते की सत्यापन रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल
- अधिवक्ता संघ की याचिका पर 29 अगस्त को सुनवाई
- डायरी ने बढ़ाई मामले की राजनीतिक और संस्थागत चर्चा
चार दिनों में 14 चैनलों से बातचीत का दावा
कथित डायरी के मुताबिक, 18 जून से नृपेंद्र मिश्र ने दिल्ली में कई टेलीविजन चैनलों को इंटरव्यू देना शुरू किया। इसमें दावा किया गया है कि करीब चार दिनों के दौरान उन्होंने लगभग 14 चैनलों से बातचीत की।डायरी में यह भी लिखा गया है कि शुरुआती दौर में नृपेंद्र मिश्र अपनी जिम्मेदारी को मुख्य रूप से मंदिर निर्माण कार्य तक सीमित बताते थे। लेकिन बाद के बयानों में उनकी भाषा और मुद्दों का दायरा बदलता दिखाई दिया।इसी बदलाव को लेकर चंपत राय की कथित डायरी में सवाल उठाए गए हैं। डायरी के अनुसार, नृपेंद्र मिश्र के सार्वजनिक बयानों को लेकर संतों के बीच भी चर्चा हुई और उनसे सवाल किए गए।

चोरी के लिए ‘डकैती’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल
राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी प्रकरण में नृपेंद्र मिश्र द्वारा कथित तौर पर ‘डकैती’ शब्द इस्तेमाल किए जाने का भी डायरी में उल्लेख है।चंपत राय की कथित टिप्पणी के अनुसार, इस तरह की शब्दावली से समाज में गलत संदेश जाने की आशंका थी। इसके बाद 23 जून से नृपेंद्र मिश्र के सार्वजनिक बयान अचानक बंद होने का दावा किया गया।डायरी में इसी घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कारण जानने की बात कही गई है। हालांकि, किसी सार्वजनिक बयान के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी पुष्टि संबंधित व्यक्ति या आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।
संतों ने पूछा- क्या नृपेंद्र मिश्र खलनायक हैं?
कथित डायरी का सबसे चर्चित हिस्सा संतों के सवाल से जुड़ा है। इसमें बताया गया है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद कुछ संतों ने चंपत राय से पूछा कि क्या नृपेंद्र मिश्र इस पूरे मामले में खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं।डायरी के अनुसार, चंपत राय ने उस समय इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। यह टिप्पणी अब इसलिए चर्चा में है क्योंकि मंदिर ट्रस्ट और मंदिर निर्माण समिति से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो चुकी है।हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि डायरी में दर्ज किसी व्यक्ति की टिप्पणी अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं करती।

पहले निर्माण और व्यवस्थाओं पर होती थी चर्चा
कथित डायरी में राम मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट के बीच कामकाज के तरीके में आए बदलाव का भी जिक्र है।दावे के मुताबिक, करीब छह महीने पहले तक नृपेंद्र मिश्र और चंपत राय के बीच मंदिर निर्माण के साथ-साथ व्यवस्थाओं से जुड़े छोटे-बड़े मुद्दों पर भी चर्चा होती थी। किसी विषय पर मतभेद होने की स्थिति में कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनाने का प्रयास किया जाता था।बाद में नृपेंद्र मिश्र ने व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों को ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय बताते हुए उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी। डायरी में इसी बदलाव को ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच संस्थागत दूरी के तौर पर देखने की कोशिश की गई है।

भुगतान में देरी से निर्माण कार्य प्रभावित होने का दावा
राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण एजेंसियों का भुगतान लंबित होने के कारण कुछ परियोजनाओं की गति प्रभावित होने का दावा किया गया है।बाउंड्रीवॉल के निर्माण की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रहने की बात कही गई है। इसके अलावा ऑडिटोरियम और परिसर से जुड़ी दूसरी परियोजनाओं पर भी भुगतान में देरी का असर पड़ने का दावा किया गया है।निर्माण कार्यों में कई छोटी-बड़ी एजेंसियां शामिल हैं। भुगतान में देरी होने पर एजेंसियों को कर्मचारियों के वेतन, सामग्री और दूसरे खर्चों के लिए अपनी कार्यशील पूंजी का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे निर्माण की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
करीब एक दर्जन एजेंसियां भुगतान की समस्या से प्रभावित
मंदिर परिसर की सफाई, सीवरेज, ड्रेनेज और अन्य व्यवस्थाओं के लिए कई एजेंसियां काम कर रही हैं। रिपोर्ट में करीब एक दर्जन एजेंसियों के भुगतान और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े बकाये का उल्लेख किया गया है।बताया गया है कि कुछ एजेंसियों के कर्मचारियों का कई महीनों का वेतन लंबित है। भुगतान प्रक्रिया में देरी के कारण एजेंसियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की बात कही गई है।हालांकि इन दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित एजेंसियों, ट्रस्ट के रिकॉर्ड और आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।
आठ आरोपी जेल में, पांच सितंबर तक न्यायिक अभिरक्षा
राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा पांच सितंबर तक बढ़ा दी गई है। शनिवार को आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट में पेश किया गया।विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने अभियोजन पक्ष की मांग पर न्यायिक अभिरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया।इस मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को 25 जून को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।
पेंशन खाते की सत्यापन रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल
आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन बैंक खाते से जुड़े मामले में शनिवार को महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। लीगल एड डिफेंस कौंसिल की ओर से बैंक की सत्यापन रिपोर्ट सहित अन्य कागजात अदालत में दाखिल किए गए।अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोपी की ओर से पेश दस्तावेजों पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इस मामले में 25 अगस्त को आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।
अधिवक्ता संघ की याचिका पर 29 अगस्त को सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग को लेकर अधिवक्ता संघ की ओर से मॉनिटरिंग प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। शनिवार को इस पर सुनवाई नहीं हो सकी।अभियोजन पक्ष ने प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। विशेष न्यायाधीश ने अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त की तारीख तय की है।अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग के साथ तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका की जांच की मांग भी किए जाने की बात सामने आई है।
डायरी ने बढ़ाई मामले की राजनीतिक और संस्थागत चर्चा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण पहले से ही जांच और अदालत की कार्यवाही के कारण चर्चा में है। अब चंपत राय की कथित डायरी में दर्ज टिप्पणियों ने मामले में ट्रस्ट, निर्माण समिति और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों को और बढ़ा दिया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि डायरी में दर्ज टिप्पणियां किस संदर्भ में लिखी गईं और क्या इनका चढ़ावा चोरी मामले की जांच से कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होता है। इसका जवाब जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आएगा।फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है। डायरी में सामने आए सवालों और आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी। मामले में अदालत की अगली सुनवाई और जांच की प्रगति से ही आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
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