नई दिल्ली भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे एक बड़े कानूनी विवाद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचादबैंक के साथ चल रहे विवाद में पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह मामला रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में बैंक की संपत्तियों और कारोबार को हुए कथित नुकसान से जुड़ा है।इस विवाद में तीन सदस्यीय मध्यस्थता टीम बनाई गई है। रूस और यूक्रेन के बैंक की ओर से एक-एक मध्यस्थ चुना गया है, जबकि तीसरे मध्यस्थ को दोनों पक्षों की सहमति से नियुक्त किया गया है। ऐसे में पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के क्षेत्र में भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या है रूस और यूक्रेन के सरकारी बैंक का विवाद?
यह मामला यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचादबैंक की ओर से रूस के खिलाफ किए गए नुकसान के दावे से जुड़ा है। बैंक का आरोप है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को नुकसान पहुंचा।इन क्षेत्रों में डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसन और जापोरिज्जिया का नाम सामने आया है। बैंक का दावा है कि इन इलाकों में उसके कारोबार और संपत्तियों को नुकसान हुआ, जिसके लिए वह रूस से आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग कर रहा है।इसी दावे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई है। मामले के समाधान के लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया गया है।
रूस की ओर से मध्यस्थ होंगे डीवाई चंद्रचूड़
इस मामले में रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को अपने पक्ष से मध्यस्थ नियुक्त किया है। इसका मतलब है कि वह इस मध्यस्थता प्रक्रिया में रूस की ओर से नियुक्त सदस्य के तौर पर काम करेंगे।डीवाई चंद्रचूड़ भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं और सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक न्यायिक दायित्व निभा चुके हैं। उनके अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ के रूप में चयन को उनके व्यापक न्यायिक अनुभव और कानूनी विशेषज्ञता से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि मध्यस्थ की भूमिका किसी एक पक्ष के वकील के तौर पर काम करने से अलग होती है। मध्यस्थता पैनल का उद्देश्य विवाद में दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और कानूनी दावों पर विचार कर प्रक्रिया के तहत निर्णय तक पहुंचना होता है।
तीन सदस्यीय टीम में कौन-कौन शामिल?
रूस और ओशचादबैंक के बीच विवाद के लिए बनाई गई मध्यस्थता टीम में कुल तीन सदस्य हैं।इस पैनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की ड्याला जिमेनेज करेंगी। उन्हें रूस और यूक्रेन के ओशचादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना है। यानी उनकी नियुक्ति दोनों पक्षों की सहमति से हुई है।दूसरे सदस्य के रूप में ग्रीस के स्तावरोस ब्रेकौलाकिस को यूक्रेन के ओशचादबैंक ने नियुक्त किया है।तीसरे सदस्य के तौर पर रूस ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है।इस तरह पैनल में दोनों पक्षों की ओर से नियुक्त एक-एक सदस्य है, जबकि अध्यक्ष की नियुक्ति दोनों पक्षों की सहमति से हुई है।

चंद्रचूड़ की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण?
इस मामले में पूर्व CJI चंद्रचूड़ की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद का संबंध रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे व्यापक राजनीतिक और सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि से है। ऐसे मामलों में कानूनी दावे, संपत्ति के नुकसान, अंतरराष्ट्रीय कानून और मध्यस्थता से जुड़े जटिल सवाल सामने आ सकते हैं।चंद्रचूड़ का लंबा न्यायिक अनुभव उन्हें इस तरह के जटिल कानूनी विवाद की प्रक्रिया समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, मध्यस्थता में अंतिम प्रक्रिया संबंधित नियमों, दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
ओशचादबैंक क्या चाहता है?
यूक्रेन का सरकारी बैंक रूस से अपने कथित आर्थिक नुकसान की भरपाई चाहता है। बैंक का कहना है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उसके कुछ कारोबारी हितों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।दावे में यूक्रेन के उन क्षेत्रों को शामिल किया गया है जहां बैंक की संपत्तियां और गतिविधियां प्रभावित होने का आरोप है। बैंक ने इसी नुकसान को लेकर रूस के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।दावे की रकम को रिपोर्टों में बहुत बड़ी राशि बताया गया है। ऐसे में इस विवाद का संभावित आर्थिक प्रभाव भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अंतिम राशि और दावे की स्वीकार्यता मध्यस्थता प्रक्रिया में तय होने वाले कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर निर्भर करेगी।
मध्यस्थता प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी?
तीन सदस्यीय पैनल दोनों पक्षों के दावों और जवाबों पर विचार करेगा। इसमें संबंधित दस्तावेज, कानूनी तर्क और नुकसान से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।ओशचादबैंक की ओर से रूस के खिलाफ किए गए दावे पर रूस अपना पक्ष रखेगा। इसके बाद मध्यस्थता पैनल दोनों पक्षों के तर्कों का परीक्षण करेगा।इस प्रक्रिया का उद्देश्य विवाद का कानूनी समाधान निकालना है। यह मामला रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे व्यापक तनाव की पृष्ठभूमि में होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों अहम है यह मामला?
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य संघर्ष के कारण संपत्ति, कारोबार और आर्थिक नुकसान से जुड़े कई कानूनी विवाद सामने आए हैं। ओशचादबैंक का मामला भी इसी व्यापक विवाद का एक हिस्सा है।इस मामले में एक पूर्व भारतीय मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति इसे और महत्वपूर्ण बनाती है। डीवाई चंद्रचूड़ का नाम भारत की न्यायपालिका में महत्वपूर्ण रहा है और अब उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल एक अंतरराष्ट्रीय विवाद की मध्यस्थता में किया जा रहा है।
क्या होगा आगे?
अब तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल के सामने रूस और ओशचादबैंक अपने-अपने पक्ष और दावे रखेंगे। पैनल संबंधित कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगा।मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को ओशचादबैंक के साथ विवाद में अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है।रूस-यूक्रेन विवाद की पृष्ठभूमि में ओशचादबैंक की ओर से रूस से नुकसान की भरपाई की मांग के मामले में पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति एक अहम घटनाक्रम है। तीन सदस्यीय पैनल में चंद्रचूड़ रूस की ओर से नियुक्त सदस्य होंगे, जबकि कोस्टा रिका की ड्याला जिमेनेज अध्यक्ष और ग्रीस के स्तावरोस ब्रेकौलाकिस यूक्रेनी बैंक की ओर से सदस्य होंगे। अब इस अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में दोनों पक्षों के दावों और कानूनी तर्कों की जांच के बाद आगे की दिशा तय होगी।
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