10 मिनट की मुलाकात, फावड़े से निर्मम हत्या… सहेली निकली कातिल! कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Editorial
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वाराणसी के कपसेठी थाना क्षेत्र से सामने आए एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। वर्ष 2022 में हुई इस नृशंस वारदात में अदालत ने अब बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी सहेली राखी वर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला जज आलोक कुमार की अदालत ने दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से 70 प्रतिशत राशि मृतका के बच्चों को मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया गया है।यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब 21 अप्रैल 2022 की सुबह कंचन वर्मा को उसकी ही सहेली राखी वर्मा ने ब्लाउज डिजाइन दिखाने के बहाने अपने घर बुलाया था। कॉल पर कहा गया कि सिर्फ 10 मिनट के लिए आना है, लेकिन यह 10 मिनट की मुलाकात मौत की साजिश में बदल गई। कंचन अपने पति संजय वर्मा के साथ तय समय पर राखी के घर पहुंची, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला था।करीब 45 मिनट बाद आरोपी राखी ने कंचन के मोबाइल से ही उसके पति संजय को फोन कर कहा कि डायल 112 पर कॉल कर अपनी पत्नी को ले जाओ। जब संजय मौके पर पहुंचा तो उसे बताया गया कि कंचन ऊपर छत पर है। जैसे ही वह छत पर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया, अंदर से दरवाजा खोला गया। सामने जो दृश्य था वह बेहद भयावह था—कंचन का शव खून से लथपथ पड़ा था, गला धारदार हथियार से कटा हुआ था और पास ही खून से सना फावड़ा पड़ा था।पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और हत्या में इस्तेमाल फावड़े को कब्जे में लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मृतका की मौत अत्यधिक रक्तस्राव यानी हेमरेजिक शॉक से हुई थी। शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं, जिनमें गले, चेहरे और छाती पर गहरे वार शामिल थे। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि कई घाव बोन-डीप थे और हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी और मृतका के बीच घनिष्ठ संबंध थे और दोनों एक-दूसरे के घर आते-जाते थे। पुलिस के अनुसार, इसी नजदीकी के चलते विवाद और तनाव की स्थिति बनी, जो अंततः हत्या तक पहुंच गई। वहीं आरोपी के बयान में हत्या के पीछे व्यक्तिगत संबंध और असंतोष जैसी बातें सामने आईं, जबकि बचाव पक्ष ने इसे प्रधानी चुनाव की रंजिश में फंसाने का दावा किया।अदालत में कुल 9 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। अभियोजन पक्ष ने इसे अत्यंत बर्बर और अमानवीय कृत्य बताते हुए फांसी की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे मृत्युदंड की श्रेणी में नहीं माना। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और परिस्थितियों का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की, लेकिन अदालत ने साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।इस मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट में फावड़े सहित कई वस्तुओं पर मानव रक्त की पुष्टि हुई, जबकि विसरा जांच में किसी जहरीले पदार्थ के अंश नहीं मिले। अदालत ने स्पष्ट माना कि हत्या में इस्तेमाल हथियार और चोटों की प्रकृति एक ही पैटर्न की ओर इशारा करती है।यह मामला न सिर्फ एक जघन्य अपराध की कहानी है, बल्कि रिश्तों के भीतर छिपे तनाव, भरोसे के टूटने और हिंसा की भयावह परिणति को भी उजागर करता है। वाराणसी की यह घटना लंबे समय तक चर्चा में रही और अब कोर्ट के फैसले के बाद एक बड़ा कानूनी निष्कर्ष सामने आया है।

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