
अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी एसटीएफ और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश संजय उर्फ संजीव के बीच हुई मुठभेड़ ने एक बार फिर प्रदेश में अपराध और पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है। एसटीएफ ने दावा किया कि लंबे समय से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी संजीव मुठभेड़ में मारा गया। उसके खिलाफ हत्या, लूट और संगठित अपराध के कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे और वह पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। वहीं दूसरी ओर, संजीव के परिवार ने पुलिस के दावों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि इस बार उसे झूठा फंसाया गया और वह अपराध नहीं बल्कि प्रॉपर्टी डीलिंग और ट्रांसपोर्ट का काम कर रहा था।अंबेडकरनगर जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र के चककोडार गांव का रहने वाला संजय उर्फ संजीव कभी साधारण युवक था, लेकिन वर्ष 2011 में उसने अपराध की दुनिया में ऐसा कदम रखा कि पीछे मुड़कर नहीं देखा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसने अयोध्या के कुख्यात दिलीप वर्मा गैंग के साथ मिलकर लूट, हत्या और गैंगवार की कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया। अकबरपुर और महरुआ थाना क्षेत्रों में हुई तीन बड़ी घटनाओं के बाद उसका नाम प्रदेश के खूंखार अपराधियों की सूची में शामिल हो गया।बताया जाता है कि संजीव और उसके साथियों ने उस दौर में लगातार ऐसी वारदातों को अंजाम दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। हत्या, लूट और हथियारों के दम पर वसूली जैसे मामलों में उसका नाम सामने आने लगा। पुलिस ने उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लगभग 12 वर्षों तक जेल में रहने के बाद जब वह बाहर आया, तो ऐसा माना जा रहा था कि उसने अपराध की दुनिया से दूरी बना ली है।हालांकि पुलिस का दावा है कि जेल से रिहा होने के कुछ समय बाद ही संजीव ने फिर से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह पुराने नेटवर्क से दोबारा जुड़ गया था और विभिन्न जिलों में अपराध की नई साजिशें रच रहा था। इसी कारण उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया और एसटीएफ लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
पुलिस के अनुसार हाल के दिनों में संजीव अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। वह गांव से ज्यादा समय गोसाईगंज क्षेत्र के वंदनपुर स्थित अपनी ससुराल में बिताता था। इसी दौरान वह प्रॉपर्टी डीलिंग और अन्य कारोबार की आड़ में अपने पुराने संपर्कों को सक्रिय रखे हुए था। एसटीएफ को उसके मूवमेंट की सूचना मिली, जिसके बाद उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान उसने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह मारा गया।लेकिन इस पूरे मामले ने नया मोड़ तब ले लिया, जब संजीव के परिवार ने पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए। पिता हरिराम और भाई राज बब्बर का कहना है कि संजीव ने वर्षों पहले की गलतियों के बाद अपनी जिंदगी बदल ली थी। वह अब परिवार का पालन-पोषण करने के लिए प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहा था और एक चीनी मिल में पगास (गन्ने के अवशेष) की ढुलाई का व्यवसाय भी संभाल रहा था।परिजनों का दावा है कि संजीव पिछले कई दिनों से लापता था। उनका कहना है कि करीब 15 दिन पहले उसका मोबाइल फोन बंद हो गया था और परिवार लगातार उसकी तलाश कर रहा था। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना उसे अपराधी घोषित कर दिया। उनका कहना है कि 21 अप्रैल को वह अपनी बहन रूपा की शादी में शामिल हुआ था और उसके बाद सामान्य जीवन जी रहा था।परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि यदि पुलिस के पास उसके खिलाफ इतने ठोस सबूत थे, तो उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि एनकाउंटर में उसकी मौत कई सवाल छोड़ गई है, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। गांव में भी इस घटना के बाद शोक का माहौल है और परिजन लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संजीव एक घोषित इनामी अपराधी था और उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे उसके आपराधिक इतिहास को साबित करते हैं। पुलिस का दावा है कि उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग की, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अपराधियों का वास्तव में सुधार हो पाता है, या वे फिर से उसी रास्ते पर लौट जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी बहस तेज हो जाती है, खासकर तब जब परिवार पुलिस के दावों को सिरे से खारिज कर देता है।फिलहाल एक बात साफ है कि एक लाख के इनामी संजीव का अध्याय भले ही एसटीएफ एनकाउंटर के साथ खत्म हो गया हो, लेकिन उसके जीवन और मौत से जुड़े कई सवाल अभी भी बाकी हैं। पुलिस अपने रिकॉर्ड और मुकदमों के आधार पर उसे कुख्यात अपराधी बता रही है, जबकि परिवार उसे सुधर चुका इंसान बताकर न्याय की मांग कर रहा है। अब आगे की जांच और आधिकारिक दस्तावेज ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर को स्पष्ट करेंगे।
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