अलवर राजस्थान के अलवर जिले में नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब 24 घंटे तक लगातार चले सघन अभियान, 220 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी मुख्य आरोपी राहुल मीणा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही उसे शरण देने वाले एक सहयोगी को भी पुलिस ने दबोच लिया है। इस कार्रवाई को अलवर पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था, लेकिन विशेष पुलिस टीमों ने तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के जरिए उसके हर मूवमेंट पर नजर रखी। आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कानून के शिकंजे में ले लिया।
- नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म से मचा था हड़कंप
- 24 घंटे चला हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन
- 25 हजार का इनामी निकला टैक्सी चालक
- CCTV और तकनीकी साक्ष्य बने सबसे बड़ा हथियार
- एफएसएल, डॉग स्क्वायड और एमओबी टीम भी हुई सक्रिय
- आईजी ने पीड़िता के परिवार से की मुलाकात
- पूछताछ में खुल सकते हैं कई अहम राज
- कानून के शिकंजे में आरोपी, जांच जारी
नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म से मचा था हड़कंप
यह मामला उस समय सामने आया जब टहला थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की शिकायत दर्ज कराई गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की।पीड़िता के बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज किए गए और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल था और लोगों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की थी।

24 घंटे चला हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के निर्देशन में विशेष अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में राजगढ़ थाना पुलिस, डीएसटी, सदर थाना पुलिस, टहला थाना पुलिस, तकनीकी टीम और विशेष जांच दल को शामिल किया गया।लगातार 24 घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संभावित सभी मार्गों और ठिकानों की निगरानी की। जांच के दौरान 220 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिनसे आरोपी की गतिविधियों के अहम सुराग मिले।पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी लगातार पुलिस से बचने के लिए स्थान बदल रहा था, लेकिन तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी विश्लेषण के कारण उसकी लोकेशन का पता चल गया।

25 हजार का इनामी निकला टैक्सी चालक
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी की पहचान राहुल मीणा, निवासी करनावर, बसवा (दौसा) के रूप में की है। आरोपी पेशे से टैक्सी चालक बताया जा रहा है।पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर पहले ही 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। गिरफ्तारी के समय आरोपी को शरण देने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी को और किन लोगों का सहयोग मिला।
CCTV और तकनीकी साक्ष्य बने सबसे बड़ा हथियार
इस पूरे ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस टीमों ने सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई में डीएसटी के कांस्टेबल मुरारीलाल की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उनकी सूझबूझ और तकनीकी टीम के सहयोग से आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया गया और उसे गिरफ्तार किया गया।
एफएसएल, डॉग स्क्वायड और एमओबी टीम भी हुई सक्रिय
घटना की जांच को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) टीम, एमओबी (मोबाइल ऑपरेशन ब्यूरो) और डॉग स्क्वायड की भी मदद ली।विशेषज्ञ टीमों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। इन साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया।
आईजी ने पीड़िता के परिवार से की मुलाकात
घटना की गंभीरता को देखते हुए जयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राहुल प्रकाश (आईपीएस) ने स्वयं पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।आईजी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्य आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए। इसके बाद गठित टीमों ने अभियान और तेज किया, जिसका परिणाम आरोपी की गिरफ्तारी के रूप में सामने आया।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई अहम राज
फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी और फरारी के दौरान आरोपी को किन लोगों ने मदद पहुंचाई।पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य की संलिप्तता मिली तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
कानून के शिकंजे में आरोपी, जांच जारी
अलवर पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। 220 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक जांच और लगातार 24 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद आरोपी तक पहुंचना पुलिस की प्रभावी जांच का उदाहरण माना जा रहा है।फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।
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