ISRO को बम से उड़ाने की धमकी! हाई अलर्ट, घंटों चला सर्च ऑपरेशन

Editorial
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बेंगलुरु देश की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थाओं में शामिल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मुख्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद गुरुवार को पूरे सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया। एक धमकी भरे ईमेल ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता (BDDS), डॉग स्क्वायड और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। एहतियात के तौर पर मुख्यालय में मौजूद कर्मचारियों को तत्काल बाहर निकाला गया और पूरे परिसर की सघन तलाशी ली गई। हालांकि कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और जांच में यह धमकी फर्जी साबित हुई।हालांकि राहत की बात यह रही कि परिसर पूरी तरह सुरक्षित मिला, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर देश के संवेदनशील वैज्ञानिक और सामरिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और साइबर एजेंसियां अब धमकी भरा ईमेल भेजने वाले की पहचान और उसके मकसद का पता लगाने में जुटी हैं।

ईमेल मिलते ही हाई अलर्ट पर आईं सुरक्षा एजेंसियां

पुलिस के मुताबिक, गुरुवार को ISRO मुख्यालय को एक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। सूचना मिलते ही बेंगलुरु पुलिस ने तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया।कुछ ही देर में पुलिस की कई टीमें, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक एवं बम खोजी दस्ता (BDDS) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और भवन के हर हिस्से की गहन जांच शुरू की गई।घंटों तक चली तलाशी के दौरान प्रत्येक कमरे, कार्यालय, पार्किंग क्षेत्र और संवेदनशील हिस्सों की बारीकी से जांच की गई, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली।

तलाशी के बाद मिली राहत, धमकी निकली फर्जी

तलाशी अभियान पूरा होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और धमकी वाला ईमेल फर्जी था।हालांकि पुलिस ने साफ किया कि इस तरह की धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसलिए हर सूचना पर मानक सुरक्षा प्रक्रिया के तहत व्यापक जांच की जाती है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

साइबर सेल कर रही डिजिटल जांच

बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने बताया कि मामले की जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। साइबर सेल और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां मिलकर ईमेल की डिजिटल जांच कर रही हैं।जांच एजेंसियां ईमेल का आईपी एड्रेस, सर्वर, डिजिटल ट्रेल और भेजने वाले व्यक्ति की पहचान का पता लगाने में जुटी हैं। संजयनगर थाना पुलिस भी मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कुछ दिन पहले भी आया था ऐसा मामला

यह पहला अवसर नहीं है जब देश के महत्वपूर्ण संस्थानों को इस तरह की धमकी मिली हो। इससे पहले 29 जून को कई केंद्रीय संस्थानों और एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को भी बम से उड़ाने की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजे गए थे।उन ईमेल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), ISRO, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय जैसे उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों में बम होने का दावा किया गया था।इन धमकियों के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी संस्थानों की जांच की थी, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक नहीं मिला था।

डिजिटल ट्रेल से आरोपी तक पहुंची दिल्ली पुलिस

इन फर्जी ईमेल मामलों की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।पुलिस ने ईमेल भेजने में इस्तेमाल किए गए दो ईमेल खातों का डिजिटल विश्लेषण किया। जांच के दौरान डिजिटल ट्रेल एक मोबाइल नंबर तक पहुंचा, जिसके आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में रहने वाले निशांत त्यागी नामक 36 वर्षीय व्यक्ति को हिरासत में लिया।पुलिस के अनुसार आरोपी ने ओपन स्कूलिंग के माध्यम से पढ़ाई की थी और बाद में स्नातक में दाखिला लिया, लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं कर सका।

प्रारंभिक जांच में मानसिक बीमारी की जानकारी

पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि संदिग्ध वर्ष 2008 से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करा रहा है। परिवार के सदस्यों ने भी उसके लंबे चिकित्सा इतिहास की जानकारी पुलिस को दी है।जांच के दौरान उसके घर से कोई विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। हालांकि पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ईमेल भेजने के पीछे उसकी मंशा क्या थी और क्या इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

ISRO जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान को मिली धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे धमकी फर्जी ही क्यों न निकले, लेकिन ऐसी घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और संसाधनों का बड़े स्तर पर उपयोग करना पड़ता है।इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां हर धमकी को गंभीरता से लेती हैं और किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बचती हैं।

जांच जारी, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

फिलहाल बेंगलुरु पुलिस, साइबर सेल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां ईमेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।हालांकि इस बार ISRO मुख्यालय पूरी तरह सुरक्षित मिला और धमकी फर्जी साबित हुई, लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के रणनीतिक और वैज्ञानिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले की हर कड़ी जोड़ने में जुटी हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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