फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के चर्चित मासूम आरव हत्याकांड में अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाली इस वारदात पर न्याय की मजबूत मुहर लगा दी। डेढ़ साल के मासूम आरव की 27 सेकंड के भीतर आठ बार सड़क पर पटक-पटककर निर्मम हत्या करने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला एवं सत्र न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का बताते हुए कहा कि आरोपी ने ऐसी बर्बरता दिखाई है, जिसके लिए मृत्युदंड ही उचित दंड है। फैसले के बाद कोर्ट रूम में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए, जबकि सजा सुनते ही आरोपी विराज फूट-फूटकर रो पड़ा।
- 27 सेकंड की हैवानियत, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
- CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत
- शादी से इनकार का बदला मासूम से लिया
- कानूनी सलाह लेने आई थी मां, मौत बनकर पहुंचा आरोपी
- कोर्ट ने कहा— यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोरने वाला
- सजा सुनते ही रो पड़ा विराज
- परिवार ने कहा— आज आरव को मिला न्याय
- पूरे प्रदेश में बना था चर्चा का विषय
- न्यायपालिका का कड़ा संदेश

27 सेकंड की हैवानियत, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
यह मामला 30 मई का है, जब शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में दिनदहाड़े ऐसी दरिंदगी हुई जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। डेढ़ साल का मासूम आरव अपने घर के बाहर खेल रहा था। तभी रिश्ते में लगने वाला उसका चाचा विराज उर्फ जितेंद्र पाठक उसे टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर घर से बाहर ले गया।घर से करीब 50 मीटर दूर सुनसान सड़क पर आरोपी ने जो किया, उसने हर किसी को हिला दिया। महज 27 सेकंड के भीतर उसने मासूम को लगातार आठ बार पक्की सड़क पर पूरी ताकत से पटक दिया। गंभीर चोटों से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपी बच्चे के शव को घर के बाहर फेंककर फरार हो गया।
CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत
इस पूरी वारदात की भयावह तस्वीर पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर तरफ आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठने लगी।वीडियो में दिखाई गई बर्बरता ने पुलिस के लिए भी जांच आसान कर दी। घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी और देर रात मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी थी।
शादी से इनकार का बदला मासूम से लिया
जांच में सामने आया कि आरोपी विराज का इरादा बच्चे की हत्या करना नहीं, बल्कि उसकी मां रति देवी को मानसिक रूप से तोड़ना था।रति की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। पति-पत्नी के बीच विवाद के कारण वह पिछले कई महीनों से मायके में रह रही थी। इसी दौरान सुमित का फुफेरा भाई विराज उसके संपर्क में आया और मदद के बहाने नजदीकियां बढ़ाने लगा।कुछ समय बाद उसने रति के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन रति ने साफ इनकार कर दिया। इसी बात से बौखलाए आरोपी ने बदला लेने के लिए मासूम आरव को अपना निशाना बनाया।
कानूनी सलाह लेने आई थी मां, मौत बनकर पहुंचा आरोपी
30 मई को रति अपनी मां पिंकी देवी के साथ पारिवारिक विवाद के संबंध में कानूनी सलाह लेने शिकोहाबाद आई थी। आरोपी विराज भी वहां पहुंच गया।पहले उसने सामान्य व्यवहार किया और फिर मासूम आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर बाहर ले गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों बाद वह ऐसा खौफनाक अपराध कर देगा, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने कहा— यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोरने वाला
जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने गुरुवार को आरोपी को दोषी ठहराया था। शुक्रवार को सजा पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय और पर्याप्त हैं।अदालत ने माना कि आरोपी ने एक पूरी तरह असहाय, मासूम और निर्दोष बच्चे की नृशंस हत्या की। यह अपराध केवल एक परिवार के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है।इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई।
सजा सुनते ही रो पड़ा विराज
जिस आरोपी ने 27 सेकंड में मासूम की जिंदगी छीन ली, वही अदालत में सजा सुनते ही खुद आंसू बहाने लगा।फैसला सुनाए जाने के बाद विराज की आंखों से लगातार आंसू निकलने लगे। उसके चेहरे पर डर और घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच उसे कोर्ट से वापस जेल ले जाया गया।
परिवार ने कहा— आज आरव को मिला न्याय
फैसले के दौरान मासूम आरव की नानी पिंकी देवी भी अदालत में मौजूद थीं।उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उनकी बेटी ने अपना बेटा खोया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। लेकिन अदालत ने दोषी को सबसे कड़ी सजा देकर न्याय किया है।परिजनों का कहना था कि यह फैसला उन सभी लोगों के लिए संदेश है, जो मासूम बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने की सोचते हैं।
पूरे प्रदेश में बना था चर्चा का विषय
घटना के बाद आरव हत्याकांड पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। CCTV वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में भारी गुस्सा था। हर तरफ आरोपी को फांसी देने की मांग उठ रही थी।पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार किया और रिकॉर्ड समय में जांच पूरी कर अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए।

न्यायपालिका का कड़ा संदेश
इस फैसले को कानून विशेषज्ञ भी बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों में किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।जब अपराध अत्यंत क्रूर, सुनियोजित और समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला हो, तब कानून का सबसे कठोर दंड भी उचित माना जा सकता है।डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। महज 27 सेकंड में आठ बार सड़क पर पटककर एक मासूम की जिंदगी खत्म कर देने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को अब अदालत ने फांसी की सजा सुनाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून के सामने ऐसी हैवानियत के लिए कोई जगह नहीं है। यह फैसला केवल एक आरोपी को सजा देने का नहीं, बल्कि समाज को यह भरोसा दिलाने का भी है कि मासूमों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर न्यायपालिका पूरी सख्ती से कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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