कानपुर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। महाराजपुर थाना क्षेत्र में जहरीले क्रोमियम युक्त औद्योगिक कचरे का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हर दिन नई-नई जगहों पर हरे रंग का संदिग्ध रासायनिक मलबा मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की जांच में एक स्थान पर तय मानक से 757 गुना अधिक क्रोमियम मिलने की पुष्टि हुई है। मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंच चुका है, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
757 गुना अधिक क्रोमियम ने बढ़ाई चिंता
महाराजपुर क्षेत्र के पुरवामीर गांव में मिले औद्योगिक कचरे की जांच रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र को भी चौंका दिया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वहां मिले कचरे में मानक से 757 गुना अधिक क्रोमियम पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक मात्रा में मौजूद क्रोमियम मिट्टी, भूजल, फसलों और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।इस खुलासे के बाद मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंचा, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक न तो जहरीले कचरे को हटाया गया और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई।

चार नई जगहों पर मिला जहरीला हरा मलबा
पुरवामीर में मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को कई अन्य स्थानों की जानकारी दी। जांच में अब तक चार और नई जगहों पर क्रोमियम युक्त संदिग्ध कचरा मिलने की पुष्टि हुई है।
इन स्थानों में शामिल हैं—
- महुआ गांव मोड़
- महोली मोड़ स्थित सिंह ढाबा
- श्री वैष्णव रिजॉर्ट, पुरवामीर
- साइन सिटी गेट और गैस एजेंसी कार्यालय के आसपास का क्षेत्र
इन स्थानों पर हरे रंग का रासायनिक मलबा खुले में पड़ा हुआ मिला, जिससे आसपास के खेतों और आबादी वाले इलाकों में खतरा बढ़ गया है।

रात के अंधेरे में डंपरों से फेंका गया जहरीला कचरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह जहरीला कचरा रात के अंधेरे में डंपरों के जरिए लाकर फेंका गया।सिंह ढाबा के संचालक सरयू सिंह ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले सुबह लगभग चार बजे दो डंपर उनके होटल के पास आए और भारी मात्रा में हरा रासायनिक मलबा डालकर फरार हो गए।उन्होंने बताया कि कचरे से तेज दुर्गंध निकल रही है और बारिश के कारण रसायन खेतों में रिस रहा है, जिससे फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं।
जमीन और भूजल में घुल रहा ‘धीमा ज़हर’
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि क्रोमियम युक्त कचरा यदि लंबे समय तक खुले में पड़ा रहे तो बारिश का पानी उसे जमीन के भीतर पहुंचा देता है। इससे भूजल प्रदूषित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि जिन स्थानों पर यह कचरा डाला गया, वहां पेड़-पौधे धीरे-धीरे सूख गए हैं। कई जगह हरे-भरे पौधे अब ठूंठ बन चुके हैं। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में यह पूरा इलाका पर्यावरणीय संकट का केंद्र बन सकता है।

100 रुपये प्रति ट्रॉली में खरीदा गया था जहरीला मलबा!
ग्रामीणों ने एक और बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि लगभग तीन वर्ष पहले हाईवे किनारे निर्माणाधीन होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भराव सामग्री के रूप में इस औद्योगिक कचरे को करीब 100 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से मंगाया गया था।उस समय किसी को इसकी जहरीली प्रकृति की जानकारी नहीं थी। अब जब वैज्ञानिक जांच में इसके खतरनाक होने की पुष्टि हो चुकी है, तब लोगों को अपनी और आने वाली पीढ़ियों की सेहत की चिंता सताने लगी है।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन केवल निरीक्षण और कागजी कार्रवाई तक सीमित है।रविवार को राजस्व विभाग की टीम और लेखपाल मौके पर पहुंचे, जानकारी जुटाई और स्थिति का जायजा लिया, लेकिन जहरीले कचरे को हटाने या वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बारिश के मौसम में रसायन और तेजी से जमीन के भीतर समा जाएगा।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
डॉक्टरों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक क्रोमियम के संपर्क में रहने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इनमें—
- त्वचा संबंधी रोग
- सांस की समस्याएं
- किडनी और लिवर पर असर
- कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम
- भूजल प्रदूषण के कारण पूरे क्षेत्र की आबादी पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रासायनिक कचरे का निस्तारण केवल वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की मांग—दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
महाराजपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि पूरे इलाके का विस्तृत सर्वे कराया जाए और जहां-जहां भी क्रोमियम युक्त कचरा पड़ा है, उसे तत्काल वैज्ञानिक तरीके से हटाया जाए।साथ ही जहरीला कचरा फेंकने वाले फैक्ट्री संचालकों, परिवहनकर्ताओं और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पर्यावरण संकट पर बड़ा सवाल
कानपुर का यह मामला केवल एक गांव या जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक कचरे के अवैध निस्तारण की गंभीर समस्या को उजागर करता है। यदि समय रहते प्रशासन ने कठोर कदम नहीं उठाए, तो यह जहरीला क्रोमियम आने वाले वर्षों में हजारों लोगों की सेहत, खेती और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय हरित अधिकरण इस गंभीर पर्यावरणीय संकट पर कितनी तेजी और प्रभावी कार्रवाई करते हैं।
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