बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया। स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रही चौथी कक्षा की 11 वर्षीय छात्रा चारु कश्यप तेज बारिश से बचने के लिए सड़क किनारे एक नाले की पटिया पर खड़ी हुई, लेकिन अगले ही पल उसका पैर फिसला और वह उफनते नाले में समा गई। देखते ही देखते मासूम तेज बहाव में बह गई और आसपास मौजूद लोग सिर्फ बेबसी से उसे देखते रह गए। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कुछ ही सेकंड में जिंदगी ने ले लिया दर्दनाक मोड़
जानकारी के अनुसार, चारु कश्यप भूतेश्वर मंदिर के पास स्थित सुशीला इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा चार की छात्रा थी। मंगलवार को स्कूल की छुट्टी होने के बाद वह रोज की तरह अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। सड़क पर पानी भर गया और लोग इधर-उधर बारिश से बचने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने लगे।मासूम चारु भी खुद को बारिश से बचाने के लिए सड़क किनारे बने एक नाले की स्लैब पर जाकर खड़ी हो गई। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अगले कुछ पल उसकी जिंदगी के आखिरी पल साबित होंगे।


पैर फिसला… और नाले में समा गई मासूम
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश के कारण स्लैब बेहद फिसलन भरी हो चुकी थी। जैसे ही चारु ने अपना संतुलन बनाने की कोशिश की, उसका पैर फिसल गया और वह सीधे खुले नाले में जा गिरी।नाले में पानी का बहाव इतना तेज था कि लोगों को संभलने और मदद के लिए दौड़ने का मौका भी नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में बच्ची तेज धार के साथ बह गई। आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मौके पर मचा हड़कंप, लोगों ने लगाई मदद की गुहार
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। किसी ने पुलिस को सूचना दी तो किसी ने फायर ब्रिगेड को फोन किया। देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर भी बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन तेज बहाव और गंदे पानी के कारण किसी को सफलता नहीं मिल सकी।
युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस, नगर पालिका, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। रेस्क्यू टीमों ने नाले के कई हिस्सों में तलाशी अभियान शुरू किया।पानी का तेज बहाव और लगातार हो रही बारिश राहत कार्य में बड़ी चुनौती बनी हुई है। बचाव दल नाले के भीतर और उससे जुड़े ड्रेनेज नेटवर्क की लगातार जांच कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि बच्ची की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जैसे ही घटना की खबर चारु के परिवार तक पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई। माता-पिता बदहवास हालत में घटनास्थल पर पहुंचे और अपनी बेटी का नाम लेकर रोते रहे। परिजनों की हालत देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।जिस बच्ची को सुबह हंसते हुए स्कूल भेजा गया था, शाम तक उसके सुरक्षित लौटने की उम्मीद में पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना करता नजर आया।
खुले नाले फिर बने जानलेवा
यह हादसा एक बार फिर शहरों में खुले नालों और अधूरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बारिश के दौरान अक्सर सड़क और नाले का अंतर दिखाई नहीं देता। कई स्थानों पर नालों की स्लैब टूटी हुई हैं या बिल्कुल खुली हैं, जिससे हर साल ऐसे हादसे सामने आते हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार प्रशासन से नालों को सुरक्षित ढंग से ढकने और मरम्मत कराने की मांग की गई, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बारिश और लापरवाही का खतरनाक मेल
विशेषज्ञों का मानना है कि भारी बारिश के दौरान खुले नाले सबसे बड़ा खतरा बन जाते हैं। तेज बहाव के कारण कोई भी व्यक्ति, खासकर बच्चे, कुछ ही सेकंड में पानी के साथ बह सकते हैं।यही वजह है कि हर मानसून में प्रशासन लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और बच्चों पर विशेष निगरानी रखने की अपील करता है।
इलाके में गुस्सा और सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि नाले पूरी तरह ढके होते या वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो शायद यह हादसा टल सकता था।लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे शहर में खुले नालों का सर्वे कराया जाए और उन्हें सुरक्षित बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों, खुले नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें। बच्चों को अकेले ऐसे रास्तों से न भेजें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या राहत एजेंसियों को सूचना दें।
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