हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में अपहृत और गुमशुदा बच्चों की तलाश में तेजी लाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। पुलिस अधीक्षक ने पहले जारी आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि अपहरण (धारा 137(2)/87 भारतीय न्याय संहिता – BNS) से जुड़े किसी मामले में एक महीने के भीतर अपहृत या गुमशुदा बालक/बालिका की बरामदगी नहीं होती, तो संबंधित विवेचक (Investigating Officer) के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और मामले की जांच संबंधित थाना प्रभारी स्वयं अपने हाथ में लेंगे।इतना ही नहीं, यदि दो महीने के बाद भी पीड़ित की बरामदगी नहीं होती, तो संबंधित क्षेत्राधिकारी (CO) स्वयं विवेचना अपने हाथ में लेकर मामले की निगरानी करेंगे। इस दौरान संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। पुलिस अधीक्षक का यह आदेश जिले में गुमशुदा और अपहृत बच्चों की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- पुराने आदेश में किया गया संशोधन
- एक महीने में बरामदगी नहीं तो विवेचक पर कार्रवाई
- दो महीने बाद क्षेत्राधिकारी संभालेंगे जांच
- संयुक्त टीम करेगी ऑपरेशन
- एक सप्ताह में बरामदगी का लक्ष्य
- जवाबदेही तय करने पर जोर
- बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
- सभी पुलिस अधिकारियों को भेजा गया आदेश
- अपराध नियंत्रण में मिलेगी मजबूती
- जनता में बढ़ेगा भरोसा
- सख्त संदेश
पुराने आदेश में किया गया संशोधन
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी संशोधित आदेश में बताया गया है कि 15 जुलाई 2026 को जारी पूर्व आदेश की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अपहरण और गुमशुदगी से जुड़े कई मामलों में बच्चों की बरामदगी लंबे समय तक नहीं हो पा रही है।समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई मामलों में संबंधित विवेचक द्वारा अपेक्षित स्तर पर प्रभावी प्रयास नहीं किए गए, जिससे मामलों में अनावश्यक देरी हुई और कई बार असहज परिस्थितियां भी उत्पन्न हुईं। इसी स्थिति को देखते हुए अब नई कार्यप्रणाली लागू की गई है।
एक महीने में बरामदगी नहीं तो विवेचक पर कार्रवाई
संशोधित आदेश के अनुसार, यदि अपहरण से संबंधित किसी भी मुकदमे में एक महीने तक अपहृत या गुमशुदा बच्चे की बरामदगी नहीं होती, तो संबंधित विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति भेजी जाएगी।इसके साथ ही उस मुकदमे की विवेचना संबंधित थाना प्रभारी स्वयं अपने स्तर पर करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामलों में केवल औपचारिक जांच न हो, बल्कि वरिष्ठ स्तर पर लगातार निगरानी बनी रहे।
दो महीने बाद क्षेत्राधिकारी संभालेंगे जांच
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि दो महीने बाद भी अपहृत या गुमशुदा बच्चे की बरामदगी नहीं होती, तो संबंधित क्षेत्राधिकारी (CO) स्वयं उस मुकदमे की विवेचना अपने हाथ में ले लेंगे।साथ ही संबंधित विवेचक और थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
संयुक्त टीम करेगी ऑपरेशन
पुलिस अधीक्षक ने आदेश में यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में संबंधित अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) के नेतृत्व में विशेष संयुक्त टीम गठित की जाएगी।
इस टीम में शामिल होंगे—
- अनुभवी विवेचक
- कुशल पुलिसकर्मी
- सर्विलांस टीम
- स्वाट (SWAT) टीम
यह संयुक्त टीम अपर पुलिस अधीक्षक के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन में कार्य करेगी।
एक सप्ताह में बरामदगी का लक्ष्य
नई व्यवस्था के तहत संयुक्त टीम को निर्देश दिया गया है कि वह एक सप्ताह के भीतर अपहृत या गुमशुदा बालक/बालिका की सकुशल बरामदगी सुनिश्चित करने का हरसंभव प्रयास करेगी।इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए विवेचना का विधिक निस्तारण किया जाएगा।
जवाबदेही तय करने पर जोर
पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा का यह आदेश केवल जांच की गति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस अधिकारियों और विवेचकों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अब किसी भी अपहरण या गुमशुदगी के मामले में लंबी देरी होने पर सीधे जिम्मेदार अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि अपहरण और गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती घंटे और शुरुआती दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तत्काल कार्रवाई की जाए तो बच्चों की सुरक्षित बरामदगी की संभावना काफी बढ़ जाती है।इसी कारण हरदोई पुलिस ने समयबद्ध कार्रवाई का मॉडल अपनाया है, ताकि किसी भी मामले में अनावश्यक देरी न हो।

सभी पुलिस अधिकारियों को भेजा गया आदेश
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी इस संशोधित आदेश की प्रतिलिपि निम्न अधिकारियों को भेजी गई है—
- अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी एवं पश्चिमी)
- सभी क्षेत्राधिकारी (CO)
- सभी प्रभारी निरीक्षक
- सभी थानाध्यक्ष
- प्रभारी डीसीआरबी
- प्रभारी एएचटी थाना
सभी अधिकारियों को आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अपराध नियंत्रण में मिलेगी मजबूती
कानून व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि इस आदेश का प्रभावी तरीके से पालन किया गया तो अपहरण और गुमशुदगी के मामलों में जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी।वरिष्ठ अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी से मामलों के जल्द खुलासे की संभावना बढ़ेगी और पुलिस की जवाबदेही भी पहले से अधिक मजबूत होगी।
जनता में बढ़ेगा भरोसा
गुमशुदा बच्चों के मामलों में अक्सर परिजन पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर शिकायत करते रहे हैं। ऐसे में यह नया आदेश पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई होती है, तो पीड़ित परिवारों को जल्द राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी और अपराधियों के खिलाफ भी त्वरित कानूनी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
सख्त संदेश
हरदोई पुलिस अधीक्षक का यह संशोधित आदेश साफ संदेश देता है कि अब अपहृत और गुमशुदा बच्चों के मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। समयबद्ध जांच, अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही, संयुक्त विशेष टीम और वरिष्ठ स्तर की निगरानी के जरिए पुलिस ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई का नया मॉडल लागू किया है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो जिले में गुमशुदा और अपहृत बच्चों की बरामदगी की दर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
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