5 साल में दूसरी बार टूटी अंडरपास की स्लैब! एडीएम की जांच, इंजीनियरों से जवाब-तलब

Editorial
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कालपी (जालौन) उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद के कालपी नगर स्थित फुलपावर चौराहे के हाईवे ओवरब्रिज अंडरपास में छत की स्लैब दूसरी बार गिरने की घटना ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महीने के भीतर दूसरी बार स्लैब गिरने से प्रशासन हरकत में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने गुरुवार को मौके का निरीक्षण किया। जांच टीम का नेतृत्व अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) प्रेमचंद मौर्य ने किया। टीम ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और इंजीनियरों से घटना के कारणों पर जवाब-तलब किया और क्षतिग्रस्त हिस्से की जल्द मरम्मत कर यातायात सामान्य करने के निर्देश दिए।घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि स्लैब गिरने के समय अंडरपास से कोई वाहन या राहगीर गुजर रहा होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। लगातार दूसरी बार स्लैब गिरने से निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।

एक महीने में दूसरी बार गिरी स्लैब

फुलपावर चौराहे का यह अंडरपास शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लेकिन पिछले एक महीने के भीतर दूसरी बार छत की स्लैब टूटकर गिरने से लोगों में दहशत का माहौल है।घटना के बाद एहतियातन अंडरपास पर यातायात रोक दिया गया, जिससे लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। इससे शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

डीएम ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति

घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दिए। इसके लिए अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) प्रेमचंद मौर्य के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई।समिति को निर्देश दिए गए कि घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और यह भी पता लगाया जाए कि निर्माण कार्य में कहीं तकनीकी लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।

मौके पर पहुंची जांच टीम

गुरुवार को जांच समिति ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य, तहसीलदार अभिनव कुमार तिवारी तथा लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग की कार्यदायी संस्था की ओर से मुख्य प्रबंधक उत्तम सिंह और इंजीनियर इरफान सिद्दीकी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त स्लैब, निर्माण सामग्री और मरम्मत कार्य की स्थिति का निरीक्षण किया।

इंजीनियरों से मांगा जवाब

निरीक्षण के दौरान जांच समिति ने कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों से पूछा कि आखिर एक महीने में दूसरी बार स्लैब गिरने की नौबत क्यों आई और इसे कब तक ठीक किया जाएगा।मुख्य प्रबंधक उत्तम सिंह ने समिति को बताया कि मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है और चार से पांच दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त हिस्से को पूरी तरह ठीक कर अंडरपास को फिर से यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

पांच साल पुराने निर्माण पर सवाल

निरीक्षण के दौरान जांच समिति ने यह भी सवाल उठाया कि महज पांच वर्ष पुराने अंडरपास की छत आखिर इतनी जल्दी कैसे क्षतिग्रस्त हो गई।इस पर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने कहा कि मूल निर्माण कार्य किसी पूर्व कार्यदायी संस्था द्वारा कराया गया था। हालांकि जांच समिति ने इस जवाब पर संतोष व्यक्त नहीं किया और पूरे निर्माण रिकॉर्ड तथा तकनीकी दस्तावेजों की समीक्षा के निर्देश दिए।

अन्य अंडरपासों की भी होगी जांच

जांच समिति ने केवल इस अंडरपास तक ही जांच सीमित नहीं रखी। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि जिले के अन्य अंडरपासों की भी तकनीकी जांच कराई जाए ताकि यदि कहीं कोई संरचनात्मक कमजोरी हो तो समय रहते उसे दूर किया जा सके।प्रशासन का मानना है कि समय रहते जांच होने से भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सकता है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

लगातार दूसरी बार स्लैब गिरने की घटना से स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पांच साल में ही पुल की स्थिति खराब हो रही है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, इंजीनियर या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

यातायात पर पड़ा असर

अंडरपास बंद होने के कारण आसपास के मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यातायात बाधित होने से उनके कारोबार पर भी असर पड़ा है।इसी कारण प्रशासन ने कार्यदायी संस्था को मरम्मत कार्य में तेजी लाने और तय समय के भीतर अंडरपास चालू करने के निर्देश दिए हैं।

तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार

अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि स्लैब गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या था—निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिज़ाइन की खामी, रखरखाव में लापरवाही या कोई अन्य तकनीकी कारण।यदि जांच में निर्माण कार्य में गड़बड़ी या जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश

अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) प्रेमचंद मौर्य ने कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि मरम्मत कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।कालपी के फुलपावर चौराहे स्थित अंडरपास में बार-बार स्लैब गिरने की घटना ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और मरम्मत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। अब लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि यह महज तकनीकी खामी थी या निर्माण कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। यदि दोष तय होते हैं तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों पर कार्रवाई इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम होगी।

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