रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में गंगा किनारे बसे गांवों को कटान से बचाने के लिए करीब 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई गई कटानरोधी परियोजना अब गंभीर विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग और ठेकेदार पर करोड़ों रुपये की परियोजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। आरोप है कि जहां परियोजना में मजबूत जिओ बैग, पार्कूपाइन और स्टड लगाए जाने थे, वहां अधिकांश स्थानों पर सीमेंट की खाली बोरियों में मिट्टी भरकर काम पूरा कर दिया गया। परिणाम यह हुआ कि गंगा का जलस्तर बढ़ते ही कथित रूप से अधिकांश संरचनाएं बह गईं और गांवों पर एक बार फिर कटान का खतरा मंडराने लगा।मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। फर्रुखाबाद विकास मंच ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार तहसील सदर क्षेत्र के पंखियों की मढ़ैया, दिलीप की मढ़ैया, कटरी भीमपुर सहित गंगा किनारे बसे कई गांवों को हर साल होने वाले कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने करोड़ों रुपये की परियोजना स्वीकृत की थी। योजना के तहत नदी किनारे मजबूत कटानरोधी संरचनाएं तैयार की जानी थीं ताकि ग्रामीणों के मकान, खेत और सड़कें सुरक्षित रह सकें।लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही गुणवत्ता से समझौता किया गया और परियोजना को केवल कागजों पर मजबूत दिखाने का प्रयास किया गया।
जिओ बैग की जगह सीमेंट की बोरियां लगाने का आरोप
ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि परियोजना में उपयोग होने वाले महंगे और मजबूत जिओ बैग की जगह अधिकांश स्थानों पर सीमेंट की खाली बोरियों में मिट्टी भरकर लगा दिया गया। केवल ऊपरी हिस्से में कुछ जिओ बैग रख दिए गए ताकि निरीक्षण के दौरान काम सही दिखाई दे।ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही गंगा का जलस्तर बढ़ा, ये बोरियां पानी के तेज बहाव में बह गईं। इससे कटान रोकने के लिए बनाई गई पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ गई और गांवों के सामने फिर वही संकट खड़ा हो गया।
“गंगा आई और करोड़ों का काम बह गया”
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, वह पहली बड़ी जलधारा का सामना भी नहीं कर सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि गुणवत्ता के अनुरूप कार्य हुआ होता तो इतनी जल्दी संरचनाएं क्षतिग्रस्त नहीं होतीं।लोगों का कहना है कि अब उनके खेत, मकान और आबादी वाले इलाके फिर से गंगा की कटान की जद में आ गए हैं।
विरोध करने पर धमकाने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए तो ठेकेदार और उसके सहयोगियों ने उन्हें सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने और जेल भेजने की धमकी दी।ग्रामीणों का कहना है कि डर और दबाव के कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर सके और कथित रूप से घटिया निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया।कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार के लोगों ने यहां तक कहा—
“एक बार पानी आ जाए, हमारा काम खत्म… बाद में तुम्हें जो करना हो कर लेना, हमारा कुछ नहीं होगा।”इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
फर्रुखाबाद विकास मंच ने खोला मोर्चा
मामले की जानकारी मिलने के बाद फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ कटानरोधी कार्य का निरीक्षण किया।निरीक्षण के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना में बड़े स्तर पर अनियमितता की गई है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया है।

शीशम के पेड़ काटने का भी आरोप
ग्रामीणों और विकास मंच ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कटान रोकने के नाम पर गौशाला की भूमि पर खड़े प्रतिबंधित शीशम के पेड़ों को बिना अनुमति काट दिया गया और उनकी डालियों को बोरियों के आगे लगा दिया गया।यदि यह आरोप सही साबित होता है तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन संरक्षण कानूनों के उल्लंघन का भी बन सकता है।
डीएम से शिकायत की तैयारी
फर्रुखाबाद विकास मंच ने घोषणा की है कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की लिखित शिकायत देगा।मंच ने मांग की है कि परियोजना की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो तथा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जवाबदेही तय की जाए।

आंदोलन की चेतावनी
भईयन मिश्रा ने साफ कहा कि यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो फर्रुखाबाद विकास मंच अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन शुरू करेगा।उन्होंने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि हजारों ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा विषय है।
ग्रामीणों में डर का माहौल
ग्रामीण राजीव वर्मा, रामू राजपूत, रामलखन वर्मा, पंकज राठौर और सत्यनारायण शाक्य सहित कई लोगों का कहना है कि अब उनके घर और खेत फिर से गंगा की कटान के खतरे में हैं।उनका कहना है कि यदि समय रहते मजबूत कटानरोधी व्यवस्था नहीं बनाई गई तो बरसात के दौरान कई गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। लोग अपने घरों और खेती की जमीन को लेकर चिंतित हैं।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य में वास्तव में अनियमितता हुई या नहीं।हालांकि ग्रामीणों के गंभीर आरोपों और मौके की स्थिति ने करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण पर बड़ा सवाल बन सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच से वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल गंगा किनारे बसे गांवों के लोग अपने घरों और खेतों को बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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