रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद नवाबगंज थाना क्षेत्र में हुई एक जेबकतरी की घटना अब केवल चोरी का मामला नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक किसान ने आरोप लगाया है कि घटना वाले दिन ही उसने थाने में लिखित तहरीर दे दी थी, लेकिन बाद में पुलिस ने अपने उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में यह उल्लेख कर दिया कि “कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।” इस विरोधाभास ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है और थाना नवाबगंज पुलिस पर लीपापोती के आरोप लगने लगे हैं।जानकारी के मुताबिक थाना नवाबगंज क्षेत्र के गांव कक्युली निवासी किसान राकेश गुरुवार सुबह करीब 11 बजे किसी काम से नवाबगंज बाजार पहुंचे थे। वह नवाबगंज तिराहा स्थित एक गल्ला आढ़त के पास खड़े थे। इसी दौरान बाइक पर सवार दो युवक उनके पास आए और रास्ता पूछने के बहाने बातचीत शुरू कर दी। आरोप है कि बातचीत के दौरान दोनों युवकों ने विश्वास में लेकर राकेश को अपनी बाइक पर बैठा लिया। कुछ दूरी तक ले जाने के बाद उन्होंने राकेश को उतार दिया और मौके से निकल गए।

राकेश के मुताबिक जैसे ही उन्होंने अपनी जेब पर हाथ रखा तो उनके होश उड़ गए। उनकी जेब फटी हुई थी और उसमें रखे 20,400 रुपये गायब थे। उन्हें समझते देर नहीं लगी कि वे जेबकतरों का शिकार हो चुके हैं। घटना की सूचना मिलते ही आसपास लोगों की भीड़ जुट गई, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे।पीड़ित किसान का दावा है कि घटना के तुरंत बाद वह थाना नवाबगंज पहुंचे और पूरी घटना की लिखित तहरीर पुलिस को सौंप दी। लेकिन कुछ दिनों बाद जब उन्हें पता चला कि पुलिस ने उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में यह लिख दिया कि “पीड़ित की ओर से कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई”, तो वह हैरान रह गए। यही विरोधाभास अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
राकेश का आरोप है कि पुलिस ने न केवल उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, बल्कि आरोपियों की तलाश के लिए भी अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि पुलिस के भरोसे बैठने के बजाय अब उन्हें खुद बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ रही है, ताकि आरोपियों की पहचान हो सके। उनका कहना है कि यदि घटना के तुरंत बाद पुलिस सक्रिय होती और आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगालती, तो आरोपियों तक पहुंचना आसान हो सकता था।इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि नवाबगंज क्षेत्र में जेबकतरी, ठगी और छोटी-बड़ी आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि समय पर कार्रवाई न होने से बदमाशों के हौसले बुलंद हैं और आम लोगों में असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।

ग्रामीणों और व्यापारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि पीड़ित ने घटना वाले दिन ही तहरीर दी थी और उसके बावजूद गलत रिपोर्ट भेजी गई, तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल यह मामला जेबकतरी से आगे बढ़कर पुलिस की जवाबदेही का विषय बन गया है। एक ओर पीड़ित किसान अपने साथ हुई घटना को लेकर न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की रिपोर्ट और पीड़ित के दावे के बीच का विरोधाभास कई सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उच्चाधिकारी इस मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं और पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है।
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