रिपोर्ट:मो अरशद
मुरादाबाद उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “एक परिवार-एक पहचान” (फैमिली आईडी) योजना को जन-जन तक पहुंचाने और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के उद्देश्य से मुरादाबाद में प्रशासन ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) मृणाली अविनाश जोशी की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में फैमिली आईडी बनाने की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई, जहां अपेक्षित गति न मिलने पर सीडीओ ने कई विभागों के अधिकारियों पर नाराजगी जताई और स्पष्ट चेतावनी दी कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि फैमिली आईडी केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पारदर्शी और सरल तरीके से पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम है। इसलिए सभी संबंधित विभाग पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें तथा निर्धारित समय के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना सुनिश्चित करें।
80 प्रतिशत लक्ष्य पूरा, अभी 30 हजार से अधिक परिवार बाकी
समीक्षा के दौरान बताया गया कि शासन स्तर से मुरादाबाद जनपद के लिए 1,47,892 फैमिली आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष अब तक 1,17,337 परिवारों की फैमिली आईडी तैयार की जा चुकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत है।हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने माना कि अभी भी 30 हजार से अधिक परिवारों की फैमिली आईडी बननी शेष है। इस पर सीडीओ ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि शेष कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और किसी भी पात्र परिवार को योजना से वंचित न रहने दिया जाए।उन्होंने कहा कि जिन विभागों की प्रगति अपेक्षा से कम है, वे तत्काल अपनी कार्ययोजना तैयार करें और रोजाना प्रगति की समीक्षा करते हुए लक्ष्य पूरा करें।

धीमी प्रगति वाले विभागों पर जताई नाराजगी
बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। समीक्षा के दौरान जिन विभागों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया, उनके अधिकारियों को मुख्य विकास अधिकारी ने फटकार लगाई।उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में ढिलाई किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करें और क्षेत्र स्तर पर अभियान चलाकर फैमिली आईडी बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।सीडीओ ने कहा कि सभी खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी और संबंधित विभाग आपसी समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य पूरा किया जा सके।
क्या है फैमिली आईडी योजना?
बैठक के दौरान अधिकारियों को फैमिली आईडी योजना की उपयोगिता और महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।फैमिली आईडी योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करना है, जिससे सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सही और पात्र व्यक्तियों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।इस व्यवस्था से अलग-अलग विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता कम होगी और लाभार्थियों की जानकारी एकीकृत रूप से उपलब्ध रहेगी।

फैमिली आईडी पासबुक बनेगी ‘वन स्टॉप प्लेटफॉर्म’
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि फैमिली आईडी पासबुक को लाभार्थियों के लिए ‘वन स्टॉप प्लेटफॉर्म’ के रूप में विकसित किया गया है।इस पासबुक के माध्यम से परिवार अपने नाम से मिलने वाली सभी सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर देख सकेगा।
इसमें लाभार्थी यह भी जान सकेगा कि—
- उसे कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
- किस योजना का लाभ कब मिला।
- लाभ की राशि कब हस्तांतरित हुई।
- भविष्य में वह किन योजनाओं का पात्र हो सकता है।
इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
पात्र परिवारों को स्वतः मिलेगी योजनाओं की जानकारी
फैमिली आईडी प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि कोई परिवार किसी योजना के लिए पात्र है लेकिन उसने अभी तक आवेदन नहीं किया है, तो भी उसके रिकॉर्ड के आधार पर उसे संभावित पात्रता की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।इससे सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी और किसी भी पात्र परिवार के छूटने की संभावना कम होगी।
डेटा की पारदर्शिता पर विशेष जोर
बैठक में बताया गया कि फैमिली आईडी के माध्यम से लाभार्थियों का प्रमाणित डेटा तैयार होगा, जिससे योजनाओं में फर्जीवाड़े और दोहराव की संभावना भी कम होगी।योजना के तहत लाभ हस्तांतरण की प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और शासन स्तर पर निगरानी करना भी आसान होगा।मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आंकड़ों का सत्यापन पूरी सावधानी से किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि न रहे।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अभियान तेज करने के निर्देश
सीडीओ ने कहा कि जिन परिवारों की अभी तक फैमिली आईडी नहीं बनी है, उन्हें चिन्हित कर विशेष अभियान चलाया जाए।उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विकास खंड कार्यालयों तथा अन्य संबंधित विभागों के माध्यम से लोगों को योजना के प्रति जागरूक किया जाए और शिविर लगाकर पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पात्र परिवार को जानकारी के अभाव में योजना से वंचित नहीं रहना चाहिए।
रोजाना होगी प्रगति की समीक्षा
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अब फैमिली आईडी निर्माण की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।जो विभाग लक्ष्य के अनुरूप कार्य करेंगे, उनकी सराहना की जाएगी, जबकि लगातार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में समयबद्ध कार्य और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है।
ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में परियोजना निदेशक (डीआरडीए) श्वेतांक पाण्डेय, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी प्रमोद कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) आलोक शर्मा, सभी खंड विकास अधिकारी तथा विभिन्न नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक के अंत में मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी ने सभी अधिकारियों से समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि फैमिली आईडी योजना सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी, सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि शेष 30 हजार से अधिक परिवारों की फैमिली आईडी जल्द से जल्द तैयार कर लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
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