LDA में रिश्वतखोरी का बड़ा भंडाफोड़: 7.50 लाख की घूस लेते अवर अभियंता समेत तीन रंगे हाथ गिरफ्तार, विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई से मचा हड़कंप

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने शनिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक अवर अभियंता, सुपरवाइजर और एक निजी व्यक्ति को 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने एलडीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि भवन निर्माण कार्य रुकवाने और कार्रवाई का डर दिखाकर शिकायतकर्ता से 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने सुनियोजित ट्रैप बिछाया और रिश्वत लेते ही तीनों आरोपियों को मौके से दबोच लिया।यह कार्रवाई राजधानी में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे चर्चित विजिलेंस कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। मामले के सामने आने के बाद सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है।

भवन निर्माण को बनाया वसूली का जरिया

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता लखनऊ में अपना भवन निर्माण करा रहा था। इसी दौरान एलडीए के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवाने की चेतावनी दी।कुछ समय बाद एक निजी व्यक्ति श्रवण कुमार ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया और दावा किया कि उसके खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज है। उसने कहा कि यदि कार्रवाई से बचना है तो 15 लाख रुपये देने होंगे, अन्यथा निर्माण कार्य ध्वस्त करा दिया जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी होगी।शिकायतकर्ता ने पहले इसे सामान्य दबाव समझा, लेकिन जब एलडीए कार्यालय में बुलाकर वही मांग दोबारा दोहराई गई, तब उसे पूरे मामले में भ्रष्टाचार की बू आने लगी।

एलडीए कार्यालय में दोहराई गई रिश्वत की मांग

शिकायतकर्ता के अनुसार, एलडीए कार्यालय पहुंचने पर अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश ने भी 15 लाख रुपये की मांग की पुष्टि की।आरोपियों ने साफ कहा कि यदि तय रकम नहीं दी गई तो भवन निर्माण रुकवा दिया जाएगा और विभागीय कार्रवाई भी कराई जाएगी।इतनी बड़ी रकम एक साथ देना संभव न होने पर शिकायतकर्ता ने दो किस्तों में भुगतान करने की बात कही। पहली किस्त 7.50 लाख रुपये देने की सहमति बनी।लेकिन रिश्वत देने के बजाय शिकायतकर्ता ने साहस दिखाते हुए पूरे मामले की सूचना उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को दे दी।

विजिलेंस ने बिछाया जाल, रिश्वत लेते ही दबोचे गए आरोपी

शिकायत मिलते ही सतर्कता अधिष्ठान की टीम हरकत में आ गई। अधिकारियों ने पहले पूरे मामले की गोपनीय जांच कराई।जांच के दौरान सामने आया कि शिकायत केवल आरोप नहीं थी, बल्कि एलडीए के अधिकारियों और निजी व्यक्ति के बीच मिलीभगत के पर्याप्त संकेत मिले।इसके बाद विजिलेंस ने पूरी योजना के तहत ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया।शनिवार को जैसे ही शिकायतकर्ता पहली किस्त के रूप में 7.50 लाख रुपये लेकर आरोपियों के पास पहुंचा और रकम सौंपी, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने तत्काल छापा मारकर तीनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

रिश्वत की पूरी रकम बरामद

विजिलेंस अधिकारियों ने मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में—

  • दिनेश कुमार वर्मा — अवर अभियंता, लखनऊ विकास प्राधिकरण
  • चंद्र प्रकाश — सुपरवाइजर, एलडीए
  • श्रवण कुमार — निजी व्यक्ति

शामिल हैं।पूछताछ के दौरान तीनों से रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित मामलों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है।

आईजीआरएस पोर्टल के दुरुपयोग का आरोप

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि कथित तौर पर आईजीआरएस पोर्टल का इस्तेमाल रिश्वत वसूलने के दबाव के लिए किया गया।आरोप है कि शिकायत का हवाला देकर भवन स्वामी को डराया गया और कार्रवाई रोकने के नाम पर मोटी रकम की मांग की गई।यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह केवल रिश्वतखोरी नहीं, बल्कि सरकारी शिकायत प्रणाली के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जाएगा।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मुकदमा

सतर्कता अधिष्ठान ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरह अन्य लोगों से रिश्वत वसूली थी।उनकी संपत्ति, बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।

एलडीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना ने लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।लोगों का कहना है कि भवन निर्माण से जुड़े मामलों में अक्सर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं।यदि सरकारी अधिकारी नियमों का पालन कराने के बजाय उन्हें रिश्वत कमाने का माध्यम बना लें, तो आम नागरिक का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्ती जारी

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का दावा करती रही है।पिछले कुछ वर्षों में विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियों ने विभिन्न विभागों में कई ट्रैप कार्रवाई कर रिश्वतखोर अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।इस कार्रवाई को भी उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई कर दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया गया।

जनता को मिला बड़ा संदेश

इस कार्रवाई ने आम लोगों को यह संदेश भी दिया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत संबंधित एजेंसियों से की जा सकती है।विजिलेंस की समयबद्ध कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि शिकायतकर्ता यदि साहस दिखाए तो भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव है।लखनऊ विकास प्राधिकरण में 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए अवर अभियंता, सुपरवाइजर और एक निजी व्यक्ति की गिरफ्तारी केवल एक ट्रैप कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार है। भवन निर्माण के नाम पर 15 लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगना, आईजीआरएस जैसी शिकायत प्रणाली का दबाव बनाने के लिए उपयोग करना और फिर विजिलेंस के जाल में रंगे हाथ पकड़े जाना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच आगे किन नए खुलासों तक पहुंचती है और क्या इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों पर भी कानून का शिकंजा कसता है।

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