रिपोर्ट : धर्मेन्द्र सिंह
अयोध्या पूर्व सांसद एवं भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को न्यायालय से राहत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के अयोध्या सहित कई स्थानों पर उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। फैसले के बाद समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, एक-दूसरे को बधाई दी और भारतीय न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया। समर्थकों का कहना है कि अदालत के निर्णय ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत की न्याय व्यवस्था संविधान और कानून के अनुरूप निष्पक्ष ढंग से कार्य करती है।समर्थकों ने कहा कि न्यायालय का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है और किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि न्यायालय के फैसलों का सम्मान करें और किसी भी मामले में बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष निकालने से बचें।
फैसले के बाद समर्थकों में जश्न
अयोध्या में न्यायालय के निर्णय की जानकारी मिलते ही बृजभूषण शरण सिंह के समर्थक एकत्र होने लगे। कई स्थानों पर मिठाइयां बांटी गईं और समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई दी। समर्थकों का कहना था कि उन्हें न्यायपालिका पर पहले से ही पूरा विश्वास था और अदालत के फैसले ने उस विश्वास को और मजबूत किया है।इस दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है और हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार संविधान ने दिया है। उनका कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

भारतीय न्यायपालिका पर जताया भरोसा
समर्थकों ने कहा कि भारत की न्यायपालिका दुनिया की सबसे मजबूत और विश्वसनीय न्याय व्यवस्थाओं में गिनी जाती है। अदालतें तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर निर्णय देती हैं, इसलिए हर नागरिक को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में आरोप लगना और अदालत द्वारा अंतिम निर्णय दिया जाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए जब तक न्यायालय का अंतिम फैसला न आ जाए, तब तक किसी भी व्यक्ति के बारे में पूर्वाग्रह बनाना उचित नहीं है।
“सत्यमेव जयते” की भावना का किया उल्लेख
समर्थकों ने अपने वक्तव्य में कहा कि “सत्यमेव जयते” केवल भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की मूल भावना भी है। उनका कहना था कि जब न्यायालय निष्पक्ष तरीके से अपना निर्णय देता है तो समाज में कानून और संविधान के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होता है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती का आधार स्वतंत्र न्यायपालिका है और प्रत्येक नागरिक को उसके निर्णयों का सम्मान करना चाहिए।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
समर्थकों ने लोगों से अपील की कि वे न्यायालय के निर्णय के बाद किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि समाज में शांति, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कानूनी मामले में न्यायालय का फैसला ही अंतिम और सर्वोपरि माना जाता है। इसलिए सभी नागरिकों को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।
न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान की बात
समर्थकों का कहना था कि भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार देता है। किसी भी व्यक्ति पर लगे आरोपों का परीक्षण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। ऐसे में अदालत के निर्णय का सम्मान करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है।उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के बारे में अंतिम राय बनाने से पहले न्यायालय की पूरी प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए।
भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश
इस अवसर पर समर्थकों ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि समाज में सत्य, न्याय और सद्भाव की भावना हमेशा बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति को बिना पर्याप्त तथ्यों और साक्ष्यों के अनावश्यक विवादों का सामना न करना पड़े।उनका कहना था कि कानून का शासन ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान है और सभी नागरिकों को संविधान तथा न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका
समर्थकों ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। निष्पक्ष न्याय व्यवस्था ही संविधान की गरिमा और लोकतंत्र की मजबूती का आधार है।उन्होंने कहा कि अदालतें किसी भी मामले में राजनीतिक या सामाजिक दबाव से ऊपर उठकर केवल कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देती हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को न्यायालय से राहत मिलने के बाद उनके समर्थकों ने खुशी व्यक्त करते हुए भारतीय न्यायपालिका पर अपना विश्वास दोहराया। अयोध्या में समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत किया और कहा कि न्यायालय के निर्णयों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
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