UP Vidhansabha Session 2026: सीएम योगी ने आलम बदी समेत 21 पूर्व विधायकों को दी श्रद्धांजलि, बोले- जनसेवा में उम्र नहीं, समर्पण मायने रखता है

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन सदन का माहौल भावुक रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान विधानसभा के वरिष्ठ सदस्य और समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक आलम बदी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा के 21 पूर्व सदस्यों को भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आलम बदी का लंबा सार्वजनिक जीवन, उनकी सादगी, जनसेवा के प्रति समर्पण और राजनीतिक सक्रियता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी।मानसून सत्र की शुरुआत शोक प्रस्ताव से हुई, जिसमें सदन ने दिवंगत नेताओं के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज और प्रदेश के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

आलम बदी के निधन पर व्यक्त किया गहरा शोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का 23 जुलाई को निधन हो गया था। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और 90 वर्ष से अधिक आयु के थे। वर्तमान विधानसभा में वे सबसे वरिष्ठ और सबसे वयोवृद्ध सदस्य थे।सीएम ने कहा कि आलम बदी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करे तो उम्र कभी भी उसकी सक्रियता में बाधा नहीं बनती। उन्होंने कहा कि आलम बदी अंतिम समय तक अपने क्षेत्र और जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर रहे।

पांच बार विधायक चुने गए थे आलम बदी

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि आलम बदी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ जिले के बिंदवल गांव में हुआ था। उन्होंने पहली बार वर्ष 1996 के मध्यावधि विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी निजामाबाद विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए।लगातार जनता का विश्वास जीतना इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में जनसेवा को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी होता है।

सादगी और बेदाग छवि के लिए थे प्रसिद्ध

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आलम बदी अपनी सादगी, विनम्रता और साफ-सुथरी राजनीतिक छवि के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में गरीबों, वंचितों और जरूरतमंद लोगों की आवाज बुलंद की।उन्होंने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक विकास और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर सदन में कई बार प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी। यही कारण था कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच भी उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था।

विधानसभा की कई समितियों में निभाई जिम्मेदारी

आलम बदी विधानसभा की विभिन्न समितियों के सदस्य रहे। वर्तमान विधानसभा में वे आचार समिति के सदस्य भी थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने और संसदीय परंपराओं के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने कहा कि वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का अनुभव लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है और आलम बदी इसका उत्कृष्ट उदाहरण थे।

21 पूर्व सदस्यों को भी दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में विधानसभा के 21 पूर्व सदस्यों के निधन पर भी गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने समय में प्रदेश के विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।मुख्यमंत्री ने जिन पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की, उनमें राजेंद्र त्रिपाठी, भोला पांडेय, अमिताभ लवानिया, सुब्बाराम, जगन्नाथ चौधरी, रामप्यारे आजाद, गोपीनाथ वर्मा, यशपाल सिंह, राधेश्याम भारती, संग्राम सिंह, हरिनारायण राजभर, डॉ. भगवत दयाल, अरुण कुमार सिंह ‘मुन्ना’, ओमवती देवी, मोहर सिंह, अफसर यू. अहमद, तेजभान सिंह, रुद्र प्रताप सिंह, प्यारेलाल शंखवार, ओमकार सिंह और हनुमंत सिंह शामिल रहे।उन्होंने सभी दिवंगत नेताओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

सदन में भावुक रहा माहौल

श्रद्धांजलि प्रस्ताव के दौरान सदन का वातावरण गंभीर और भावुक रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने दिवंगत नेताओं के योगदान को याद किया और उनके सम्मान में मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन समाज और प्रदेश के विकास के लिए काम करने वाले जनप्रतिनिधियों का सम्मान सभी का दायित्व है।

जनसेवा ही सबसे बड़ी पहचान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि की असली पहचान उसके पद से नहीं बल्कि जनता के प्रति उसकी निष्ठा और सेवा भावना से होती है। उन्होंने कहा कि आलम बदी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में इसी सिद्धांत का पालन किया।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को हमेशा जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती जनता के विश्वास पर ही आधारित होती है।

मानसून सत्र की हुई औपचारिक शुरुआत

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की औपचारिक शुरुआत हुई। आगामी दिनों में सदन में अनुपूरक बजट, विभिन्न विधेयकों और प्रदेश के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष भी सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विकास कार्यों और योजनाओं को सदन में प्रस्तुत करेगी।उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ सपा विधायक आलम बदी सहित विधानसभा के 21 पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि देकर लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया। उन्होंने आलम बदी के लंबे सार्वजनिक जीवन, जनसेवा, सादगी और राजनीतिक सक्रियता को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि के लिए उम्र नहीं, बल्कि जनता के प्रति समर्पण सबसे अधिक मायने रखता है।

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