जंतर-मंतर विवाद पर लोकेंद्र प्रताप सिंह का बड़ा हमला, बोले- ‘इतनी गंदी राजनीति कभी नहीं देखी’

Editorial
7 Min Read

लखीमपुर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद पर उत्तर प्रदेश की 144 मोहम्मदी विधानसभा से भाजपा विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हमारे संवाददाता नागेंद्र दीक्षित से विशेष बातचीत में विधायक ने विपक्ष की राजनीति, लोकतांत्रिक विरोध, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित अशोभनीय टिप्पणी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन यदि विरोध की आड़ में देश की गरिमा, लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रधानमंत्री के पद की मर्यादा पर हमला किया जाए तो यह स्वीकार्य नहीं हो सकता।

“बूथ अध्यक्ष से विधायक तक का सफर तय किया”

बातचीत की शुरुआत में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति की शुरुआत सबसे निचले स्तर से की थी।

उन्होंने कहा,

“मैंने बूथ अध्यक्ष से लेकर विधायक तक का सफर तय किया है। संगठन में हर स्तर पर काम किया है। राजनीतिक संघर्ष देखा है, चुनाव देखे हैं, विरोध-प्रदर्शन भी देखे हैं, लेकिन अपने पूरे राजनीतिक जीवन में इतनी गंदी राजनीति कभी नहीं देखी।”

उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली भाषा लोकतांत्रिक संस्कृति के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

“विपक्ष में थे तब भी मर्यादा नहीं छोड़ी”

लोकेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भाजपा जब विपक्ष में थी, तब भी पार्टी ने अपनी राजनीतिक लड़ाई लोकतांत्रिक दायरे में रहकर लड़ी।

उन्होंने कहा,

“जब हम विपक्ष में थे, तब भी हमने अपनी मर्यादा बनाए रखी। सरकारों का विरोध किया, नीतियों पर सवाल उठाए, लेकिन कभी भी देश की गरिमा और संवैधानिक पदों का अपमान नहीं किया।”

उनका कहना था कि राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र की मजबूती का हिस्सा है, लेकिन विरोध और वैमनस्य के बीच की सीमा नहीं टूटनी चाहिए।

प्रधानमंत्री पर कथित टिप्पणी को बताया देश का अपमान

विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अशोभनीय टिप्पणी को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केवल किसी दल के नेता नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश की गरिमा का भी अपमान माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री का सम्मान देश का सम्मान है। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए।”

“पेपर लीक पर विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार”

लोकेंद्र प्रताप सिंह ने पेपर लीक जैसे मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा,

“पेपर लीक जैसे मुद्दे पर विरोध करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है। युवाओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।”

उन्होंने माना कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

“लेकिन विरोध का राजनीतिकरण उचित नहीं”

हालांकि विधायक ने यह भी कहा कि किसी गंभीर मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

उनके अनुसार,

“युवाओं की भावनाओं से जुड़े विषयों को राजनीतिक मंच बनाना सही नहीं है। यदि कोई आंदोलन केवल जनहित के लिए हो तो उसका सम्मान होना चाहिए, लेकिन यदि उसमें राजनीतिक स्वार्थ हावी हो जाए तो उसका उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।”

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक एजेंडा—दोनों में अंतर समझना आवश्यक है।

देश विरोधी ताकतों के शामिल होने का लगाया आरोप

लोकेंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में कुछ ऐसी ताकतें भी सक्रिय हो गईं, जिनका उद्देश्य केवल सरकार का विरोध नहीं बल्कि देश की छवि को नुकसान पहुंचाना था।उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व किसी भी जन आंदोलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।हालांकि उन्होंने किसी संगठन या व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि जांच एजेंसियां यदि आवश्यक समझें तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जंतर-मंतर विवाद क्यों बना राजनीतिक मुद्दा?

हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।इसी बीच कुछ नारों, पोस्टरों और कथित बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। सत्ता पक्ष ने इसे लोकतंत्र की आड़ में राजनीतिक अभियान बताया, जबकि विपक्ष ने इसे जनता की आवाज बताया।इसी पृष्ठभूमि में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह का बयान भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे को केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे राजनीतिक शुचिता, राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मर्यादा के संदर्भ में भी प्रस्तुत कर रही है।वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।ऐसे में जंतर-मंतर विवाद अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।मोहम्मदी विधानसभा से विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह का बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है। उन्होंने एक ओर युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर विरोध के राजनीतिकरण और कथित अशोभनीय टिप्पणियों पर कड़ा एतराज जताया। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

read on:https://news7hindi.com/somnath-temple-is-a-symbol-of-faith-history-and-renaissance/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment