बारिश ने खोली नगर निगम की तैयारियों की पोल, चिनहट की गौरव कुंज कॉलोनी बनी तालाब, स्कूल, कॉलेज और यातायात प्रभावित

Editorial
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रिपोर्ट : अंकित सिन्हा

लखनऊ राजधानी लखनऊ में लगातार हो रही बारिश ने नगर निगम की मानसून तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। शहर के कई इलाकों में जलभराव देखने को मिल रहा है, लेकिन चिनहट थाना क्षेत्र में अमिटी यूनिवर्सिटी गेट नंबर-2 के पास स्थित गौरव कुंज कॉलोनी के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं। कॉलोनी की सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।स्थानीय लोगों के अनुसार, हर बारिश के बाद पूरी कॉलोनी किसी तालाब जैसी नजर आने लगती है। घरों के बाहर कई फीट तक पानी भर जाने से लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना के साथ-साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा असर

सुबह स्कूल और कॉलेज के समय जलभराव के कारण कॉलोनी का मुख्य रास्ता पूरी तरह प्रभावित रहता है। कई छात्र समय पर अपने शिक्षण संस्थानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुछ अभिभावकों ने सुरक्षा को देखते हुए बच्चों को घर से बाहर भेजना ही उचित नहीं समझा।स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी में सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि यदि जल्द जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

वाहनों की आवाजाही भी हुई मुश्किल

जलभराव का असर सिर्फ पैदल चलने वालों तक सीमित नहीं है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बाइक और स्कूटी पानी में बंद हो चुकी हैं, जबकि चारपहिया वाहन भी बेहद धीमी गति से गुजर रहे हैं।लोगों का कहना है कि सड़क पर जमा पानी के कारण गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। लगातार बारिश होने पर पूरे इलाके में यातायात ठप होने की आशंका भी जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य पर उठाए सवाल

कॉलोनीवासियों का आरोप है कि इलाके में एक निजी बिल्डर द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य के कारण जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि पहले बारिश का पानी जल्दी निकल जाता था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पानी लंबे समय तक जमा रहने लगा है।स्थानीय लोगों का दावा है कि जल निकासी के प्राकृतिक रास्ते बाधित होने की वजह से हर बारिश में कॉलोनी जलमग्न हो जाती है।हालांकि निजी बिल्डर और स्थानीय पार्षद पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

बार-बार शिकायत, फिर भी नहीं मिला समाधान

निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका आरोप है कि हर साल बारिश के दौरान यही समस्या सामने आती है, लेकिन कार्रवाई केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह जाती है।लोगों का कहना है कि यदि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया जाता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

बीमारियों का भी बढ़ा खतरा

कॉलोनी में लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकाला गया तो डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से फॉगिंग और नियमित सफाई अभियान चलाने की मांग भी की है।

स्थायी समाधान की मांग

कॉलोनीवासियों का कहना है कि सिर्फ पंप लगाकर पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं है। वे चाहते हैं कि पूरे इलाके की जल निकासी व्यवस्था का तकनीकी सर्वे कराया जाए और स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, ताकि भविष्य में हर बारिश के बाद लोगों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।स्थानीय लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से अपील की है कि अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और जल्द से जल्द प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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