पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा को पड़ा भारी, सरकार ने ग्लोबल टीम को किया तलब; कंटेंट मॉडरेशन पर मांगा जवाब

Editorial
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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने का मामला अब केंद्र सरकार और मेटा (Meta) के बीच बड़ा मुद्दा बन गया है। वीडियो हटने के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए मेटा की ग्लोबल टीम को भारत तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। सरकार का कहना है कि करोड़ों भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह विश्वसनीय और पारदर्शी होना चाहिए।मामले की गंभीरता को देखते हुए मेटा के वैश्विक अधिकारियों को 5 और 6 अगस्त को भारत आकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और भारत में उनके संचालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सरकार ने क्यों किया मेटा को तलब?

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि सरकार चाहती है कि मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि उनके एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के काम करें।सरकार का मानना है कि यदि किसी तकनीकी त्रुटि के कारण देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो हट जाता है, तो यह केवल एक साधारण गलती नहीं बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला है।

संसदीय समिति में भी उठा मुद्दा

सोमवार को संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक में भी यह मामला प्रमुखता से उठा। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेटा, गूगल, यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर), स्नैपचैट, गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय के प्रतिनिधि मौजूद थे।बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने मेटा के अधिकारियों से पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री का वीडियो किस कारण हटाया गया और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी।

मेटा ने मानी तकनीकी गलती, मांगी माफी

बैठक के दौरान मेटा ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो कनीकी त्रुटि (Technical Error) के कारण हट गया था। कंपनी ने इस घटना पर खेद जताते हुए माफी मांगी और बताया कि वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया।हालांकि संसदीय समिति के कई सदस्यों ने कहा कि केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

निशिकांत दुबे ने उठाए कड़े सवाल

भाजपा सांसद और संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जा सकता है तो आम नागरिकों के साथ क्या हो सकता है, यह भी गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने मांग की कि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग स्वयं इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कंपनी जवाबदेही तय करने में विफल रहती है तो भारत में मेटा को मिली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा की समीक्षा की जा सकती है।

क्या है ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा?

‘सेफ हार्बर’ एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उनके उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है। यह सुरक्षा तभी लागू रहती है जब कंपनी भारतीय कानूनों का पालन करे और शिकायतों पर उचित कार्रवाई करे।यदि किसी कंपनी पर यह आरोप लगता है कि उसने गंभीर मामलों में लापरवाही बरती या कानून के अनुरूप कार्रवाई नहीं की, तो सरकार इस सुरक्षा की समीक्षा कर सकती है।

कंटेंट मॉडरेशन पर भी उठे सवाल

बैठक में केवल पीएम मोदी के वीडियो का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक और विवादित सामग्री को लेकर भी मेटा से जवाब मांगा गया।सांसदों ने पूछा कि कंपनी किस आधार पर पोस्ट और वीडियो हटाती है, एल्गोरिद्म कैसे काम करता है और क्या भारत के कानूनों के अनुरूप कंटेंट मॉडरेशन किया जा रहा है।इसके साथ ही यह भी पूछा गया कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी क्या नई व्यवस्था लागू करेगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर तेज हुई बहस

इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार हैं।सरकार का कहना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल बाजार है और यहां काम करने वाली सभी टेक कंपनियों को भारतीय कानूनों और नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा।

सरकार ने दिए स्पष्ट संकेत

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली तकनीकी त्रुटियों और कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर है। सरकार चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और बड़ी टेक कंपनियां अपने सिस्टम को और अधिक विश्वसनीय बनाएं।अब सभी की नजर 5 और 6 अगस्त को होने वाली बैठक पर है, जिसमें मेटा की ग्लोबल टीम भारत सरकार के सामने अपना पक्ष रखेगी। इस बैठक के बाद सरकार आगे क्या कदम उठाती है, इस पर पूरे डिजिटल और टेक सेक्टर की नजर बनी हुई है।

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