उन्नाव उत्तर प्रदेश के उन्नाव से जमीन के विवाद और खड़ी फसल को ट्रैक्टर से नष्ट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भूमि को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक पक्ष की खड़ी मूंग की फसल को रात के समय ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले की शिकायत संपूर्ण समाधान दिवस में की गई थी, लेकिन कथित तौर पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवार ने जिलाधिकारी उन्नाव को प्रार्थना पत्र देकर न्याय और कार्रवाई की मांग की है।मामला भूमि संख्या 390 से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, जमीन का पुराना भूमि नंबर 786 था, जो चकबंदी के बाद नया नंबर 390 हो गया। जमीन का रकबा करीब 0.0970 हेक्टेयर बताया गया है।
बैनामा के बाद जमीन पर कब्जे और फसल को लेकर विवाद
शिकायत में दी गई जानकारी के अनुसार, सजीवन सिंह निवासी हैदराबाद ने गिरीश चंद्र पुत्र शिवमंगल निवासी झालोतर से संबंधित भूमि का पंजीकृत बैनामा कराया था। बताया गया है कि भूमि संख्या 786 बाद में चकबंदी के दौरान बदलकर भूमि संख्या 390 हो गई।सजीवन सिंह की मृत्यु के बाद उनके वारिसों द्वारा उक्त भूमि पर खेती की जा रही थी। इसी क्रम में परिवार ने भूमि पर मूंग की फसल बोई थी। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि फसल तैयार होने के दौरान जमीन को लेकर विवाद खड़ा हुआ और इसी विवाद के बीच 25 जुलाई 2026 की रात कथित तौर पर ट्रैक्टर से खेत में खड़ी मूंग की फसल को जोतकर नष्ट कर दिया गया।पीड़ित परिवार ने इस घटना को लेकर संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।
25 जुलाई की रात फसल नष्ट करने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 25 जुलाई की रात गिरीश चंद्र पुत्र शिवमंगल पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कथित रूप से दबंगई के बल पर ट्रैक्टर से खेत में खड़ी मूंग की फसल जुतवा दी।परिवार का दावा है कि फसल को तैयार करने में उनकी मेहनत और लागत लगी थी। फसल नष्ट होने से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जमीन से जुड़े दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं और इसी आधार पर उन्होंने अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा है।हालांकि जमीन के स्वामित्व, कब्जे और फसल नष्ट करने के आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित राजस्व एवं पुलिस जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

संपूर्ण समाधान दिवस में दी शिकायत
मामले को लेकर सजीवन सिंह के बेटे भूपाल सिंह ने 1 अगस्त 2026 को संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार, आवेदन के माध्यम से अधिकारियों को भूमि विवाद और फसल नष्ट किए जाने की जानकारी दी गई तथा मामले में उचित कार्रवाई की मांग की गई।पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि मामला जमीन और खेती से जुड़ा होने के कारण जल्द कार्रवाई जरूरी थी, क्योंकि विवाद बढ़ने की आशंका बनी हुई है।शिकायतकर्ता के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं होने के बाद उन्होंने अब जिलाधिकारी उन्नाव के सामने अपनी समस्या रखी है।
डीएम से लगाई न्याय की गुहार
संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी उन्नाव को प्रार्थना पत्र दिया है। इसमें भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने, फसल नष्ट करने के आरोपों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।परिवार चाहता है कि राजस्व अभिलेखों और पंजीकृत बैनामे की जांच कर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही खेत में खड़ी फसल को कथित तौर पर नष्ट किए जाने के मामले में भी जांच कर नुकसान का आकलन कराया जाए।
भूमि संख्या 390 को लेकर सामने आया विवाद
यह पूरा मामला भूमि संख्या 390, रकबा 0.0970 हेक्टेयर से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जमीन का पुराना नंबर 786 था, जो चकबंदी के बाद नया नंबर 390 हो गया।ऐसे मामलों में भूमि के स्वामित्व और कब्जे की स्थिति तय करने के लिए राजस्व अभिलेख, बैनामा, चकबंदी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पीड़ित परिवार ने अधिकारियों से दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
फसल नष्ट होने से परिवार को आर्थिक नुकसान
पीड़ित पक्ष का कहना है कि खेत में मूंग की फसल खड़ी थी और उसे तैयार करने में परिवार ने मेहनत के साथ आर्थिक संसाधन भी लगाए थे। आरोप है कि रात में ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट किए जाने से परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।परिवार की मांग है कि प्रशासन मौके पर जांच कराए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में जमीन को लेकर किसी तरह के विवाद या दबाव की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए भी प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
मामले में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद अब पीड़ित परिवार को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। सबसे अहम सवाल यह है कि जमीन के दस्तावेजों और मौके की स्थिति की जांच के बाद प्रशासन किस पक्ष के दावे को सही पाता है और फसल नष्ट किए जाने के आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है।फिलहाल यह मामला भूमि विवाद, पंजीकृत बैनामा, चकबंदी के बाद बदले भूमि नंबर और खड़ी मूंग की फसल नष्ट किए जाने के आरोप के कारण चर्चा में है।पीड़ित परिवार का कहना है कि उसने पहले समाधान दिवस के माध्यम से प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन कथित तौर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद अब जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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