नई दिल्ली संसद का मानसून सत्र आज अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंचा और करीब तीन सप्ताह तक चले राजनीतिक घमासान के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र 13 अगस्त तक चला। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक से लेकर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले, छात्र आंदोलनों और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों तक कई मुद्दे संसद के भीतर और बाहर चर्चा में रहे।
आखिरी दिन भी हंगामे की आशंका
मानसून सत्र के अंतिम दिन भी संसद में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सरकार की ओर से विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए गएसत्र के अंतिम दिनों में NEET परीक्षा को लेकर विवाद खास तौर पर चर्चा में रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए NEET छात्र आंदोलन पर विस्तृत चर्चा की पेशकश भी की थी। हालांकि, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी और संसद में गतिरोध जारी रहा।
NEET पेपर लीक बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
NEET परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों ने इस मानसून सत्र में सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती पैदा की। विपक्ष का कहना रहा कि देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिएवहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर NEET मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष को इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए आमंत्रित कियाRTFGVBNEET का मुद्दा केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा। परीक्षा व्यवस्था, पेपर की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की चिंता और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे सवाल भी लगातार उठते रहे। यही वजह है कि मानसून सत्र के अंतिम चरण तक यह मुद्दा संसद की राजनीति में प्रमुख बना रहा।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले पर भी विपक्ष हमलावर
मानसून सत्र के दौरान अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा/धन गबन मामले को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्षी दलों ने इस मामले पर संसद में चर्चा की मांग उठाई और मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे की सुरक्षा तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल खड़े किए।सत्र शुरू होने से पहले ही अयोध्या मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों को संसद में उठाए जाने की चर्चा थी। विपक्ष की रणनीति में यह मुद्दा भी शामिल रहाइस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। विपक्ष ने इसे आस्था और सार्वजनिक धन से जुड़ा विषय बताते हुए जवाबदेही की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए गए।

परिसीमन का मुद्दा भी रहा महत्वपूर्ण
मानसून सत्र के दौरान डिलिमिटेशन यानी परिसीमन का मुद्दा भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा। प्रस्तावित संवैधानिक बदलाव और महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन के सवाल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए।दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दलों ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन से अपने राज्यों के प्रतिनिधित्व पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई। विशेष रूप से तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके ने परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों का विरोध किया था।Qसरकार ने विपक्षी दलों के साथ बातचीत के जरिए इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की। हालांकि, मानसून सत्र के दौरान इस विषय पर राजनीतिक सहमति बनाना आसान नहीं रहा। सरकार की ओर से विधेयक को लेकर प्रयास किए जाने की खबरें सामने आई थीं, लेकिन विपक्षी दलों की आपत्तियों के चलते मामला विवादित बना रहा।
संसद में गतिरोध क्यों रहा?
इस पूरे सत्र में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर संसद की कार्यवाही कितनी प्रभावी तरीके से चल पाई। कई मौकों पर विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण कार्यवाही बाधित हुई। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर महत्वपूर्ण विधायी कामकाज को रोकने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर जरूरी मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराने का आरोप लगाया।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र के दौरान बने गतिरोध को लेकर विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना रहा कि जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संसद में चर्चा कराना उनका अधिकार और जिम्मेदारी है।
सरकार ने कितने विधेयक पास किए?
राजनीतिक हंगामे के बावजूद सरकार विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सफल रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार मानसून सत्र के दौरान 12 विधेयक पेश किए गए और 11 विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए। इसका मतलब है कि हंगामे और व्यवधान के बावजूद संसद में विधायी कामकाज पूरी तरह रुका नहीं रहा।यही वजह है कि मानसून सत्र को एक तरफ राजनीतिक गतिरोध और दूसरी तरफ विधायी गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिरी दिन क्या रहा खास?
सत्र के समापन के दिन भी राजनीतिक सरगर्मी बनी रही। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अंततः अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा में सत्र के समापन के मौके पर वंदे मातरम् की छह पंक्तियां भी प्रस्तुत की गईं। वहीं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक विवादित मुद्दे को उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई प्रमुख नेता अंतिम दिन सदन में मौजूद रहे।
अब आगे क्या?
मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी NEET परीक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले और परिसीमन जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा में बने रह सकते हैं। खासकर NEET को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।परिसीमन का मुद्दा भी आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व और भविष्य की चुनावी राजनीति से जुड़ा है।कुल मिलाकर संसद का मानसून सत्र हंगामे, विरोध, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और विधायी कामकाज के बीच समाप्त हुआ। विपक्ष ने जहां NEET और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा, वहीं सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया। अब देखना होगा कि सत्र के दौरान जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, वे आने वाले राजनीतिक दौर में किस तरह आकार लेते हैं।संसद का मानसून सत्र भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन NEET, परिसीमन और अयोध्या से जुड़े मुद्दों पर सियासी बहस अभी खत्म होती नहीं दिख रही है।
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