सिद्धार्थनगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मिठवल, तिलौली का औचक निरीक्षण किया। अचानक पहुंचे जिलाधिकारी को देखकर स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल दिखाई दी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान 32 कर्मचारियों के सापेक्ष दो कर्मचारी विक्रम सिंह और मनीष पाण्डेय अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।डीएम की इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में भी संदेश गया कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारियों की समय से उपस्थिति और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

उपस्थिति पंजिका की जांच में खुली गैरहाजिरी
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने निरीक्षण की शुरुआत स्वास्थ्य केंद्र की उपस्थिति पंजिका से की। उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति की जानकारी ली और रजिस्टर का अवलोकन किया।पंजीकृत 32 कर्मचारियों में से दो कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। अनुपस्थित मिले कर्मचारियों में विक्रम सिंह और मनीष पाण्डेय शामिल हैं।डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए। प्रशासन की इस कार्रवाई को स्वास्थ्य केंद्रों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सवाल सिर्फ कर्मचारियों की गैरहाजिरी का नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने का भी है। ऐसे में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की समय पर मौजूदगी बेहद जरूरी हो जाती है।

अस्पताल के अलग-अलग विभागों का लिया जायजा
औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सिर्फ उपस्थिति पंजिका की जांच तक निरीक्षण को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वास्थ्य केंद्र के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों का भी जायजा लिया।उन्होंने आकस्मिक कक्ष, एक्स-रे कक्ष, महिला वार्ड, औषधि वितरण कक्ष, प्रसव कक्ष और लैब का निरीक्षण किया।इन विभागों में मरीजों को मिल रही सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। अस्पताल की कार्यप्रणाली को करीब से देखने के साथ जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों के लिए दवा, जांच और इलाज की व्यवस्था सुचारु रहे, इस पर प्रशासन की ओर से विशेष जोर दिया गया।

डॉक्टर समय से आएं, मरीजों का करें इलाज
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एमओआईसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी डॉक्टर समय से स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित हों और आने वाले मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित करें।डीएम ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।डॉक्टरों की समय से मौजूदगी को लेकर प्रशासन का सख्त रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ही इलाज के लिए निर्भर रहते हैं।यदि डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी समय से अस्पताल में मौजूद नहीं होते हैं तो इसका सीधा असर मरीजों और उनके इलाज पर पड़ता है।

बाहर की दवा लिखने पर भी सख्ती
जिलाधिकारी ने एमओआईसी को यह भी निर्देश दिया कि किसी भी मरीज को बाहर से दवा खरीदने के लिए न लिखा जाए।सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध दवाओं का मरीजों को अधिक से अधिक लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।यह निर्देश मरीजों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग सरकारी अस्पतालों में कम खर्च या निशुल्क इलाज और दवाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।ऐसे में अगर मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की सलाह दी जाती है तो उनके सामने अतिरिक्त आर्थिक बोझ खड़ा हो सकता है।जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को मरीज केंद्रित रखने पर जोर दिया।

साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी जिलाधिकारी ने निर्देश दिए।उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर कराने के लिए कहा। अस्पताल में साफ-सफाई का सीधा संबंध मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।विशेष रूप से प्रसव कक्ष, महिला वार्ड, लैब और आकस्मिक कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में मरीजों को स्वच्छ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
औचक निरीक्षण से स्वास्थ्य विभाग में संदेश
जिलाधिकारी का यह औचक निरीक्षण ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।औचक निरीक्षण का सबसे बड़ा उद्देश्य यही होता है कि अधिकारियों को पहले से सूचना न हो और अस्पताल की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।CHC मिठवल में दो कर्मचारियों के अनुपस्थित मिलने और उनके खिलाफ एक दिन का वेतन रोकने की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि प्रशासन ड्यूटी में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।हालांकि अनुपस्थित कर्मचारियों की गैरहाजिरी का कारण क्या था, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई उपलब्ध उपस्थिति निरीक्षण के आधार पर है।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने पर जोर
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि स्वास्थ्य केंद्र आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर इलाज मिले।डॉक्टरों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, जांच की सुविधा, प्रसव सेवाएं और अस्पताल की साफ-सफाई—ये सभी स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।डीएम के निर्देशों का उद्देश्य इन सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना और मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में ही जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।अब देखना होगा कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का स्वास्थ्य विभाग और CHC प्रशासन कितनी गंभीरता से पालन करता है।कुल मिलाकर, सिद्धार्थनगर के CHC मिठवल में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन का औचक निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग के लिए स्पष्ट संदेश लेकर आया है—ड्यूटी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना प्राथमिकता होगी। दो कर्मचारियों की गैरहाजिरी पर वेतन रोकने की कार्रवाई से लेकर डॉक्टरों की समयबद्ध उपस्थिति, बाहर की दवा न लिखने और साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश तक, डीएम ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को जवाबदेही का अहसास कराया है।
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