क्या खतरे में लाखों कर्मचारियों का डेटा? Microsoft Azure से 36 लाख रिकॉर्ड चोरी का दावा, जानें किन कंपनियों के नाम

Editorial
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टेक्नोलॉजी की दुनिया में कथित बड़े डेटा लीक की खबर ने साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक थ्रेट एक्टर ‘द हैटमैन’ ने दावा किया है कि उसने Microsoft Azure से जुड़े वातावरण तक पहुंच बनाकर लाखों कर्मचारियों के रिकॉर्ड हासिल किए हैं और इन्हें ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है। दावा किया जा रहा है कि इस कथित डेटाबेस में 36.4 लाख से अधिक रिकॉर्ड शामिल हैं।कथित डेटा लीक में Microsoft Azure के अलावा McDonald’s, Gap Inc., Vodafone, HCL Technologies, InterContinental Hotels Group (IHG), Kyndryl और Tata Consultancy Services (TCS) जैसी बड़ी कंपनियों के रिकॉर्ड का भी दावा किया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि कथित डेटा चोरी की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल कथित डेटा ब्रीच के तौर पर ही देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘द हैटमैन’ नाम के थ्रेट एक्टर ने कथित तौर पर एक बड़े डेटाबेस को बिक्री के लिए पेश किया है। उसका दावा है कि यह डेटा Microsoft Azure और उससे जुड़े इंट्रा वातावरण तक हासिल किए गए एक्सेस के जरिए जुटाया गया।कथित तौर पर संभावित खरीदारों को कुछ सैंपल रिकॉर्ड भी दिखाए गए हैं। इन रिकॉर्ड्स में कर्मचारियों से जुड़ी कई जानकारियां होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी की वास्तविकता और डेटाबेस की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

किन कंपनियों के रिकॉर्ड निशाने पर होने का दावा?

इस कथित डेटा लीक में कई बड़ी वैश्विक कंपनियों के नाम सामने आए हैं। इनमें McDonald’s, Gap Inc., Vodafone, HCL Technologies, IHG, Kyndryl और TCS प्रमुख हैं।इन कंपनियों के नाम सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कथित तौर पर चोरी किए गए डेटा में कितना हिस्सा वास्तविक है और क्या इसका संबंध मौजूदा सिस्टम से है। फिलहाल इस बारे में अलग-अलग कंपनियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

McDonald’s का सबसे बड़ा डेटाबेस होने का दावा

कथित लीक में सबसे बड़ा डेटाबेस McDonald’s का बताया जा रहा है। थ्रेट एक्टर के अनुसार इसमें 17 लाख से अधिक कर्मचारी रिकॉर्ड हो सकते हैं।दावा है कि इन रिकॉर्ड्स में कर्मचारियों के नाम, कर्मचारी आईडी, ईमेल एड्रेस, जॉब टाइटल, फोन नंबर, पोस्टल एड्रेस और कुछ सर्विस अकाउंट से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

TCS ने डेटा ब्रीच से किया इनकार

Tata Consultancy Services ने कथित डेटा ब्रीच के दावे को खारिज किया है। कंपनी के मुताबिक उसे अपने सिस्टम या ग्राहक वातावरण में किसी ऐसे ब्रीच का विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है।TCS का कहना है कि ऑनलाइन पेश की जा रही जानकारी पुरानी हो सकती है और उसमें बेसिक कर्मचारी जानकारी तक सीमित डेटा दिखाई दे रहा है। कंपनी के अनुसार ग्राहक डेटा या उसके ऑपरेशनल सिस्टम के प्रभावित होने का कोई सबूत नहीं मिला है।

Gap ने भी बताया- ब्रीच का सबूत नहीं

Gap Inc. ने भी कथित साइबर घटना को लेकर कहा है कि उसे अपने कॉरपोरेट सिस्टम के समझौता होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।कंपनी के अनुसार कथित डेटा सीमित, गैर-संवेदनशील और कई वर्ष पुराना हो सकता है। ऐसे में ऑनलाइन सामने आए रिकॉर्ड को सीधे तौर पर मौजूदा कॉरपोरेट सिस्टम के डेटा ब्रीच का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

लीक डेटा में कौन-सी जानकारी होने का दावा?

थ्रेट एक्टर के दावे के अनुसार कथित डेटाबेस में कर्मचारियों की निजी और पेशेवर जानकारी शामिल हो सकती है। इसमें:

  • पूरा नाम
  • ऑफिशियल और पर्सनल ईमेल
  • फोन नंबर
  • पोस्टल एड्रेस
  • जॉब टाइटल
  • कर्मचारी आईडी
  • सर्विस अकाउंट से जुड़ी जानकारी
  • अन्य अकाउंट या क्रेडेंशियल संबंधी विवरण

शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इनमें से कितनी जानकारी वास्तविक है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

कर्मचारियों और आम लोगों के लिए कितना बड़ा खतरा?

अगर किसी कर्मचारी का नाम, फोन नंबर, ईमेल, नौकरी और कंपनी से जुड़ी जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लगती है, तो उसका इस्तेमाल फिशिंग, स्पैम और सोशल इंजीनियरिंग जैसे साइबर अपराधों में किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, किसी हमलावर के पास कर्मचारी का नाम और कंपनी की जानकारी होने पर वह कंपनी के अधिकारी या आईटी टीम के नाम से ज्यादा विश्वसनीय दिखने वाला फर्जी संदेश भेज सकता है। ऐसे संदेशों में लिंक खोलने, फाइल डाउनलोड करने या पासवर्ड और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए कहा जा सकता है।इसलिए कर्मचारियों को अनजान लिंक, संदिग्ध अटैचमेंट और किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारी मांगने वाले ईमेल या कॉल से सावधान रहना चाहिए।

क्या 36 लाख रिकॉर्ड की चोरी की पुष्टि हो गई है?

नहीं। फिलहाल 36.4 लाख रिकॉर्ड चोरी होने का दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है। इसी तरह अलग-अलग कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड की वास्तविकता और डेटा की उम्र को लेकर भी सवाल मौजूद हैं।कुछ कंपनियों ने अपने सिस्टम में किसी ब्रीच के सबूत से इनकार किया है। इसलिए इस मामले में आधिकारिक जांच और स्वतंत्र सत्यापन के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

कंपनियों को क्या करना चाहिए?

ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कंपनियों को अपने साइबर सुरक्षा सिस्टम को लगातार मजबूत करना जरूरी है। कर्मचारी और क्लाउड अकाउंट्स पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) लागू करना, पुराने क्रेडेंशियल्स को निष्क्रिय करना और अनावश्यक परमिशन हटाना महत्वपूर्ण कदम हैं।इसके अलावा संवेदनशील डेटाबेस तक पहुंच सीमित रखनी चाहिए और असामान्य या बड़े पैमाने पर डेटा एक्सेस होने पर तुरंत अलर्ट की व्यवस्था करनी चाहिए। लॉगिन गतिविधियों की निगरानी और नियमित सुरक्षा ऑडिट भी साइबर हमलों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। Microsoft Azure और कई बड़ी कंपनियों से जुड़े कथित डेटा लीक ने एक बार फिर दिखाया है कि कर्मचारियों की डिजिटल जानकारी कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस मामले में डेटा चोरी के दावे की आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे कथित डेटा ब्रीच के रूप में ही देखना उचित है। कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि, फिशिंग मैसेज या अनजान लिंक को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए।

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