मौसम में बदलाव और वायरल संक्रमण के बीच कई लोगों में बुखार ठीक होने के बाद भी सर्दी-जुकाम, गले में खराश और खांसी कई दिनों तक बनी रहती है। कई बार बुखार उतर जाता है, कमजोरी भी कम होने लगती है, लेकिन खांसी पीछा नहीं छोड़ती। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वायरल फीवर ठीक होने के बाद भी खांसी और जुकाम क्यों बना रहता है? क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत है और इससे राहत पाने के लिए क्या किया जा सकता है?स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वायरल संक्रमण के बाद कुछ समय तक खांसी या नाक बंद रहने की समस्या असामान्य नहीं है। सामान्य श्वसन संक्रमण अक्सर एक से दो सप्ताह में बेहतर होने लगता है, जबकि खांसी इससे अधिक समय तक रह सकती है। NHS के अनुसार, सामान्य खांसी करीब 3 से 4 सप्ताह में अपने आप ठीक हो सकती है।
- वायरल फीवर के बाद खांसी क्यों बनी रहती है?
- 1. सांस की नलियों में बनी रहती है संवेदनशीलता
- 2. नाक का म्यूकस गले में पहुंचना
- 3. गले में सूखापन और जलन
- 4. वायरल ब्रोंकाइटिस
- सर्दी-जुकाम जल्दी ठीक क्यों नहीं होता?
- वायरल फीवर के बाद खांसी और जुकाम में क्या करें?
- पर्याप्त आराम करें
- पानी और तरल पदार्थ लेते रहें
- शहद से मिल सकती है राहत
- नमक के पानी से गरारे
- नाक की सफाई रखें
- धूल-धुएं से बचें
- क्या वायरल खांसी में एंटीबायोटिक लेना चाहिए?
- कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
- बार-बार खांसी होने के दूसरे कारण भी हो सकते हैं

वायरल फीवर के बाद खांसी क्यों बनी रहती है?
वायरल संक्रमण के दौरान नाक, गले और सांस की नलियों में सूजन और जलन हो सकती है। वायरस कम होने के बाद भी यह जलन तुरंत खत्म नहीं होती। इसी वजह से गले या सांस की नलियों में थोड़ी सी जलन होने पर भी खांसी की समस्या बनी रह सकती है।इसे कई बार पोस्ट-वायरल या पोस्ट-इंफेक्शियस कफ कहा जाता है। संक्रमण खत्म होने के बाद शरीर को सांस की नलियों की सामान्य स्थिति में लौटने में कुछ समय लग सकता है।

1. सांस की नलियों में बनी रहती है संवेदनशीलता
वायरल संक्रमण के दौरान एयरवे में सूजन आ सकती है। बुखार और संक्रमण कम होने के बाद भी सांस की नलियां कुछ समय तक संवेदनशील रह सकती हैं। धूल, धुआं, ठंडी हवा या तेज खुशबू जैसे सामान्य irritants भी इस दौरान खांसी को बढ़ा सकते हैं।
2. नाक का म्यूकस गले में पहुंचना
वायरल संक्रमण के बाद नाक में बनने वाला म्यूकस पीछे की तरफ गले में जा सकता है। इसे पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है। इससे गले में खराश, बार-बार गला साफ करने की जरूरत और लगातार खांसी हो सकती है।
3. गले में सूखापन और जलन
बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी, मुंह से सांस लेना और लगातार खांसने के कारण गला सूख सकता है। इससे खांसी का चक्र बना रह सकता है।
4. वायरल ब्रोंकाइटिस
कुछ वायरल संक्रमण सांस की बड़ी नलियों में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिसे एक्यूट ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। इसमें खांसी के साथ बलगम, गले में खराश और कभी-कभी सीने में असहजता भी हो सकती है। ब्रोंकाइटिस सामान्यतः लगभग तीन सप्ताह में बेहतर हो जाता है।
सर्दी-जुकाम जल्दी ठीक क्यों नहीं होता?
सर्दी-जुकाम कई अलग-अलग वायरस के कारण हो सकता है। CDC के अनुसार, सामान्य सर्दी के लक्षण आमतौर पर शुरुआती 2-3 दिनों में अधिक होते हैं और नाक बहना तथा खांसी जैसे कुछ लक्षण 10-14 दिनों तक रह सकते हैं।इसलिए केवल बुखार उतर जाने का मतलब यह नहीं है कि शरीर के सभी श्वसन लक्षण उसी दिन समाप्त हो जाएंगे। शरीर को संक्रमण से पूरी तरह उबरने में थोड़ा और समय लग सकता है।

वायरल फीवर के बाद खांसी और जुकाम में क्या करें?
पर्याप्त आराम करें
संक्रमण के बाद शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त आराम की जरूरत होती है। बहुत अधिक थकान, नींद की कमी और लगातार शारीरिक मेहनत से रिकवरी मुश्किल महसूस हो सकती है।
पानी और तरल पदार्थ लेते रहें
पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और गले में जमा म्यूकस को पतला करने में मदद मिल सकती है। गर्म पेय भी गले की जलन को शांत करने में मदद कर सकते हैं।
शहद से मिल सकती है राहत
एक साल से अधिक उम्र के लोगों में शहद को गर्म पानी या नींबू वाले गर्म पेय में लेकर गले की जलन और खांसी में कुछ राहत मिल सकती है। एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए।
नमक के पानी से गरारे
गले में खराश होने पर हल्के गर्म नमक वाले पानी से गरारे किए जा सकते हैं। इससे गले की परेशानी में राहत मिल सकती है। गरारे करने वाले पानी को निगलना नहीं चाहिए।
नाक की सफाई रखें
नाक बंद रहने या म्यूकस जमा होने पर सामान्य सलाइन नेजल स्प्रे या ड्रॉप्स मददगार हो सकते हैं। किसी भी दवा या नेजल स्प्रे का इस्तेमाल उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह से करना बेहतर है।
धूल-धुएं से बचें
सिगरेट का धुआं, धूल, तेज परफ्यूम और प्रदूषित हवा पहले से संवेदनशील सांस की नलियों में जलन बढ़ा सकते हैं। इसलिए खांसी के दौरान इनसे दूरी रखना बेहतर है।
क्या वायरल खांसी में एंटीबायोटिक लेना चाहिए?
यह बेहद महत्वपूर्ण सवाल है। सामान्य वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक काम नहीं करते, क्योंकि एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के खिलाफ काम करते हैं, वायरस के खिलाफ नहीं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है।यदि डॉक्टर को बैक्टीरियल संक्रमण, निमोनिया या किसी अन्य समस्या का संदेह हो, तभी वह जरूरी जांच के बाद उपचार तय कर सकते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
अगर खांसी लगातार बनी हुई है तो इसे हमेशा नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। NHS के अनुसार, तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाली खांसी में चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून वाली खांसी, बहुत ज्यादा कमजोरी या बिगड़ते लक्षण होने पर जल्द चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। अगर बुखार कई दिनों तक बना रहे या ठीक होने के बाद दोबारा लौट आए, तो भी डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
बार-बार खांसी होने के दूसरे कारण भी हो सकते हैं
हर लंबी खांसी को केवल वायरल संक्रमण का असर मानना सही नहीं है। एलर्जी, अस्थमा, एसिड रिफ्लक्स, नाक से गले में म्यूकस का जाना, ब्रोंकाइटिस या अन्य श्वसन संबंधी समस्याएं भी लंबे समय तक खांसी का कारण बन सकती हैं।अगर वायरल संक्रमण के बाद खांसी लगातार बढ़ रही है, रात में बहुत ज्यादा होती है, सांस फूलती है या कई सप्ताह तक बनी रहती है, तो डॉक्टर जांच करके वास्तविक कारण पता कर सकते हैं।वायरल फीवर के बाद सर्दी-जुकाम और खांसी का कुछ समय तक बने रहना कई मामलों में सामान्य रिकवरी का हिस्सा हो सकता है। संक्रमण खत्म होने के बाद भी सांस की नलियों में जलन, नाक से गले में म्यूकस और गले का सूखापन खांसी को जारी रख सकता है। सामान्य तौर पर आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ, धूल-धुएं से दूरी और गले को आराम देने वाले उपाय मदद कर सकते हैं।हालांकि अगर खांसी तीन सप्ताह से ज्यादा रहे, लक्षण लगातार बिगड़ें, सांस लेने में दिक्कत हो, सीने में दर्द हो या खून आए, तो इसे सामान्य वायरल खांसी मानकर घर पर इलाज करते रहना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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