रिपोर्ट:चन्दन मिश्रा
लखनऊ राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के संचालन और रखरखाव के लिए इसे निजी कंसोर्टियम को लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद JPNIC एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।सबसे अहम बात यह है कि इसे बेचा नहीं जा रहा है, बल्कि तय अवधि के लिए लीज पर दिया जा रहा है। जमीन और संपत्ति का स्वामित्व लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के पास ही रहेगा। चयनित निजी समूह सेंटर का संचालन और रखरखाव करेगा।
₹831 करोड़ की लीज पर क्या है फैसला?
कैबिनेट से मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक JPNIC को निजी कंसोर्टियम को 30 साल की लीज पर देने की योजना है। इसके लिए कंसोर्टियम करीब 831 करोड़ रुपये LDA को देगा। रिपोर्ट के अनुसार ऊंची बोली लगाने वाले कंसोर्टियम में वृंदावन बॉटलर्स और रॉकवुड होटल्स शामिल हैं।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹831 करोड़ को JPNIC की बिक्री की कीमत बताना सही नहीं होगा। यह लीज और संचालन से जुड़ी राशि है। संपत्ति का मालिकाना हक LDA के पास ही रहेगा। निजी संचालक को तय शर्तों के तहत JPNIC को संचालित और मेंटेन करना होगा।

वर्षों से बंद पड़ा है JPNIC
JPNIC का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू हुआ था। यह परियोजना तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल की प्रमुख योजनाओं में शामिल थी। वर्ष 2016 में इसके स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन भी किया गया था। करीब 18.6 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर को बहुउद्देश्यीय केंद्र के तौर पर विकसित किया गया था।हालांकि 2017 में निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त होने से पहले ही काम रुक गया। इसके बाद JPNIC लंबे समय तक लगभग बंद और अनुपयोगी स्थिति में रहा। पिछले वर्षों में इसे दोबारा उपयोग में लाने को लेकर कई योजनाएं बनीं, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।इसी वजह से समय के साथ परिसर के रखरखाव और अधूरे काम को लेकर भी सवाल उठते रहे। सरकार की ओर से इसे दोबारा उपयोगी बनाने के विकल्पों पर लगातार विचार किया जाता रहा।
निजी कंपनी को क्यों दिया जा रहा है संचालन?
सरकार और LDA की योजना के पीछे मुख्य उद्देश्य वर्षों से बंद पड़े JPNIC को दोबारा सक्रिय करना बताया जा रहा है। ताजा प्रस्ताव के अनुसार चयनित निजी कंसोर्टियम को बचा हुआ काम अपने खर्च पर पूरा करना होगा और इसके बाद सेंटर का संचालन करना होगा।रिपोर्ट के मुताबिक JPNIC में अभी भी इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और फायर सेफ्टी जैसी सुविधाओं से जुड़े काम बाकी हैं। इन कार्यों पर लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार की ओर से इन लंबित कार्यों पर आगे अतिरिक्त खर्च नहीं करने की व्यवस्था प्रस्ताव में रखी गई है।यानी सरकार का तर्क यह है कि निजी ऑपरेटर अपने संसाधनों से अधूरे काम को पूरा करेगा और इसके बाद परिसर का संचालन तथा रखरखाव भी करेगा।
होटल से लेकर कन्वेंशन सेंटर तक होंगी सुविधाएं
JPNIC को केवल एक सामान्य सरकारी भवन के रूप में नहीं, बल्कि बड़े बहुउद्देश्यीय परिसर के रूप में तैयार किया गया था। यहां होटल, कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग और खेल सुविधाओं का प्रावधान है।रिपोर्ट के अनुसार परिसर में करीब 107 कमरों वाला होटल, जिम, स्पा, सैलून, ओपन-एयर रेस्टोरेंट और करीब 2,000 लोगों की क्षमता वाला कन्वेंशन हॉल जैसी सुविधाएं हैं। इसके अलावा ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल भी परियोजना का हिस्सा है।हालांकि JPNIC के म्यूजियम ब्लॉक को LDA के नियंत्रण में रखने की बात सामने आई है। वहीं खेल सुविधाओं और क्लब मेंबरशिप से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित संचालन मॉडल का हिस्सा होंगी।
सरकार को मिलेगा नियमित राजस्व
लीज मॉडल के तहत केवल शुरुआती राशि ही नहीं, बल्कि संचालन शुरू होने के बाद भी LDA को नियमित भुगतान किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंसोर्टियम को हर साल करीब 6 करोड़ रुपये LDA को देने होंगे। यह राशि हर साल पांच प्रतिशत बढ़ने की व्यवस्था है।इसके अलावा निजी कंसोर्टियम को प्रदर्शन गारंटी के तौर पर 25 करोड़ रुपये जमा करने होंगे और लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस मिलने पर LDA को करीब 10.11 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
अखिलेश सरकार के प्रोजेक्ट पर फिर सियासत
JPNIC की पृष्ठभूमि को देखते हुए इस फैसले का राजनीतिक महत्व भी काफी ज्यादा है। यह परियोजना अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी और लंबे समय से समाजवादी पार्टी इसे अपनी सरकार की प्रमुख परियोजनाओं में गिनाती रही है।अब योगी सरकार के निजी संचालन के फैसले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार की नीति पर तंज कसते हुए JPNIC को निजी हाथों में देने को लेकर निशाना साधा।वहीं सरकार का पक्ष यह है कि वर्षों से अधूरे और अनुपयोगी पड़े परिसर को अब व्यावहारिक तरीके से शुरू किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक निजी संचालन से अधूरे काम पूरे होंगे और सरकारी खजाने पर आगे अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
अब JPNIC का भविष्य क्या होगा?
JPNIC को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निजी संचालन के बाद यह परिसर वास्तव में लखनऊ के लिए एक सक्रिय सम्मेलन, संस्कृति, पर्यटन और खेल केंद्र बन पाएगा।एक तरफ सरकार का दावा है कि निजी क्षेत्र के जरिए वर्षों से बंद पड़े प्रोजेक्ट को दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। दूसरी तरफ विपक्ष इसे सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण की दिशा में कदम बता रहा है।हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक JPNIC की जमीन और संपत्ति का मालिकाना हक LDA के पास ही रहेगा। निजी कंसोर्टियम को संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।इस तरह ₹831 करोड़ का JPNIC मामला सिर्फ एक लीज डील नहीं, बल्कि लखनऊ के वर्षों पुराने अधूरे प्रोजेक्ट को लेकर सरकार की नई रणनीति भी है। अब देखना होगा कि निजी संचालन के बाद JPNIC कब पूरी तरह तैयार होकर आम लोगों और आयोजनों के लिए खुलता है और यह परियोजना अपने मूल उद्देश्य को कितना पूरा कर पाती है।
read on:https://news7hindi.com/tmu-moradabad-national-blood-donation-camp-22-people-donate-blood/
advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

