नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी गुणवत्ता को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री ने सचिवों के साथ बैठक में परियोजनाओं की निगरानी, जवाबदेही और समय पर काम पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक परियोजनाओं का लाभ निर्धारित समय में आम लोगों तक पहुंचे।बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से सवाल भी किए। उन्होंने पूछा कि जब संबंधित विभाग और अधिकारी परियोजनाओं की लगातार निगरानी कर रहे हैं, तो क्या सरकार को ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ जैसी व्यवस्था की जरूरत पड़नी चाहिए? प्रधानमंत्री के इस सवाल को परियोजनाओं में जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
सार्वजनिक परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर चिंता
सरकार की ओर से लगातार यह जोर दिया जाता रहा है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं देश की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं। सड़क, रेलवे, बिजली, जलापूर्ति, शहरी विकास और अन्य क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं में समय और लागत दोनों का विशेष महत्व है।प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को संकेत दिया कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी से सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। परियोजना जितनी देर से पूरी होगी, उसकी लागत बढ़ने की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में अधिकारियों को शुरुआत से ही स्पष्ट लक्ष्य और समयसीमा तय करके काम करने की जरूरत है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल परियोजना शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। उसका काम निर्धारित गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा होना और उसका वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।

‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ की जरूरत क्यों पड़ी?
बैठक में प्रधानमंत्री की टिप्पणी का एक अहम पहलू परियोजनाओं के थर्ड पार्टी ऑडिट से जुड़ा रहा। आम तौर पर किसी परियोजना की गुणवत्ता और काम की प्रगति का स्वतंत्र मूल्यांकन करने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाता है।प्रधानमंत्री का सवाल इस बात पर केंद्रित था कि अगर सरकारी तंत्र अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाए और परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी हो, तो क्या हर स्तर पर बाहरी ऑडिट की आवश्यकता पड़ेगी?इस टिप्पणी के जरिए अधिकारियों को यह संदेश दिया गया कि निगरानी और जवाबदेही की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की भी है। अधिकारियों को परियोजनाओं की प्रगति पर केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर निर्भर रहने के बजाय जमीन पर वास्तविक स्थिति की भी समीक्षा करनी चाहिए।

रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में अंतर नहीं होना चाहिए
सरकारी परियोजनाओं की समीक्षा में अक्सर प्रगति रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। लेकिन किसी परियोजना की वास्तविक स्थिति केवल रिपोर्ट से नहीं, बल्कि उसके जमीनी क्रियान्वयन से सामने आती है।प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की अपेक्षा की कि रिपोर्ट में दिखाई जा रही प्रगति और मौके पर हुए काम में अंतर नहीं होना चाहिए। यदि किसी परियोजना में समस्या आ रही है तो उसे समय रहते उच्च स्तर पर सामने लाया जाना चाहिए, ताकि समाधान निकाला जा सके।इसका उद्देश्य परियोजनाओं में होने वाली देरी और लागत बढ़ने की स्थिति को नियंत्रित करना है।
अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों को यह भी संदेश दिया कि बड़े स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। परियोजना की शुरुआत से लेकर उसके पूरा होने तक अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों की भूमिका तय होती है।यदि किसी परियोजना में लगातार देरी हो रही है या गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, तो उसकी वजह की पहचान जरूरी है। इसके लिए अधिकारियों को नियमित समीक्षा और निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।सरकार का जोर अब केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर नहीं, बल्कि पहले से चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर भी है।

जनता के पैसे का बेहतर इस्तेमाल जरूरी
सार्वजनिक परियोजनाओं में सरकारी धन का इस्तेमाल होता है। ऐसे में उनकी गुणवत्ता और समयबद्धता सीधे तौर पर करदाताओं और आम जनता से जुड़ी होती है।प्रधानमंत्री की टिप्पणी का एक बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि सरकारी धन से बनने वाली परियोजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। परियोजना की लागत, समयसीमा और गुणवत्ता—तीनों की निगरानी आवश्यक है।अगर किसी सड़क, पुल, अस्पताल, रेलवे परियोजना या शहरी विकास योजना में लंबे समय तक काम चलता रहता है, तो इससे जनता को सुविधा मिलने में देरी होती है। साथ ही निर्माण लागत भी बढ़ सकती है।
डिजिटल निगरानी और बेहतर प्रबंधन पर जोर
वर्तमान दौर में सरकार विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है। इससे परियोजनाओं की प्रगति को अलग-अलग स्तरों पर ट्रैक किया जा सकता है।ऐसे में अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्हें उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल करते हुए परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रखनी होगी।प्रधानमंत्री की समीक्षा का उद्देश्य भी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाना माना जा रहा है।
समय पर पूरा हो काम, तभी मिलेगा पूरा लाभ
किसी भी सार्वजनिक परियोजना का अंतिम उद्देश्य आम नागरिकों को सुविधा देना होता है। इसलिए परियोजना का उद्घाटन या निर्माण शुरू होना ही उसकी सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। वास्तविक सफलता तब होगी, जब निर्धारित समय और गुणवत्ता के साथ परियोजना पूरी होकर जनता के उपयोग में आए।प्रधानमंत्री मोदी की सचिवों को दी गई सख्त हिदायत इसी दिशा में देखी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को गंभीरता से लेना होगा।सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी, गुणवत्ता से समझौता और कमजोर निगरानी को लेकर सरकार का रुख आने वाले समय में और सख्त हो सकता है। प्रधानमंत्री की बैठक में उठे सवाल ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि सरकारी परियोजनाओं की निगरानी के लिए बाहरी ऑडिट जरूरी है या सरकारी तंत्र को ही अपनी जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था इतनी मजबूत करनी चाहिए कि अतिरिक्त निगरानी की जरूरत कम से कम पड़े।
read on:https://news7hindi.com/lucknow-jpnic-831-crore-lease-yogi-government-akhilesh-yadav/
advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

