लखनऊ महिलाओं और बालिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक परेशानियों और रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ते तनाव को लेकर राजधानी लखनऊ में एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। गोमती नगर एक्सटेंशन स्थित ‘द ला गार्डेनिया कैफे’ में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने महिलाओं की अनकही चिंताओं, पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों से उत्पन्न दबाव और भावनात्मक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान ‘आनंदमंत्रा’ पहल को समाज के सामने प्रस्तुत किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को अपनी बात कहने, चिंताओं को साझा करने और भावनात्मक सहयोग प्राप्त करने के लिए एक संवेदनशील मंच उपलब्ध कराना है।कार्यक्रम में वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. संगीता शर्मा और डॉ. रश्मि सोनी ने उपस्थित लोगों से संवाद किया। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक तनाव को पहचानना, अपनी भावनाओं को समझना और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या विशेषज्ञ से मदद लेना महत्वपूर्ण है। परिचर्चा का मुख्य संदेश रहा कि महिलाओं का सशक्तीकरण केवल उनकी जिम्मेदारियों और उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक खुशहाली को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस और नारी शक्ति से प्रेरित पहल
कार्यक्रम के प्रारंभ में ‘आनंदमंत्रा’ के संस्थापक सदस्य आनंद कृष्ण ने अतिथियों का परिचय कराया और पहल के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस और नवरात्रि में नारी शक्ति की भावना से प्रेरित होकर 11 अक्टूबर को महिलाओं एवं बालिकाओं के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति समर्पित इस पहल को समाज के सामने प्रस्तुत किया गया।इस पहल का उद्देश्य ऐसी महिलाओं तक पहुंचना है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक अपेक्षाओं, कामकाज और व्यक्तिगत जीवन के दबाव के बीच अपनी परेशानियों को खुलकर व्यक्त नहीं कर पातीं। कई बार महिलाएं अपनी चिंताओं को दूसरों के सामने रखने में संकोच करती हैं या उन्हें लगता है कि उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना जाएगा। ऐसे में उन्हें सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है।आयोजकों के अनुसार, ‘आनंदमंत्रा’ महिलाओं और बालिकाओं को अपनी भावनाओं को समझने तथा बिना झिझक अपनी बात साझा करने का अवसर देने की दिशा में काम करेगा।

महिलाओं में बढ़ते मानसिक तनाव पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
परिचर्चा के दौरान डॉ. रश्मि सोनी ने कहा कि आज के समय में पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने का दबाव मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तनाव को समय रहते पहचानना और अपनी चिंताओं को मन में दबाकर रखने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करना जरूरी है।उन्होंने बताया कि अपनी परेशानियों पर बातचीत करने से व्यक्ति को परिस्थितियों को समझने और उनसे निपटने के बेहतर तरीके तलाशने में मदद मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना भी उपयोगी हो सकता है।कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि महिलाओं की भावनात्मक परेशानियों को अक्सर रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के पीछे नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई महिलाएं घर, परिवार, नौकरी और सामाजिक अपेक्षाओं को पूरा करने में इतनी व्यस्त रहती हैं कि अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय नहीं निकाल पातीं। ऐसे में उनकी भावनाओं को सुनना और उनकी समस्याओं को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।
भावनाओं को व्यक्त करना भी है सशक्तीकरण का हिस्सा
डॉ. संगीता शर्मा ने कहा कि जब महिलाएं अपने तनाव और भावनात्मक परेशानियों को व्यक्त नहीं कर पातीं, तो इसका उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने समय पर उचित परामर्श और भावनात्मक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि सही समय पर सहयोग मिलने से महिलाएं अपनी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती हैं।परिचर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि महिलाओं को हमेशा मजबूत बने रहने और हर परिस्थिति को अकेले संभालने की अपेक्षा से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। अपनी परेशानी बताना कमजोरी नहीं है। अपनी भावनाओं को स्वीकार करना, जरूरत पड़ने पर मदद मांगना और अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण का हिस्सा है।
वेबसाइट के माध्यम से बुक कर सकेंगी सत्र
‘आनंदमंत्रा’ के निदेशक (प्रशासन एवं तकनीकी) राजीव व्यास ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महिलाएं संस्था की वेबसाइट www.anandmantraa.com के माध्यम से अपने सत्र की बुकिंग कर सकती हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुविधाजनक तरीके से अपनी चिंताओं और समस्याओं को साझा करने का अवसर देना है।राजीव व्यास ने निजता और गोपनीयता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि ‘आनंदमंत्रा’ की सेवाओं का लाभ लेने वाली महिलाओं की निजता और उनके द्वारा साझा की गई जानकारियों की गोपनीयता को प्राथमिकता दी जाती है।मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर बातचीत करते समय व्यक्ति का सहज महसूस करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब किसी को भरोसा होता है कि उसकी बात को संवेदनशीलता के साथ सुना जाएगा, तो वह अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में अधिक सहज महसूस कर सकता है। इसी सोच के साथ इस पहल को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
दूसरे चरण में सेवाओं का विस्तार करने की योजना
राजीव व्यास के मुताबिक, परियोजना के दूसरे चरण में नेटवर्क पार्टनर्स के सहयोग से सेवाओं का विस्तार करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य मानसिक तनाव और भावनात्मक दबाव का सामना कर रही अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचना है, ताकि उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहयोग प्राप्त करने के अधिक अवसर मिल सकें।मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद लोगों को उचित सहयोग तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को सामान्य बनाने से लोग अपनी समस्याओं को समय रहते पहचानने और आवश्यक मदद लेने के लिए आगे आ सकते हैं।किसी भी मानसिक स्वास्थ्य पहल की उपयोगिता उसके माध्यम से मिलने वाली सेवाओं, उनकी उपलब्धता और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच पर भी निर्भर करती है। ऐसे में सेवाओं का विस्तार और गोपनीयता बनाए रखना इस पहल के लिए महत्वपूर्ण पहलू होंगे।
‘हर आवाज़ मायने रखती है’ बना कार्यक्रम का संदेश
कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश रहा कि महिलाओं की शक्ति केवल इस बात में नहीं है कि वे कितनी चुनौतियों का सामना करती हैं, बल्कि इस बात में भी है कि उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने और जरूरत पड़ने पर सहयोग मांगने की कितनी स्वतंत्रता मिलती है।‘आनंदमंत्रा’ इसी सोच के साथ महिलाओं और बालिकाओं को ऐसा मंच देने की बात करता है, जहां उनकी बात को ध्यान से सुना जाए और उनकी भावनाओं को सम्मान दिया जाए। पहल का उद्देश्य यह संदेश देना है कि किसी की परेशानी को समझने के लिए उसे बिना पूर्वाग्रह के सुनना और उसकी स्थिति के प्रति संवेदनशील रहना जरूरी है।लखनऊ में आयोजित इस परिचर्चा ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहयोग और अपनी बात खुलकर कह पाने के महत्व को सामने रखा। ‘आनंदमंत्रा’ की पहल महिलाओं और बालिकाओं को अपनी चिंताओं को साझा करने तथा जरूरत के अनुसार सहयोग प्राप्त करने का अवसर देने की दिशा में एक प्रयास है।
‘आनंदमंत्रा’ का संदेश है—हर आवाज़ मायने रखती है। हम सुनते हैं, आप सुकून पाते हैं।
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