लखनऊ गोगा वीर-गुरु गोरखनाथ मेले में झूले की अनुमति पर विवाद

Editorial
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लखनऊ राजधानी लखनऊ के प्राचीन धार्मिक मेलों में शामिल गोगा वीर चौहान (जाहरवीर) एवं गुरु गोरखनाथ मेले के आयोजन से पहले झूलों की अनुमति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से मेले में झूले लगाने की अनुमति नहीं मिलने से मेला समिति में नाराजगी है। समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन से जल्द अनुमति देने की मांग की और कहा कि झूले मेले का प्रमुख आकर्षण हैं, इनके बिना खासकर बच्चों और महिलाओं के लिए मेले का उत्साह कम हो जाएगा।मेला समिति के अध्यक्ष राज किरण राज ने प्रेस वार्ता में प्रशासन के फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। समिति का कहना है कि मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग पहुंचते हैं और झूले तथा दुकानें इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

28 और 29 अगस्त को होना है मेले का आयोजन

मेला समिति के मुताबिक इस वर्ष गोगा वीर-गुरु गोरखनाथ मेले का आयोजन 28 और 29 अगस्त को प्रस्तावित है। आयोजन को लेकर समिति की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ लोगों की सुविधा और मनोरंजन के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की जाती हैं।समिति का कहना है कि मेले में दूर-दराज से श्रद्धालु बाबा गोगा वीर और गुरु गोरखनाथ के दर्शन एवं आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। ऐसे में मेले की व्यवस्थाओं को समय रहते अंतिम रूप देना जरूरी है।

‘झूले के बिना बच्चों और महिलाओं का उत्साह कम होगा’

प्रेस वार्ता के दौरान अध्यक्ष राज किरण राज ने कहा कि मेले में झूलों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि अगर मेले में झूले नहीं होंगे तो बच्चों और महिलाओं के लिए आकर्षण कम हो जाएगा। उनके मुताबिक मेले में आने वाले परिवारों के लिए धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन भी आयोजन का हिस्सा रहा है।उन्होंने कहा कि झूले मेले की पहचान और आकर्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए प्रशासन को सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए झूलों के संचालन की अनुमति देने पर विचार करना चाहिए।

‘ऐतिहासिक परंपरा को रोकने की कोशिश’

मेला समिति ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व लगातार मेले के आयोजन में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक मेले के आयोजन में किसी भी तरह की अनावश्यक अड़चन नहीं आनी चाहिए।हालांकि समिति की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए इस संबंध में लगाए गए आरोपों को समिति के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।अध्यक्ष राज किरण राज ने कहा कि यह मेला उनके समाज और क्षेत्र की पुरानी परंपरा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसे केवल एक सामान्य आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समिति के अनुसार, मेले के जरिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता भी देखने को मिलती है।

झूले और दुकानों की अनुमति देने की मांग

मेला समिति ने प्रशासन से मांग की है कि झूले और दुकानों के लिए जल्द अनुमति प्रदान की जाए, ताकि आयोजन की तैयारियां समय पर पूरी की जा सकें। समिति का कहना है कि यदि अनुमति मिलने में देरी होती है तो मेले की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में परेशानी हो सकती है।समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि वे प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मेले का आयोजन करना चाहते हैं। उनका उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो तथा मेले में सुरक्षा और व्यवस्था भी बनी रहे।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर भी जोर

मेले में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। समिति की ओर से प्रशासन से अपील की गई है कि आयोजन स्थल पर आवश्यक सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाए।झूलों की अनुमति मिलने की स्थिति में उनकी सुरक्षा और संचालन से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी होगा। समिति का कहना है कि प्रशासन की अनुमति और निर्धारित मानकों के तहत ही मेले में सभी गतिविधियां संचालित की जानी चाहिए।

प्रेस वार्ता में पदाधिकारी और समाज के लोग रहे मौजूद

प्रेस वार्ता में मेला समिति के अध्यक्ष राज किरण राज के अलावा पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार वाल्मीकि सहित समिति के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने मेले के आयोजन को लेकर अपनी बात रखी और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।समिति का कहना है कि गोगा वीर चौहान और गुरु गोरखनाथ से जुड़ा यह मेला लखनऊ की पुरानी परंपराओं में शामिल है, इसलिए इसके आयोजन को लेकर किसी भी तरह की समस्या का समाधान बातचीत और आपसी समन्वय से किया जाना चाहिए।

प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर

फिलहाल मेले में झूले लगाने की अनुमति को लेकर मेला समिति और प्रशासन के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। समिति ने प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की अपील की है। अब देखना होगा कि 28 और 29 अगस्त को प्रस्तावित मेले से पहले झूलों और दुकानों को लेकर अनुमति मिलती है या नहीं।मेले को लेकर समिति की तैयारियां जारी हैं और स्थानीय लोगों की नजर भी प्रशासन के अगले कदम पर बनी हुई है। समिति का कहना है कि वह मेले की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना चाहती है।

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