मेरठ में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध की गिरफ्तारी, ATS जांच में सोशल मीडिया और फंडिंग नेटवर्क के आरोप

Editorial
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मेरठ उत्तर प्रदेश एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार, 24 वर्षीय मोहम्मद जफर को मेरठ की एक मस्जिद से पकड़ा गया। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला है और उसके संपर्क कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े लोगों तथा पाकिस्तान में मौजूद संदिग्ध हैंडलर्स से थे। मामले की जांच अब उसके संपर्कों और कथित नेटवर्क तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ाई जा रही है।

सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने का आरोप

एटीएस की जांच के मुताबिक, मोहम्मद जफर कथित तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कट्टरपंथी विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए कर रहा था। एजेंसी का आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो और सामग्री साझा करता था, जिनमें युवाओं को हिंसक विचारधारा की ओर प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को अपना आदर्श मानता था और उसके भाषणों एवं अन्य आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया पर प्रसारित करता था। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और मामले में सामने आए सभी तथ्यों का न्यायिक प्रक्रिया के दौरान परीक्षण होना बाकी है।

मोबाइल फोन की जांच में सामने आए अहम सुराग

एटीएस के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कई ऐसे डिजिटल संपर्क और ग्रुप सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि मोबाइल में पाकिस्तान से जुड़े कुछ व्हाट्सएप ग्रुप और कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से संबंधित बातचीत मिली है।जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था, उसे किस तरह की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी और उसके नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच को भी मामले में अहम माना जा रहा है।

टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच

मामले में कथित टेरर फंडिंग का एंगल भी सामने आया है। एटीएस के अनुसार, आरोपी ने एक मदरसे के नाम पर चंदा जुटाया और कथित तौर पर उस रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पाकिस्तान में मौजूद संपर्कों तक भेजा। जांच एजेंसी अब इस पूरे आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।एटीएस यह भी जांच कर रही है कि रकम कहां से आई, किन माध्यमों से भेजी गई और इसका कथित इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। इस पहलू में बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

उत्तर प्रदेश एटीएस ने मोहम्मद जफर के खिलाफ यूएपीए की संबंधित धाराओं के साथ बीएनएस-2023 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी से उसके कथित संपर्कों, गतिविधियों और विचारधारा से जुड़े कई सवाल किए गए हैं।एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की गतिविधियां व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थीं या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। इसके लिए उसके संपर्क में आए लोगों और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

मेरठ में ATS की कार्रवाई के बाद बढ़ी सतर्कता

स्वतंत्रता दिवस के आसपास पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क रही हैं। मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में एटीएस की हालिया कार्रवाइयों के बाद सुरक्षा व्यवस्था और संदिग्ध नेटवर्क की निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।जांच एजेंसी का फोकस अब सिर्फ गिरफ्तार किए गए आरोपी तक सीमित नहीं है। उसके कथित संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों, आर्थिक लेनदेन और पाकिस्तान से जुड़े संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है।

आगे क्या?

मोहम्मद जफर को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। एटीएस उसके कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी की गतिविधियों का दायरा कितना बड़ा था और उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे।फिलहाल इस मामले में एटीएस के आरोप जांच का हिस्सा हैं। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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