लखनऊ राजधानी लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि धीरेंद्र की हत्या की साजिश में उनके चालक रवि तिवारी की भूमिका बताई जा रही है। जांच के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के लिए चालक ने करीब दो लाख रुपये में असलहा खरीदा था।पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि हत्या की साजिश किसने रची, इसके पीछे असली वजह क्या थी और धीरेंद्र की हत्या के लिए कथित तौर पर किससे सौदा किया गया था। प्रारंभिक जांच में 40 लाख रुपये की सुपारी अथवा बांगरमऊ में दो दुकानें और 10 लाख रुपये नकद देने की बात सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की पुलिस जांच कर रही है और हत्या की अंतिम वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
चालक ने दो लाख रुपये में खरीदा था असलहा
जांच में सामने आया है कि धीरेंद्र के चालक रवि तिवारी ने कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल करने के लिए अमीनाबाद से असलहा खरीदा था। इसके लिए उसे करीब दो लाख रुपये दिए गए थे। पुलिस के अनुसार, यह रकम कथित साजिशकर्ताओं की ओर से उपलब्ध कराई गई थी।बताया जा रहा है कि चालक को इसके अतिरिक्त भी एक लाख रुपये दिए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम किस उद्देश्य से दी गई थी और इस पूरी साजिश में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।जांच एजेंसियां चालक से पूछताछ के आधार पर उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिनके नाम इस मामले में सामने आ रहे हैं।

40 लाख या दुकान और नकदी का कथित सौदा
पुलिस की जांच में हत्या के पीछे कथित आर्थिक सौदे की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, वारदात के लिए 40 लाख रुपये देने की बात हुई थी। इसके अलावा एक अन्य विकल्प के तौर पर बांगरमऊ में दो दुकानें और 10 लाख रुपये नकद देने का कथित सौदा होने की बात सामने आई है।हालांकि अभी पुलिस इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि वास्तव में सौदा किसके बीच हुआ था और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच अधिकारियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि कथित रकम या संपत्ति का लालच हत्या की साजिश का मुख्य कारण था या इसके पीछे कोई अन्य विवाद था।
हत्या की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर उनकी हत्या क्यों की गई। पुलिस की जांच में बांगरमऊ से जुड़े जमीन विवाद का एंगल सामने आया है।बताया गया है कि धीरेंद्र ने सरकारी जमीन पर कथित कब्जों की शिकायत प्रशासन से की थी। इसी वजह से कुछ लोगों से उनकी रंजिश होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस बांगरमऊ में ऐसे लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है, जिनका नाम सरकारी जमीन से जुड़े विवादों में सामने आया है।पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या जमीन विवाद और हत्या की साजिश के बीच कोई सीधा संबंध है।
चालक ने साथी को भी साजिश में शामिल किया
जांच के मुताबिक चालक रवि तिवारी ने अपने साथी ओमकार को भी कथित तौर पर वारदात में शामिल किया था। पुलिस का कहना है कि साजिश के तहत चालक ने घटना को अंजाम देने में भूमिका निभाई।रवि को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद सोमवार को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब पुलिस उसे कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। इसके लिए अदालत में अर्जी भी दाखिल की गई है।कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस कथित साजिशकर्ताओं, आर्थिक लेनदेन और हत्या की योजना से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेगी।
पुलिस को गुमराह करने के लिए लिया गया था एक नाम
पूछताछ के दौरान रवि ने पुलिस को उन्नाव निवासी मोनू सिंह का नाम बताया था। उसका दावा था कि वारदात के समय मोनू वहां मौजूद था। लेकिन पुलिस ने जब घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो मोनू की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई।इसके बाद पुलिस को शक हुआ कि जांच को भटकाने के लिए गलत नाम बताया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रवि ने मोनू का नाम क्यों लिया और क्या किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर ऐसा किया गया था।
STF भी जांच में जुटी, पांच पुलिस टीमें गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए पांच टीमें गठित की हैं। इसके अलावा एसटीएफ की टीम को भी जांच में लगाया गया है। एसटीएफ ने उन्नाव में डेरा डालकर मामले से जुड़े संभावित कनेक्शन की पड़ताल शुरू कर दी है।पुलिस ने रवि के पास से 20 हजार रुपये बरामद किए हैं। इसके साथ ही धीरेंद्र की एसयूवी को भी कब्जे में लेकर जांच की जा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जल्द ही साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो गोलियों की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार धीरेंद्र प्रताप सिंह को दो गोलियां लगी थीं। रिपोर्ट में एक गोली सिर और दूसरी सीने में लगने की बात सामने आई है। जांच के लिए विसरा भी सुरक्षित रखा गया है।अब पुलिस की जांच का फोकस कथित सुपारी, जमीन विवाद, आर्थिक लेनदेन और साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका पर है। धीरेंद्र की हत्या के पीछे कौन था और कथित 40 लाख रुपये या दुकान-नकदी के सौदे की सच्चाई क्या है, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।फिलहाल पुलिस और एसटीएफ अलग-अलग एंगल से मामले की जांच कर रही हैं। बांगरमऊ के जमीन विवाद से लेकर कथित सुपारी तक, हर कड़ी को जोड़कर हत्याकांड की पूरी साजिश का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।
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