रिपोर्ट :मो अरशद
- गांव की समस्या जिला स्तर तक पहुंचना जिम्मेदारी में कमी का संकेत
- लेखपाल और सचिव गांव में करेंगे रात्रि विश्राम
- पेयजल और जलभराव की समस्या 3 दिन में होगी दूर
- IGRS शिकायतों पर प्रशासन की पैनी नजर
- बिना अनुमति अनुपस्थित रहे तो होगी कार्रवाई
- सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र ग्रामीण तक पहुंचाने पर जोर
- भूमि विवाद और सरकारी जमीन पर भी नजर
- निराश्रित गोवंश और सड़क पर गोबर डालने की समस्या का समाधान
- हर सप्ताह चलेगा स्वच्छता अभियान
- आपदा और संदिग्ध घटनाओं की सूचना तुरंत देने के निर्देश
- गांवों में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
- अधिकारियों को लगातार सीखने की सलाह
- अभिलेख और आईजीआरएस प्रक्रिया की दी गई जानकारी
मुरादाबाद गांव की छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए अब ग्रामीणों को तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रशासन ने ग्राम स्तर पर ही समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिवों को अपने आवंटित गांवों में रात्रि विश्राम करने और ग्राम सचिवालय से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।मुरादाबाद के पंचायत भवन सभागार में लेखपालों, ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम पंचायतों के लिए नामित नोडल अधिकारियों की विस्तृत कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मंडलायुक्त संगीता सिंह, जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया और मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी की मौजूदगी में ग्राम स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को लेकर विस्तार से दिशा-निर्देश दिए गए।प्रशासन ने साफ किया कि ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान स्थानीय स्तर पर ही होना चाहिए। पेयजल, जलभराव, गंदगी और प्रकाश जैसी तत्काल समस्याओं को तय समयसीमा में दूर करना होगा। साथ ही आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गांव की समस्या जिला स्तर तक पहुंचना जिम्मेदारी में कमी का संकेत
मंडलायुक्त संगीता सिंह ने कहा कि ग्राम स्तर की समस्याओं का समाधान गांव में ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अगर किसी गांव की समस्या जिला स्तर तक पहुंचती है तो इसे संबंधित ग्राम स्तरीय कर्मचारी के दायित्वों के निर्वहन में कमी के तौर पर देखा जाएगा।उन्होंने लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिवों को अपने-अपने आवंटित गांवों में रहकर काम करने और ग्रामीणों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। प्रशासन का उद्देश्य यही है कि ग्रामीणों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार तहसील या जिला कार्यालय न जाना पड़े।मंडलायुक्त ने सरकारी और सार्वजनिक भूमि का निरीक्षण कराने, उसका चिन्हांकन करने तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

लेखपाल और सचिव गांव में करेंगे रात्रि विश्राम
कार्यशाला में ग्राम स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि गांव को बेहतर और आदर्श गांव बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का ग्रामीणों के बीच रहना जरूरी है।लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिवों को अपने आवंटित गांवों में रात्रि विश्राम करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें ग्राम सचिवालय से कार्य करने के साथ ही ग्रामीणों से लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।प्रशासन का मानना है कि अधिकारियों की गांव में नियमित मौजूदगी से स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल सकेगी और उनका समाधान भी तेजी से किया जा सकेगा।

पेयजल और जलभराव की समस्या 3 दिन में होगी दूर
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, हैंडपंप, प्रकाश, जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट समयसीमा दी गई है।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऐसी तात्कालिक समस्याओं का समाधान तीन दिन के भीतर कराया जाए। इसके अलावा कोई भी प्रकरण 15 दिन से अधिक लंबित नहीं रहना चाहिए।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों को केवल कागजों पर निस्तारित करने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति की वास्तविकता जांची जाए। शिकायतकर्ता की संतुष्टि को भी निस्तारण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।

IGRS शिकायतों पर प्रशासन की पैनी नजर
आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारी कर्मचारी शिकायतकर्ता से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर समस्या की जांच करें।लेखपालों को अपनी आख्या तथ्यात्मक और गुणवत्तापूर्ण रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही आश्वासन रजिस्टर और शिकायत पुनरावृत्ति रजिस्टर तैयार कर उनकी नियमित निगरानी करने को कहा गया।प्रशासन का लक्ष्य है कि एक ही शिकायत बार-बार सामने न आए और शिकायतकर्ता को वास्तविक समाधान मिले।

बिना अनुमति अनुपस्थित रहे तो होगी कार्रवाई
ग्राम स्तर पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिव बिना सूचना के अनुपस्थित न रहें।छुट्टी के लिए सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। महत्वपूर्ण त्योहारों और आवश्यक अवसरों पर सचिव, लेखपाल, एडीओ, बीडीओ और राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर अवकाश नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं।इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक और विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना है।

सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र ग्रामीण तक पहुंचाने पर जोर
कार्यशाला में सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों तक शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने फार्मर रजिस्ट्री, आयुष्मान कार्ड, फैमिली आईडी और आभा आईडी जैसी योजनाओं में पात्र लोगों का संतृप्तीकरण कराने के निर्देश दिए।परिवार रजिस्टर को ऑनलाइन अपडेट करने और इसकी जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने को भी कहा गया।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।

भूमि विवाद और सरकारी जमीन पर भी नजर
राजस्व ग्रामों के भूमि अभिलेखों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को भूमि से संबंधित शिकायतों की वास्तविक स्थिति की जानकारी रखने और सरकारी एवं सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई करने को कहा गया।मंडलायुक्त ने ग्राम स्तर पर भूमि संबंधी मामलों की निगरानी को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। प्रशासन का मानना है कि समय रहते भूमि विवादों की पहचान होने से बड़े विवादों को रोका जा सकता है।
निराश्रित गोवंश और सड़क पर गोबर डालने की समस्या का समाधान
गांवों में निराश्रित गोवंश की समस्या को लेकर भी जिलाधिकारी ने स्थायी समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश को नजदीकी गोशालाओं में पहुंचाया जाए।खुले में गोवंश छोड़ने वालों के खिलाफ ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित कर नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी।इसके अलावा सड़कों पर गोबर या खाद डालने की परंपरा समाप्त कराने और खाद के लिए निर्धारित गड्ढों की भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के निर्देश दिए गए।सड़कों के किनारे पशु बांधने या गोबर के ढेर से सड़क खराब होने की स्थिति में सचिव और लेखपाल संबंधित विभाग तथा चौकी प्रभारी से समन्वय कर समस्या का समाधान कराएंगे।
हर सप्ताह चलेगा स्वच्छता अभियान
गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सचिवों को सप्ताह में कम से कम एक दिन अनिवार्य रूप से स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।इस अभियान में ग्रामकुल को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा सचिव और लेखपालों को सरकारी भवनों तथा स्वास्थ्य केंद्रों का साप्ताहिक निरीक्षण करने को कहा गया है।निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, आवश्यक व्यवस्थाओं और भवनों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकारी भवनों पर वेदरशेड, प्लास्टिक पेंट और छतों की डीप प्रूफिंग जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया।
आपदा और संदिग्ध घटनाओं की सूचना तुरंत देने के निर्देश
प्रशासन ने ग्राम स्तर पर आपदा प्रबंधन को लेकर भी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। गांव में किसी तरह की दुर्घटना, विवाद की आशंका, जलभराव, खाद्य पदार्थों में मिलावट, ई-वेस्ट जलाने या मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी घटना सामने आने पर वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना देनी होगी।आपदा की स्थिति में ग्राम प्रधान, सचिव और लेखपाल एडीओ, बीडीओ, कानूनगो और एसडीएम को सूचना देंगे। इसके बाद संबंधित विभागों को मौके पर बुलाकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।ग्राम चौकीदार की भूमिका को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
गांवों में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
मंडलायुक्त ने न्याय पंचायत, विकासखंड और तहसील स्तर पर बनाए जा रहे व्हाट्सऐप ग्रुप की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल करके गांव से जुड़ी सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान किया जा सकता है।बारिश, आंधी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए सचेत ऐप की उपयोगिता के बारे में भी ग्रामीणों को जानकारी देने और अधिक से अधिक लोगों से ऐप डाउनलोड कराने के निर्देश दिए गए।कार्यशाला में सतत विकास लक्ष्यों यानी SDGs और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में ग्राम स्तरीय अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों को लगातार सीखने की सलाह
मंडलायुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार सीखने, काम की प्राथमिकता तय करने और अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने की सलाह दी।उन्होंने राजस्व मामलों के प्रभावी निस्तारण के लिए ‘श्रीजी’ मॉडल का उल्लेख करते हुए भविष्य में मंडल में राजस्व संबंधी मामलों को प्राथमिकता और गंभीरता के आधार पर निस्तारित करने की बात कही।
अभिलेख और आईजीआरएस प्रक्रिया की दी गई जानकारी
कार्यशाला में एडीएम वित्त एवं राजस्व ममता मालवीय ने लेखपाल, कानूनगो और सचिवों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी दी।एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने लेखपालों द्वारा रखे जाने वाले अभिलेखों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। वहीं एडीएम सिटी अंकुर श्रीवास्तव ने आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया समझाई और शिकायत प्राप्त होते ही शिकायतकर्ता से संपर्क करने के निर्देश दिए।इस अवसर पर जॉइंट मजिस्ट्रेट शक्ति दुबे, जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा, सभी एसडीएम और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का संदेश साफ
मुरादाबाद में आयोजित इस कार्यशाला से प्रशासन ने ग्राम स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब गांव की समस्याओं को लंबित रखने के बजाय उनका समाधान स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित करना होगा। तीन दिन में तात्कालिक समस्याओं का समाधान और 15 दिन से अधिक किसी प्रकरण को लंबित न रखने के निर्देशों से साफ है कि प्रशासन शिकायतों के निस्तारण और ग्राम स्तर पर अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर गंभीर है।
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